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नौकरी

दिव्या सिंह, प्रसिद्ध लेखिका

नौकरी सिर्फ़ तन्ख़्वाह नहीं होती,
नौकरी पाबंदी होती है,
नौकरी समझौते सिखाती है,
नौकरी बेवजह भी मुस्कुराना सिखाती है।

नौकरी में जी-हुज़ूरी भी चलती है,
नौकरी से परिवेश बदलता है,
नौकरी सुबह उठना सिखाती है,
नौकरी से घर चलता है।

नौकरी है तो ज़िंदगी रफ़्तार में रहती है,
नौकरी न हो तो रफ़्तार थम जाती है,
उम्र बढ़ जाती है,
चेहरे पर झुर्रियों का मेला लग जाता है।

इसलिए नौकरी सिर्फ़ तन्ख़्वाह नहीं होती।

4 thoughts on “नौकरी

    1. नौकरी हिम्मत रखना मेलजोल बढाना सिखाती है। आपकी लेखनी बहोत बढ़िया 👍👍🙏🙏

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