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पिता से घूमने जाने की अनुमति मांगती बेटी का भावनात्मक दृश्य

पिताजी को कैसे मनाना…

“पिताजी को कैसे मनाना है” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें दोस्तों के साथ समय बिताने की इच्छा और पिता से अनुमति लेने की मासूम दुविधा को सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त किया गया है।

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चैत्र से फाल्गुन तक हिंदी महीनों और भारतीय त्योहारों को दर्शाती रंगीन बाल कविता चित्रात्मक प्रस्तुति

हिंदी महीनों के नाम

“हिंदी महीनों के नाम” एक सुंदर और शिक्षाप्रद बाल कविता है, जो चैत्र से फाल्गुन तक भारतीय पंचांग के बारह महीनों का सरल और रोचक परिचय देती है। प्रत्येक महीने को उससे जुड़े मौसम और प्रमुख त्योहारों के माध्यम से बच्चों के लिए यादगार बनाया गया है। यह कविता ज्ञान और संस्कृति का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।

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मैं जब पेड़ लगाता हूँ

प्रकृति प्रेम और पर्यावरण संरक्षण की सुंदर अभिव्यक्ति है। इसमें कवि ने पेड़ लगाने के आनंद और उससे जुड़ी संवेदनाओं को सहज बालसुलभ भाव में प्रस्तुत किया है। कविता यह संदेश देती है कि पेड़ केवल फल या छाया ही नहीं देते, बल्कि वे मनुष्य और जीव-जंतुओं — सबके जीवन का आधार हैं। दादी के स्नेहिल शब्दों से लेकर झूले पर झूलने की कल्पना तक, हर पंक्ति में प्रकृति के साथ आत्मीय संबंध झलकता है। यह रचना बच्चों में पेड़ों के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने वाली है।

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