father teaching math to child with broken pens and nervous expressions, funny childhood memory scene

पिता और पढ़ाई

पिता और पढ़ाई का रिश्ता जीवन भर का एक अद्वितीय अनुभव है, जिसमें कभी प्रेम, कभी भय, और कभी हँसी का मिश्रण होता है। एक गणित अध्यापक पिता का अपने बच्चों को पढ़ाने का अंदाज़, उनके पेन खोजने की आदतें, और ‘लाभ-हानि’ के दो थप्पड़ों की यादें, यह सब मिलकर एक घरेलू, आत्मीय और हास्य-व्यंग्य से भरी स्मृति बन जाते हैं। यह संस्मरण न सिर्फ एक पिता की जटिलताओं को दिखाता है, बल्कि उनके भीतर छिपे प्रेम, अनुशासन और अनोखी सोच को भी उजागर करता है

Read More
संत पंचमी और सरस्वती पूजा के अवसर पर वसंत के रंगों और प्रकृति की सुंदरता को दर्शाती हिंदी कविता का प्रतीकात्मक दृश्य

वसंत का संगीत

यह कविता बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर सरस्वती माता के आशीर्वाद, प्रकृति के बदलते रंग और ऋतुओं के मिलन को उजागर करती है। वसंत के आगमन से जीवन में उमंग और विद्या की महत्ता का सुंदर चित्रण।

Read More

गुलाल, गीत और मुस्कान

मातृशक्ति भजन मंडली न्यू शिवाजी नगर के फाग उत्सव 2026 में राधा-कृष्ण झांकी, भजन और रंग-गुलाल की मस्ती ने माहौल को भक्तिमय और आनंदमय बना दिया।

Read More
खूबसूरत हिंदी ग़ज़ल: हौसलों को न गिराया कर

उम्मीदों की ग़ज़ल

यह खूबसूरत ग़ज़ल जीवन के गहरे सत्य को सरल शब्दों में व्यक्त करती है। इसमें प्रेम, धैर्य, हौसला और आत्मविश्वास का संदेश छिपा है। ज़िन्दगी कठिन हो सकती है, मगर उसे अपनाना ही जीत है। टूटे ख्वाबों के बाद भी हिम्मत बनाए रखना, दिल की हर बात हर किसी से न कहना और रोशनी को बांटते रहना ये ग़ज़ल इन्हीं जीवन मूल्यों को सलीके से सामने लाती है। हर शेर इंसान को भीतर से मजबूत बनने, खुद से जुड़ने और उम्मीद की लौ जलाए रखने की प्रेरणा देता है।

Read More
लखनऊ में अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन के दौरान बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को सम्मानित करते हुए अतिथि

नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल सम्मानित

लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में नागपुर की बाल कवियित्री मिहूं अग्रवाल को उनकी उत्कृष्ट साहित्यिक प्रतिभा के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया।

Read More

मनचाहे रंग…

वह चित्रकार थी, लेकिन कभी अपने चित्त और आत्मा के अनुरूप पूरी तरह नहीं रंग भर पाई। समाज उसे “बेचारी” कहता था। तब वह कृष्ण के सारथी की तरह अपने रथ को चलाती थी। अब वह स्वतंत्र है—बे लगाम घोड़े दौड़ाती है, वरदान मांगती है, और उपकार के बदले कुछ चाहती नहीं। आसमान नीला नहीं, धरती बंजर और पानी सूखा है, फिर भी वह अपने मनचाहे रंग अपनी आत्मा में भरती है, चाहे वह गणितीय नियमों के आधार पर हों। आज वह अब बेचारी नहीं, बल्कि वैचारगी और सशक्तता का प्रतीक है।

Read More

अँधेरे में जुगनू

यह कविता प्रेम, प्रतीक्षा और आत्मसंवाद का सूक्ष्म आख्यान है। चाँद और बाहरी रोशनी को ठुकराकर कवयित्री अपने भीतर के जुगनुओं की रोशनी पर भरोसा करती है। लेकिन प्रेम की इच्छा जब प्रतीक्षा का दीपक बन जाती है, तो वही रोशनी धीरे-धीरे क्षीण होने लगती है। यह रचना उस क्षण को पकड़ती है, जब मन अँधेरे से डरता नहीं, बल्कि उसे शांति और मुक्ति का स्थान मानने लगता है।

Read More
महाशिवरात्रि के दौरान बंद भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर

महाशिवरात्रि पर भीमाशंकर मंदिर रहेगा बंद

महाशिवरात्रि 2026 के दौरान श्री क्षेत्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर भक्तों के लिए बंद रहेगा. नए भव्य सभामंडप, सीढ़ी मार्ग और परिसर विकास कार्यों के चलते सुरक्षा कारणों से जिला प्रशासन ने यह निर्णय लिया है. 12 से 18 फरवरी तक मंदिर में दर्शन संभव नहीं होंगे.

Read More

मीरा का मन

मीरा का जीवन समाज और परिवार की परंपराओं से परे, एक अद्भुत और अद्वितीय प्रेम का प्रतीक था। उसने राजमहल की सारी सुख-सुविधाएँ त्याग दीं और केवल अपने गिरधर गोपाल को ही अपना सर्वस्व मान लिया। जहाँ एक ओर लोग उसे समझाने का प्रयास करते कि कृष्ण तो राधा और रुक्मिणी के हैं, वहीं मीरा के लिए उनका प्रेम सांसारिक पाने और खोने से परे था। मीरा के हृदय में कृष्ण केवल पति या स्वामी नहीं, बल्कि आत्मा के आधार बन चुके थे। उसके लिए यह प्रेम किसी बंधन, किसी सामाजिक मान्यता से नहीं बंधा था। इसी अनुराग ने उसे विष भी अमृत जैसा प्रतीत कराया और हर पीड़ा को भक्ति में बदल दिया। मीरा का यह निस्वार्थ और आत्मिक प्रेम आज भी सच्चे समर्पण की अमिट मिसाल के रूप में जीवित है।

Read More

पुरानी यादों की साउंडट्रैक: ऑडियो कैसेट का जादू

सन 1990 का दशक, जब घरों में टीवी और वीसीआर थे, और मनोरंजन का सबसे बड़ा साधन कैसेटें थीं। फ़िल्में घर पर किराए पर लेकर देखी जातीं ऋषि कपूर और शाहरुख़ की दीवाना या संजय दत्त और माधुरी की साजन और फिर कैसेट लौटाई जाती। देबु की छोटी दुकान, पाकिस्तानी स्टेज प्ले की हास्य कैसेटें, ऑडियो कैसेट की अपनी आवाज़ और गली में बच्चों का टीवी देखने का मज़ाये सब उस समय की यादों का हिस्सा थे। धीरे-धीरे केबल टीवी और डिजिटल तकनीक ने कैसेट का दौर समाप्त कर दिया, लेकिन उस समय का अपनापन और इंतज़ार आज भी यादों में जीवित है।

Read More