टूटता तारा

रात के अंधेरे में आसमान से टूटता तारा और खिड़की के पास खड़ी उदास लड़की

विजया डालमिया, प्रसिद्ध लेखिका, हैदराबाद

रात के सन्नाटे में दूर कहीं बादल जोर से गरजे और श्रावणी की आँखें घबराहट में खुल गईं। खिड़कियों की आवाज उसे सन्नाटे में बादलों की गर्जना सी ही लग रही थी। वह उठकर खिड़की बंद करने लगी, तभी फिर जोर से बिजली चमकी और एक तारा टूटता हुआ नजर आया।

…टूटता तारा देखकर कुछ मांगो तो वह इच्छा पूरी होती है… यह उसने हमेशा सुना था।
“चलो, आज मांगकर देखते हैं…” सोचकर वह मन ही मन कहने लगी
“मेरा जो साथी मुझसे दूर कहीं बैठा है, वह सलामत रहे।”

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और बस, उसकी आँखों से बेवजह आँसू बहने लगे।

उसका साथी जो सिर्फ खयालों में ही उससे मिल सकता था। रूबरू मिलने का मौका किस्मत ने बहुत कम दिया, किंतु उसके जैसा साथी दिया यह बहुत बड़ी बात थी। लाखों में एक… सबसे जुदा, सबसे अलग… किंतु कितना तन्हा! भीड़ में भी अकेला।

दुनियादारी से दूर, खुद में सिमटा हुआ, निस्वार्थ भाव से दूसरों की मदद करने को हमेशा तत्पर। जब वह गाँव गई थी और बीमार पड़ी, तब उसने उसका सेवा-भाव देखा था। कितना ध्यान रखा था उसने उसका—दिन-रात एक कर दिया।

वही भोलापन और सादगी ही तो भा गई थी उसे। इसीलिए वह उसे गाँव से अपने साथ शहर लाना चाहती थी। पर खुशबू कैद होकर नहीं रह सकती… वह भी नहीं रह सका।

उसके लाख रोकने के बावजूद वह चला गया। जाते वक्त जब उसने उसे कुछ देना चाहा, तो उसने लेने से साफ इनकार कर दिया। तब उसने अपनी ओढ़ी हुई लोई उसके कंधे पर डाल दी और कहा—
“यह मेरा प्रेम है, जो हमेशा तुमसे लिपटा रहेगा… इसके लिए प्लीज इंकार मत करना।”

उसने कुछ नहीं कहा।

धीरे-धीरे वह उसकी धड़कन बन गया साँसों की रवानी और दिल की कहानी में हर पल एक ही नाम। अपनी सारी सुख-सुविधाएं उसे काटने दौड़तीं, जब-जब वह उसकी तन्हाई और बेबसी के बारे में सोचती।

आज पूरा एक साल होने को आया। ऐसी ही कड़कती ठंड में तो वह आया था…

श्रावणी यह सब सोच ही रही थी कि अचानक मोबाइल बज उठा। उसने घड़ी देखी—सुबह के 5:00 बज रहे थे। इतनी सुबह-सुबह किसका फोन…?

स्क्रीन पर “अननोन नंबर” लिखा था।

“हैलो…”

उधर से आवाज आई
“एक साहब इहाँ रात आए रहे। उन्हीं का सामान में एक ठो कार्ड मिला रहा। उसी नंबर देखकर आप का फोन किए हैं। बीबीजी… ई जोनो भी थे, अब नहीं रहे। आप उकर कौन बोल रही?”

श्रावणी संज्ञाशून्य सी रह गई।

सोचने लगी-
टूटा तारा… जो खुद टूटा हुआ है, वह किसी की मन्नत क्या पूरी करेगा…?

5 thoughts on “टूटता तारा

  1. ओह
    बेहद मार्मिक कहानी 😌

  2. टूटता तारा…संवेदनशील रचना,अंतिम पंक्ति बेहद मार्मिक ।प्रेम का हर रूप मोहक होता है चाहे वो संयोग हो या वियोग ।

  3. आह से वाह तक ! हृदयस्पर्शी कहानी।
    शुभकामनाएं मार्मिक लेखन के लिये।

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