भगवान राम का शांत और दिव्य रूप, धनुष-बाण के साथ, चारों ओर प्रकाशमय आभा और आध्यात्मिक वातावरण

घट-घट में बसे हैं राम

हर कण में, हर श्वास में, हर भाव में राम का वास है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि सच्ची शांति बाहर नहीं, बल्कि अपने ही हृदय में बसे राम के स्मरण में है।

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