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प्रभु जी में विलक्षण संगठन क्षमता थी

डॉ प्रभु चौधरी की श्रद्धांजलि छवि, दीपक और शांत पृष्ठभूमि के साथ डॉ. प्रभु चौधरी महिदपुर रोड में डॉ.हरीशकुमारसिंह और अन्य मित्रों साथ यह अद्भुत सम्मेलन हमारे पर मित्र अजीर्जुरहमान के प्रयासों से संभव हो सका था

स्मृति शेष – डॉ. प्रभु चौधरी संयोजक राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना

डॉ. हरीशकुमार सिंह, प्रसिद्ध लेखक, उज्जैन

शिक्षकों की राष्ट्रीय संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के माध्यम से पूरे देश के शिक्षाविदों को जोड़कर उन्हें सम्मानित करने तथा विभिन्न संगोष्ठियों के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति समर्पित भाव से कार्य करने वाले, राज्यपाल सम्मान से अलंकृत शिक्षक डॉ. प्रभु चौधरी का आकस्मिक देवलोकगमन 16 मार्च 2026 को हो गया।

प्रभु जी प्रयागराज में राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना का भव्य आयोजन सम्पन्न कर उज्जैन लौट रहे थे कि रास्ते में ही हृदयाघात से उनकी सांसें थम गईं। उनके पैतृक निवास कसारी में उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रभु चौधरी और मैंने महिदपुर रोड के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से साथ ही हायर सेकेंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। बाद में मैं उज्जैन आ गया और प्रभु शासकीय सेवा में शिक्षक हो गए। वे लगभग दो वर्ष पूर्व ही सेवानिवृत्त हुए थे और तब से तन, मन और धन से राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के कार्यों को आगे बढ़ाने में निरंतर लगे हुए थे।
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सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलानुशासक आदरणीय डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा तथा शिक्षाविद प्रो. बी. के. शर्मा के मार्गदर्शन में, राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के माध्यम से वे देशभर में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों का संचालन कर साथी शिक्षकों की सेवा में समर्पित रहते थे।हिंदी भाषा के उत्थान और उसे राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से उन्होंने संस्थागत रूप में हिंदी भाषियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु वे समाचार पत्र-पत्रिकाओं के प्रकाशन का दायित्व भी निभाते रहे। हाल ही में लोकमाता अहिल्यादेवी जी की 300वीं जयंती के अवसर पर उनके जीवन और जनहितकारी कार्यों पर आधारित पुस्तक ‘कर्मयोगिनी’ का प्रभु जी के संपादन में प्रकाशन तथा मई 2025 में प्रेस क्लब में उसका भव्य लोकार्पण एक अविस्मरणीय स्मृति बन गया।

दिसंबर 2025 में उज्जैन में अटल महामना सम्मान का भव्य आयोजन और देश के प्रतिष्ठित साहित्यकारों की सहभागिता प्रभु जी की उत्कृष्ट संगठनात्मक क्षमता का परिचायक है। उज्जैन, पुणे, भोपाल और प्रयागराज जैसे शहरों में वे वर्षभर निरंतर आयोजन करते रहते थे।नागरी लिपि परिषद से भी प्रभु जी जुड़े रहे। हिंदी भाषा एवं साहित्यिक विषयों पर 300 से अधिक ऑनलाइन संगोष्ठियों का आयोजन कर उन्होंने एक उल्लेखनीय रिकॉर्ड स्थापित किया।

ऐसे कर्मठ, समर्पित और प्रेरणास्पद व्यक्तित्व को सादर नमन।

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