प्रेम कविता
“मुझे फ़र्क नहीं पड़ता”
कभी किसी की मौजूदगी सुकून देती है, लेकिन उसकी गैरमौजूदगी जिंदगी को रोक नहीं पाती। यह कविता प्रेम, आत्मनिर्भरता, तन्हाई और खामोशी के उसी खूबसूरत एहसास को शब्द देती है।
प्रेम का नया सफ़र
क्या प्रेम को एक नई शुरुआत दी जा सकती है? प्रस्तुत कविता ‘प्रेम का नया सफ़र’ अधूरे ख़्वाबों, अनकही भावनाओं और साथ निभाने के नए संकल्प की संवेदनशील अभिव्यक्ति है।
मौन प्रेम की ऋचाएँ
जब प्रेम शब्दों का मोहताज नहीं रहता, तब नीरवता भी बहुत कुछ कहने लगती है. ‘मौन प्रेम की ऋचाएँ’ अनकहे प्रेम और आत्मीय एहसासों की संवेदनशील अभिव्यक्ति है.
सुनहरी ढलती सांझ
ढलती सांझ, खामोश हवा और डूबते सूरज की किरणों में किसी अपने की याद. ‘सुनहरी ढलती सांझ’ प्रेम, विरह और इंतज़ार की भावनाओं को शब्द देती खूबसूरत कविता है.
तुम्हारा प्रेम
कभी किसी के लौटने की प्रतीक्षा समाप्त हो जाती है, लेकिन प्रेम समाप्त नहीं होता. “तुम्हारा प्रेम” इसी अनकहे और अधूरे प्रेम की भावपूर्ण अभिव्यक्ति है.
सुख-दुख के मौसम आते हैं…
सुख-दुख जीवन का हिस्सा हैं. यह कविता प्रेम, मानवता, समता और भलाई के माध्यम से सुखद और शांतिपूर्ण संसार का संदेश देती है.
एक वो रात, एक ये रात
एक रात प्रेम और साथ से भरी थी, दूसरी रात सिर्फ़ स्मृतियों और मीठी टीस के साथ रह गई. यह कविता बीते प्रेम की उसी कसक को शब्द देती है.
अपनी ही आवाज़
कुछ रिश्ते मुकम्मल नहीं होते, फिर भी उम्र भर महसूस होते हैं। ‘अपनी ही आवाज़’ बीती यादों, अधूरे रिश्तों और उस अतीत की कविता है, जो ख़ामोशी में आज भी आवाज़ देता है।
