Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

ख्वाहिशें

छत पर खड़ी आत्मविश्वासी भारतीय महिला” छत पर खड़ी आत्मविश्वासी भारतीय महिला”

गुरप्रीत कौर, प्रसिद्ध लेखिका, बठिंडा

मैं अपनी ख्वाहिशों को नहीं मारूँगी,
मैं जियूँगी ऐसे, जैसे मैं जीना चाहती हूँ।

किसी की हुकूमत तले
खुद ही अपने सपनों की अर्थी नहीं सजाऊँगी।

किसी की रोक-टोक से
अपनी बेबसी, लाचारी नहीं दिखलाऊँगी।
मैं हर लड़की को बेबाकी के किस्से सुनाऊँगी,
किसी से न डरना, न दबना — यही सिखाऊँगी।

मैं पवन की तरह बहूँगी,
कभी न थमूँगी।
मैं घूँघट की आड़ में
अपनी बेबसी नहीं कहूँगी।

मैं मुस्कुराऊँगी, खिलखिलाऊँगी,
अपने इर्द-गिर्द सकारात्मकता फैलाऊँगी।
मैं पतझड़ की तरह नहीं,
सावन बनकर अपने जीवन में हरियाली लाऊँगी।

ये रचनाएं भी पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें-
घट-घट में बसे हैं राम
मैं अल्हड़-सी लड़की
श्रीराम भक्ति कविता
जीने के लिये