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मेगावॉट बिजली आपूर्ति की तैयारी, उज्जैन में मेगा प्लान

सिंहस्थ के लिए बिजली की मेगा तैयारी

आगामी सिंहस्थ महापर्व को लेकर ऊर्जा विभाग ने निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशानुसार, मेला क्षेत्र में अनुमानित 230 मेगावॉट बिजली की मांग को पूरा करने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा विकसित किया जाएगा।

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राजस्थान में मौसम बदला, अलवर-सीकर में कोहरा

राजस्थान में मौसम ने फिर करवट ली है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस खत्म होने के साथ ही उत्तर-पश्चिमी हवाओं का असर शुरू हो गया है। मंगलवार की रात के न्यूनतम तापमान में गिरावट के कारण ठंड और तेज हो गई। सीकर में मंगलवार को रिकॉर्ड 2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

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एक दुआ

यह कविता एक माँ के निःस्वार्थ प्रेम और आशीर्वाद की अभिव्यक्ति है, जहाँ वह अपने सुख और उम्र तक को त्याग कर संतान के लिए उज्ज्वल, सुरक्षित और छायादार जीवन की कामना करती है।

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विरासत पत्रिका लोकार्पण

मुंबई में ‘विरासत’ पत्रिका और पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का भव्य लोकार्पण

मुंबई के अंधेरी स्थित भवन्स कल्चरल सेंटर में आयोजित भव्य साहित्यिक समारोह में श्री बीरेंद्र शाह फाउंडेशन की प्रतिष्ठित त्रैमासिक पत्रिका ‘विरासत’ के सातवें विशेषांक ‘रामायण की अवांतर कथाएँ’ तथा सुप्रसिद्ध लेखिका एवं प्रधान संपादक रागिनी बीरेंद्र शाह की नई पुस्तक ‘शब्द पुंज’ का लोकार्पण किया गया। देशभर से आए साहित्यकारों, विद्वानों और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और भारतीय परंपरा पर प्रेरक विचार प्रस्तुत किए गए।

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विदाई गीत

आज विदाई का वह क्षण है, और मैं यहाँ अकेला खड़ा हूँ, यह सोचते हुए कि क्या कहूँ और शब्दों का सही चयन कैसे करूँ। मेरी आँखें भर आती हैं जब मैं अपने विद्यालय में पहले दिन की यादों को याद करता हूँ—वो उत्साह, वो नर्वसनेस, और दोस्तों के साथ की छोटी-छोटी शरारतें, जैसे क्लास में बंक मारना या किसी का टिफ़िन चुपके से ले जाना। वे निश्चिन्त, हँसी-खुशी भरे पल, दोस्तों के साथ की मस्ती, टीचरों को चिढ़ाना, खेल के मैदान और प्रार्थना की ध्वनि—ये सभी यादें हमेशा मेरे दिल में रहेंगी।

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जब आता था कलाई करने वाला: पीतल के बर्तनों की यादें”

महिदपुर रोड की गलियों में, कलाई करने वाला अपनी भट्टी और चमकीले पीतल के बर्तनों के साथ आता था। तपेली, डेकची और लोटे—हर बर्तन उसकी कला की छाप लिए होते थे। बच्चों की जिज्ञासा, धुएँ की हल्की गंध और भट्टी की आंच—सब कुछ बचपन की यादों में अमिट छाप छोड़ गया। यह केवल बर्तनों की कहानी नहीं, बल्कि उस समय की जीवनशैली, रिश्तों और परंपरा की सजीव झलक है।

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अहंकार में डूबा व्यक्ति, चारों ओर धूल और धुंध, पीछे जलती हुई बगिया और प्रतीकात्मक अराजकता

आत्ममुग्धता

धूल जब गगन को छूती है, तब भी एक कंकर अपनी ही धुन में डूबा रहता है यही आत्ममुग्धता है। इस दुनिया में कई लोग अपने अहंकार के कहकहे लगाते हैं, बिना यह देखे कि उनकी ही कारगुजारियाँ उनके आसपास के चमन को जला रही हैं। वे उस बगिया को बारूद बना देते हैं, जिसे प्रेम और बलिदान से सींचा गया था यही हमारी सामाजिक विडंबना है।

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तुम कितना बदल गए हो

“मैं तो आज भी वैसी ही हूँ, वही यादों और स्नेह में जीती हुई। बदल गए तो सिर्फ तुम—वो नज़रें, वो बातें, वो अपनापन सब पीछे छूट गया। अगर अब मैं बदल भी गई हूँ, तो सवाल मुझसे नहीं, खुद से करना।”

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Passengers inside Mumbai Metro Aqua Line 3 underground station checking mobile phones showing no network connectivity.

जमीन के नीचे दौड़ रही ट्रेन, लेकिन ‘डिजिटल अंधेरे’ में

मुंबई की महत्वाकांक्षी अंडरग्राउंड मेट्रो एक्वा लाइन3 को शुरू हुए तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब भी यात्री एक बुनियादी सुविधा से वंचित हैंमोबाइल नेटवर्क. वर्ली से कोलाबा के बीच कई स्टेशन और सुरंगें ऐसी हैं, जहाँ ट्रेन तो निर्बाध दौड़ती है, लेकिन मोबाइल पूरी तरह नो नेटवर्क हो जाता…

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क्या मैं सही हूँ?

कभी-कभी मन स्वयं से प्रश्न करता है—क्या मैं सही हूँ? मेरे विचार, मेरे निर्णय और मेरे कदमों की दिशा क्या वास्तव में उस सत्य की ओर जा रहे हैं, जिसे मेरी अंतरात्मा पहचानती है? सही और गलत का पैमाना हमेशा दुनिया की नजरों से नहीं तय होता। लोग कभी सराहना करेंगे, तो कभी आलोचना भी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मेरी आत्मा भीतर से शांत है, क्या मेरी अंतरात्मा मुझे स्वीकार करती है। यदि उत्तर “हाँ” है, तो वही मेरा सही होना है, क्योंकि अंततः सही और गलत का असली निर्णय बाहर से नहीं, भीतर से आता है।

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