अर्तम काव्य संग्रह की पुस्तक के साथ शिव और कमल का प्रतीकात्मक चित्र

‘अर्तम’ काव्य संग्रह समीक्षा: दिव्या सक्सेना की संवेदनशील कविताएं

मकालीन हिंदी कविता के बदलते परिदृश्य में दिव्या सक्सेना का काव्य संग्रह ‘अर्तम’ एक महत्वपूर्ण हस्तक्षेप के रूप में सामने आता है। यह केवल कविताओं का संकलन नहीं, बल्कि जीवन, संवेदना और आध्यात्मिक चेतना की गहरी पड़ताल है।

आज के दौर में जहां कविता अक्सर सपाट बयानी और अतुकांत शैली तक सीमित होती जा रही है, वहीं ‘अर्तम’ अपनी प्रतीकात्मकता, भाव-गहनता और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण अलग पहचान बनाता है। इस संग्रह में शिवत्व, आत्मबोध, स्त्री-चेतना और जीवन संघर्ष जैसे विषयों को सहज लेकिन प्रभावी भाषा में प्रस्तुत किया गया है।

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पिता से घूमने जाने की अनुमति मांगती बेटी का भावनात्मक दृश्य

पिताजी को कैसे मनाना…

“पिताजी को कैसे मनाना है” एक भावपूर्ण हिंदी कविता है, जिसमें दोस्तों के साथ समय बिताने की इच्छा और पिता से अनुमति लेने की मासूम दुविधा को सरल और हृदयस्पर्शी शब्दों में व्यक्त किया गया है।

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