गरीबी
दीवार के उस पार..
एक मासूम बच्चा सिर्फ एक सुंदर बिल्डिंग को छूना चाहता था, लेकिन समाज ने उसे “चोर” कहकर थप्पड़ दे दिया। यह कहानी गरीबी, स्वाभिमान और सपनों के बीच खड़ी अदृश्य दीवारों की मार्मिक सच्चाई को उजागर करती है।
काली राख की बस्ती
यह मार्मिक कथा बठिंडा की काली राख से ढकी बस्ती में रहने वाले एक गरीब परिवार की है, जिसकी जिंदगी एक दर्दनाक घटना के बाद हमेशा के लिए बदल गई। गरीबी, मजबूरी और समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर करती यह कहानी दिल को झकझोर देती है।
बंद दरवाज़ा
“बंद दरवाज़ा” एक मेहनतकश इंसान की कहानी है, जो रोज़ी-रोटी के संघर्ष में अपने सपनों को दबा देता है, लेकिन फिर भी उम्मीद के जुगनू उसकी आँखों में टिमटिमाते रहते हैं।
महंगाई
आज की महंगाई ने जीवन को बहुत मुश्किल बना दिया है। हर चीज़ की कीमत बढ़ गई है और आम आदमी का घर चलाना कठिन हो गया है। पहले जो छोटी-सी चीज़ें आसानी से मिल जाती थीं जैसे मोटर या भिंडी . अब उन्हें खरीदना भी मुश्किल हो गया है। तेल न होने पर खाना बनाना भी मुश्किल हो जाता है और परेशानियाँ बढ़ जाती हैं। लोग पूछते हैं तो कुछ कह नहीं पाते, और ना पूछें तो मन में ही दुःख बढ़ता रहता है। महंगाई की मार से जीवन इतना जटिल हो गया है कि इसे अनदेखा करना भी मुश्किल है।
लिहाफ़ : कहानी जो सुनी थी…
पूस की रात, पतले लिहाफ़ और भूख से जूझते एक परिवार की कहानी में ठंड, गरीबी और संघर्ष के बीच भी उम्मीद की रोशनी झलकती है। जब रिक्शा चला कर लाया गया आटा-दाल और मुनिया की मुस्कान से ढेबरी से ज़्यादा रौशनी उनकी झोपड़ी में फैलती है, तो यह कहानी केवल ठंड की नहीं, जुगत और जज़्बे की भी बन जाती है।
