
खुशी झा, लेखिका, मुंबई
मन से जो समर्पित पुष्प हो,
वही पूजा स्वीकार होता है।
करते तो लाखों लोग भक्ति,
सच्ची भक्ति निर्विकार होता है।
हर त्यौहार खुशियों का रंग,
हर घर में इकट्ठा परिवार होता है।
मन से जो समर्पित पुष्प हो,
वही पूजा स्वीकार होता है।
नेह की बाती, आस्था का तेल,
भाव भरा फूलों का हार होता है।
हो जो सच्ची भक्ति हर भक्त की,
वही पूजा ही स्वीकार होता है।
हर त्यौहार उत्साह का श्रृंगार,
मन की पूजा में शांति अपार।
नौ रूप देवी, हर रूप ब्रह्म-सा,
सच्ची श्रद्धा से मिटें सब विकार।
ना छप्पन भोग, न भव्य दिखावा,
हृदय की वाणी में हो बस आस्था।
चलती है प्रकृति, ईश्वर का वास
पूजा और भक्ति में मन का विश्वास।
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