शादीशुदा रिश्तों में बढ़ती ‘सीक्रेट चैट्स’ की लत

A middle-aged Indian woman in her early 40s sits cross-legged on a bed in a dimly lit bedroom, softly illuminated by the glow of her mobile phone. She is looking down at the screen, smiling faintly with an expression that conveys a mix of secrecy, guilt, and quiet pleasure. Her husband is visible in the background, seated in a chair, engrossed in his laptop, completely unaware of her. The room has a warm, intimate atmosphere typical of an Indian middle-class home, with shadows highlighting the emotional distance between the couple.

नया खतरा या नया नॉर्मल?

मधु चौधरी, लेखिका, बोरीवली (मुंबई)

शादीशुदा महिला हो या पुरुष, अब उम्र की कोई बंदिश नहीं रही। सोशल मीडिया या वॉट्सऐप पर किसी दूसरे पुरुष या महिला से घंटों बातें करना, आज का ‘न्यू नॉर्मल’ बन चुका है। कई मामलों में, काम के सिलसिले में या किसी औपचारिक मुलाकात के बाद इन बातों की शुरुआत होती है, जो धीरे-धीरे कब एक आदत में तब्दील हो जाती है, पता ही नहीं चलता।
​आजकल अक्सर देखने में आता है कि शादीशुदा जोड़ों में से कोई एक, किसी ऐसी रिलेशनशिप में इंगेज (engage) है जिसे ‘अनैतिक’ का दर्जा तो नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह ‘स्वीकार्य’ श्रेणी में भी नहीं आता। ” दोस्ती ” के नाम की दलील देकर ऐसे संबंधों को आगे बढ़ाया जाता है । वैसे तो यह किसी भी आयु वर्ग में संभव है, लेकिन 40 से 50-55 की उम्र वालों में ये किस्से अब बेहद आम हो चले हैं।
​ऐसा बिल्कुल नहीं है कि इन रिश्तों में रहने वाले अपने वैवाहिक जीवन से दुखी हैं, या उन्हें अपने जीवनसाथी से प्यार नहीं है। बल्कि इनमें से अधिकतर तो अपने परिवार के प्रति पूरी तरह समर्पित होते हैं। पर शायद, मन का कहीं एक छोटा सा कोना खाली रह जाता है। इनके पार्टनर का उदासीन रवैया , और इनके टेलेंट को नजरंदाज करना भी वजह बनती है दूसरी ओर झुकाव के लिए।
​जब ऐसे खालीपन में इनकी मुलाकात किसी ऐसे व्यक्ति से होती है जो इनका ध्यान अपनी ओर खींचने में सफल हो जाता है – चाहे वह काम के सिलसिले में हो या संयोगवश – तो मुलाकातों और बातों का सिलसिला चल निकलता है। उम्र के इस पड़ाव पर किसी दूसरे से मिला एक छोटा सा ‘कॉम्प्लिमेंट’ भी दिल को अंदर तक गुदगुदाने के लिए काफी होता है। रोजमर्रा की जिंदगी की बोरियत से अलग, यह अहसास कुछ खास होता है।
​हालाँकि, ऊपरी तौर पर इसे कभी जाहिर नहीं किया जाता। शुरुआत अक्सर ‘ना’ से ही होती है, लेकिन लगातार कनेक्ट रहने के कारण धीरे-धीरे, जाने-अनजाने में, ‘हां’ या ‘ना’ के कोई खास मायने नहीं रह जाते। जिंदगी में कुछ नयापन ढूंढते हुए वे एक ऐसे रास्ते पर निकल पड़ते हैं जिसकी कोई मंजिल नहीं है, और सच कहें तो उन्हें मंजिल की तलाश भी नहीं होती।
​सिर्फ ‘फील गुड फेक्टर’ (Feel good factor) के मकसद से, वे जीवन के इस खतरनाक मोड़ से गुजरने की गुस्ताखी करते हैं। जब तक यह बातें – बातों तक ही सीमित रहती है, तब तक तो ठीक है, लेकिन जहां बातें – मुलाकातों में बदलने लगती है वहां मामला थोड़ा गंभीर रूप ले सकता है। और परिणाम खतरनाक। अमूमन यह देख गया है कि औरतें भावनात्मक जुड़ाव महसूस करती हैं, लेकिन पुरुषों के लिए एक दिल बहलाने का साधन मात्र होते हैं ऐसे संबंध ।
पुरुष एक साथ ऐसे कई “रिलेशनशिप” में रहने की भी क्षमता रखते हैं , जो सामान्यतः महिलाएं नहीं करती हैं ।
​ऐसा नहीं है कि यह पुराने समय में नहीं होता था, लेकिन तब यह (विशेषकर गृहिणियों के लिए) लगभग असंभव था। आज इन गतिविधियों को अंजाम देने के लिए साधन सुलभता से उपलब्ध हैं। वॉट्सऐप, फेसबुक या इंस्टाग्राम जैसे साधनों के चलते कई बार बरसों-बरस तक इन ‘निजी पलों’ की भनक किसी को नहीं लग पाती।
​इन रिश्तों में एक-दूसरे से ना कोई विशेष उम्मीद होती है, ना ही कोई हक़ वाली भावना। बस इंतजार होता है उस ‘हरी बत्ती’ (Online Status) का… और कभी उस ‘Blue Tick’ का। मामला प्यार-व्यार वाला भी नहीं होता, बस यूं ही सुबह और शाम गुजरते रहते हैं। फर्क सिर्फ इतना आता है कि सुबह थोड़ी गुलाबी हो जाती है और शाम थोड़ी रंगीन।
​समस्या तो तब खड़ी होती है जब दुर्घटना-वश, इन हरी-नीली बत्तियों की खबर उनके पार्टनर को लग जाए। फिर क्या? फिर होता है बड़ा बवाल।
​ऐसी स्थिति में तुरंत गलती स्वीकार कर ली जाती है और सारी मस्ती मिनटों में ‘छू-मंतर’ हो जाती है। तब उन हरी और नीली बत्तियों की जगह, सिर्फ और सिर्फ ‘खतरे की लाल बत्ती’ दिखाई देती है।

कहीं – कहीं इस छोटी सी गलती को नजरअंदाज कर जीवन फिर से अपनी गति पकड़ लेता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गलती शादीशुदा जिंदगी में एक ऐसी दरार पैदा कर देती है, जिसे चाह कर भी भरा नहीं जा सकता । कुछ क्षणिक सुख के लिए अपने जीवन भर की खुशियों को दांव पर लगाना, कहां तक उचित है ? बरसों की बनाई प्रतिष्ठा और विश्वास मिनटों में चकनाचूर हो जाता है ! किसी का विश्वास जीतने के लिए बरसों लग जाते हैं लेकिन टूटने में सिर्फ कुछ पल ।पूरी तरह गलत ना होकर भी स्वयं को सही साबित करना भी मुमकिन नहीं होता । अपने दिल और दिमाग को sync रखें । छुपा कर किया गया कोई भी कार्य आपको सिर्फ कुछ क्षणों की खुशी का भ्रम देता है ।

19 thoughts on “शादीशुदा रिश्तों में बढ़ती ‘सीक्रेट चैट्स’ की लत

  1. मधु जी आज के वातावरण के लिए ये लेख बिल्कुल सटीक बैठता है। बहुत-बहुत बधाई आपको।

    1. नया खतरा……. बिल्कुल प्रासंगिक और समसामयिक है। ऐसे सारगर्भित आलेख हेतु मधु जीकी लेखनी नमस्या है । यहां चर्चित विकट समस्या है । साधुवाद

    1. बेहतरीन लिखा है आपने जैसा चल रहा है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *