बंद दरवाज़ा

फैक्ट्री गेट पर खड़ा थका हुआ गार्ड, झुकी कमर और उदास चेहरा

डॉ.रत्ना मानिक टेल्को, जमशेदपुर

आज वह फिर
झुकी कमर,
तेज़ चाल और
धुंधली निगाहों से,
हाथों में टिफिन का थैला पकड़े
जा रहा है
तेज़ कदमों से
रोटी कमाने के लिए।

कीचड़ लगी मटमैली आँखों में
अब कोई ज्वालामुखी
नहीं सुलगता।

समाज की विसंगतियों पर
अब उसकी मुस्कुराहट में
तंज का नुकीलापन नहीं होता,
न ही कामनाओं के गुलमोहर का
कोई सिकुड़ा-सिमटा कतरा
नज़र आता है वहाँ।

अब तो बस
एक निरीहता झलकती है
उसकी आँखों में।

बरसात में टपकती झोपड़ी भी
अब मुँह फुलाए है उससे
अगली बार भादों से पहले
नया कलेवर देने का
वादा जो किया था उससे।

यौवन की दहलीज पर खड़ी बिटिया
समेट लेती है
अपने अंगों को
अपने ही आवरण में,
जैसे सांझ
दिन के उजाले को
आगोश में छुपा लेती है।

काम पर जाते उस आदमी की
धनुष की तरह झुकी कमर ने
कभी बंदूक की तरह
गर्जना, अकड़ना नहीं सीखा है।

वह तो महज़
सुबह आठ से
रात आठ बजे तक,
भात-तरकारी की जुगत में
कर देता है सौदा
अपनी आँखों में
जलते-बुझते जुगनुओं का।

और
कंपनी के लोहे के बने
आदमकद दरवाज़े की सुरक्षा में
ठोकता है
बड़ी मुस्तैदी से सलाम
आती-जाती
बड़ी-बड़ी गाड़ियों को।

गाड़ियों के चमचमाते शीशों के पीछे से
एक उचटती-सी नज़र
उठ जाती है
कभी-कभार
उसकी ओर।

लोहे का आदमकद दरवाज़ा
खुलता है, बंद होता है
और वह चौकस सलाम ठोकता है,
इस आस में कि
अपनी मेहनत के धक्के से
शायद वह भी कभी
खोल सकेगा
अपनी किस्मत के
बंद दरवाज़े को,

और दे सकेगा उन्मुक्त उड़ान
अपनी आँखों के जुगनुओं को…

लेखिका के बारे में-


डॉ. रत्ना मानिक
एक समर्पित शिक्षिका, संवेदनशील लेखिका और साहित्य की गहराइयों को समझने वाली विदुषी हैं। स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़ी उनकी जड़ें उन्हें संस्कार और संघर्ष की प्रेरणा देती हैं।लोयोला बी.एड. कॉलेज से शिक्षण प्रशिक्षण प्राप्त कर उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत आधार बनाया। कोल्हान विश्वविद्यालय से पीएच.डी. कर उन्होंने हिंदी साहित्य में अपनी विद्वता को प्रमाणित किया। 2001 से हिंदी शिक्षिका के रूप में निरंतर विद्यार्थियों को ज्ञान और संस्कार प्रदान कर रही हैं। विभागाध्यक्ष और बोर्ड परीक्षाओं में हेड एग्जामिनर के रूप में उनकी जिम्मेदारी और दक्षता स्पष्ट झलकती है। लेखन की दुनिया में उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाते हुए ‘आंखों के जुगनू’ जैसे कहानी संग्रह को प्रकाशित कराया। देशभर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं और समाचार पत्रों में उनकी रचनाएं नियमित प्रकाशित होती रही हैं। उनकी लेखनी में संवेदना, समाज और जीवन की सच्चाइयों का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। डॉ. रत्ना मानिक शिक्षा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में निरंतर प्रेरणा की एक उज्ज्वल मिसाल हैं।

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