पिताजी को कैसे मनाना…

पिता से घूमने जाने की अनुमति मांगती बेटी का भावनात्मक दृश्य पिता से घूमने जाने की अनुमति मांगती बेटी का भावनात्मक दृश्य

मिहूं अग्रवाल, नागपुर (महाराष्ट्र)

मौसम बड़ा सुहाना है,
मुझे दोस्तों संग घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

हँसना है, गाना है हमको,
दोस्तों संग थोड़ा गुनगुनाना है।
फिर एक नई याद बनाना है,
एक-दूसरे को जानना-पहचाना है,
चेहरे पर एक-दूसरे की मुस्कुराहट लाना है।

मौसम बड़ा सुहाना है,
मुझे दोस्तों संग घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

चलता-फिरता बातों का पिटारा है,
समझें एक-दूसरे को—ऐसा यह नज़ारा है।
चटर-पटर कर चाट-पकौड़ी खाना है,
कुछ सुनना उनसे और कुछ अपनी सुनाना है।

मौसम बड़ा सुहाना है,
मुझे दोस्तों संग घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

गर्मी में आइसक्रीम का मज़ा
हमको तो उठाना है।
पिघलने से पहले आइसक्रीम
एक-दूसरे की खा जाना है।
फिर मुँह फुलाकर एक-दूसरे को मनाना है,
इन हसीन पलों को यादों में बसाना है।

मौसम बड़ा सुहाना है,
हमको तो घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

नदी किनारे हमको जाना है,
अपने मन की बातें उन्हें बताना है।
कभी बिछड़ न जाएँ एक-दूसरे से,
दोस्ती को अपनी गहरी और मज़बूत बनाना है।

मौसम बड़ा सुहाना है,
हमको तो घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

भविष्य के सपने सजाना है,
एक-दूसरे के ख़्वाब जानना है।
समझ सकें हम एक-दूजे को,
रहें साथ जीवन भर
इसीलिए थोड़ा वक्त साथ बिताना है।

मौसम बड़ा सुहाना है,
हमको तो घूमने जाना है।
माँ को मनाना आसान है,
पर पिताजी को कैसे मनाना है।

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