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पुरानी कलाई घड़ी और उसके साथ रखी पारिवारिक यादें, जो भावनात्मक लगाव और स्मृतियों का प्रतीक हैं।

घड़ी

यह कविता एक साधारण-सी घड़ी से जुड़े गहरे भावनात्मक संबंध को व्यक्त करती है। पिता द्वारा विवाह में उपहार में दी गई घड़ी केवल समय बताने का साधन नहीं, बल्कि प्रेम, दुआओं और स्मृतियों की अमूल्य निशानी बन जाती है। उसके खो जाने के बाद भी उससे जुड़ी यादें मन में जीवित रहती हैं।

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रील्स की चमक में खो गई वो पुरानी शादी

कभी शादियाँ सिर्फ दो लोगों का नहीं, पूरे मोहल्ले का उत्सव हुआ करती थीं। ढोलक की थाप पर गाए जाने वाले बन्ने-बन्नी के गीत, बुआ-मौसी की हंसी, आँगन में उबलती खीर . सब जैसे आज भी स्मृतियों में ताजे हैं। पर अब शादी की रस्में कैमरे की फ्रेमिंग में बंध गई हैं, और भावनाएँ फिल्टरों के नीचे धुंधली।

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