
अर्चना वर्मा सिंह, प्रसिद्ध लेखिका, मुंबई
राम घट-घट में बसे है, व्योम जल थल राम है
राम के ही जाप से हिय, को मिले आराम है।
शांति सुख आनंद सब कुछ, राम में ही है रमा
द्वेष मन से साफ कर दो, बस हृदय में हो क्षमा।
राम घट-घट में बसे है, व्योम जल थल राम है
राम के ही जाप से हिय, को मिले आराम है।
पार भवसागर करा दो, देह से उद्धार दो
मोह माया के भॅंवर से, हे प्रभो ! अब तार दो।
श्वास की डोरी सभी की, है तुम्हारे हाथ में
हो सफल जीवन तभी ये, जब प्रभो हो साथ में।
श्री चरण की रज मिले जो, धन्य जीवन सार हो
त्याग मर्यादा यही बस, सृष्टि का आधार हो।
बाण तरकश से चले जब, न्याय ही बस न्याय हो
मन वचन अरु कर्म में बस, सत्य का अध्याय हो।
राम घट-घट में बसे है, व्योम जल थल राम है
राम के ही जाप से हिय, को मिले आराम है।
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