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अम्मा

म्मा: दादी की यादों, संस्कारों और ममता पर भावुक कविता

दिव्या सिंह, प्रसिद्ध लेखिका

अम्मा की यादें आज भी साथ में हैं,
चाँदनी रात में वो आँगन में अंताक्षरी,
रोज़ रात को एक नई कहानी,
हर कहानी में कोई सीख छुपी.

तेरी ही गोद में सोती थी,
तेरी साड़ी में छुप जाती थी,
जब मुझे छोड़ तुम जाती थी,
मेरी जान पे बन जाती थी.

अब माँ की मार से कौन बचाएगा,
रात में कहानी कौन सुनाएगा.
तुम भी चली जाओगी, सोचा भी न था,
वो मनहूस दिन आज ही का था.

जब सुबह फ़ोन पर बात हुई,
रात में अस्पताल में अंतिम मुलाक़ात हुई.
तुम मुझे देख मुस्काई थीं,
मुझमें भी हिम्मत आई थी कि
अब अम्मा ठीक हो जाएगी.

कब सोचा था इतना तन्हा कर जाओगी.
तेरी सीख आज भी साथ में है,
तेरी महक भी मेरे साथ में है.

कुछ ख़त भी आपके सँभाल कर रखे हैं.
है भीड़ बहुत आजू-बाजू,
रिश्तों के भी मेले हैं.
पर सच बताऊँ अम्मा,
दो हज़ार दस फरवरी
के बाद से हम निपट अकेले हैं.

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