दरिया और किनारा

कविता में दरिया को जीवन के संघर्ष और पवित्रता का प्रतीक बनाया गया है। दरिया मस्ती और ऊर्जा के साथ बढ़ती है, अपने रास्ते में आने वाली सभी बाधाओं को पार करती है, किनारों से संबंध बनाए रखती है और दूसरों के कष्ट और पापों को समेटती है। यह अपने गंतव्य की ओर दृढ़ता और गति से बढ़ती है, अंततः समुद्र की विशाल बाहों में विलीन होकर अपने सफर का निष्कर्ष प्राप्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएँ आएँ, संयम, धैर्य और अपने मूल्यों के साथ मार्ग पर बढ़ते रहना ही सफलता की कुंजी है।

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वीणा धारण किए श्वेत कमल पर विराजमान माँ सरस्वती का दिव्य और शांत स्वरूप।

सरस्वती वंदना

हे स्वामिनी, ज्ञानदायिनी, भक्ति-प्रकाश उर में भर दे। माँ सरस्वती से ज्ञान, विवेक, संयम और शुद्ध लेखनी का वरदान माँगती यह सुंदर वंदना मन को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है।

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जब काली बिल्ली ने मेरा मन पढ़ लिया

“यह कहानी एक अकेले रहने वाले व्यक्ति और एक रहस्यमयी काली बिल्ली के बीच बनते एक अनोखे, गहरे और आत्मीय रिश्ते की है। कुछ दिनों का यह साथ न सिर्फ उसकी बिल्ली पालने की इच्छा पूरी करता है, बल्कि यह एहसास भी देता है कि कभी-कभी जानवर हमारे मन की बात हमसे पहले जान लेते हैं।”

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रीता मिश्रा तिवारी परिचय

रीता मिश्रा तिवारी : शब्दों की साधिका

रीता मिश्रा तिवारी हिंदी साहित्य की सशक्त रचनाकार हैं, जिन्होंने कविता, कहानी और लघुकथा के माध्यम से समाज को नई संवेदना और चेतना दी है।

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“दीपक और फूलों के साथ शांत वातावरण में की जा रही पूजा, आस्था और भक्ति का प्रतीक”

आस्था एवं पूजा

आस्था और पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा का ईश्वर से जुड़ने का माध्यम है। जब भक्ति सच्चे मन और निष्कपट भाव से की जाती है, तभी वह ईश्वर तक पहुँचती है। “आस्था एवं पूजा” कविता इसी सत्य को सरल और प्रभावशाली शब्दों में व्यक्त करती है।

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BMW और MINI लग्जरी कारों की कीमत बढ़ोतरी से जुड़ी प्रतिनिधिक तस्वीर

1 अप्रैल से महंगी होंगी BMW और MINI कारें, कीमतों में 2% तक बढ़ोतरी

BMW Group India 1 अप्रैल 2026 से अपनी कारों की कीमतों में 2% तक बढ़ोतरी करेगा. यह फैसला बढ़ती लागत और रुपये के अवमूल्यन के कारण लिया गया है.

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तिनके

छिन चुकी थीं एक छत, जो बँटवारे की भेंट चढ़ गई थी और मजबूरी में बेचनी पड़ी थी।
वैसे तो सविता को ज़मीन-जायदाद से कोई मोह नहीं था, लेकिन एक रहने को घर तो चाहिए ही था — जो अपना होता। पर जमीनी लालची अपनों ने ही उसका घर छीन लिया था। कानूनी दांव-पेंच में सविता को अपनी पतंग काटने में बरसों लग गए।
जीवन बिखरे तिनकों को समेटने में बीत रहा था। ख्वाहिशों की आग भी अब मध्यम हो चुकी थी।

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बूँदों की पदचाप…

मैं ध्यानमग्न होकर आज वर्षा की बूँदों की पदचाप सुन रही हूँ। ये बूँदें जैसे कोई देववधू बनकर घूँघट काढ़े आई हों और धरती से मधुर आलिंगन कर उसका संताप हर रही हों। मिट्टी में मिलकर अंकुरित होने लगीं, मानो जीवन की नई कोंपलें फूटने लगी हों। पूरी प्रकृति जैसे किसी रचनात्मक क्रीड़ा में सम्मिलित हो गई हो। इन बूँदों ने तन-मन को धोकर शुद्ध कर दिया, और भीतर की Maya को खोज निकाला। प्रत्येक बूँद अब एक मोती बन गई है, जिसे मन सहेज रहा है, मानो किसी गूढ़ तत्व से मिलने का जाप हो रहा हो।

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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के दौरान शिप्रा नदी के घाटों का निरीक्षण करते साधु-संत और अधिकारी 📝 Social Media Caption

सिंहस्थ-2028 की तैयारी पर संतों की मुहर

प्रशासन की रफ्तार पर जताया भरोसा उज्जैन. सिंहस्थ 2028 की तैयारियों का जायजा लेने पहुंचे साधु-संतों ने प्रशासन के कामकाज पर संतोष जताया और घाट निर्माण की तेज गति की सराहना की. हालांकि इस निरीक्षण के दौरान शैव अखाड़ों के संतों की अनुपस्थिति ने नई चर्चा को जन्म दिया. गुरुवार को वैष्णव अखाड़ों से जुड़े…

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बे-इख़्तियार मोहब्बत

मोहब्बत अजीब है…जिन्हें हमारी कद्र नहीं, हम वहीं अपनी रूह रख आते हैं।हम उनके लिए हर लम्हा ख़यालों में सुलगते रहते हैं,और वो हमारी बे-ख़ुदी की ख़बर तक नहीं लेते। शिकायत भी नहीं कर सकते…क्योंकि इश्क़ में इख़्तियार हमारा होता ही कहाँ है।

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