चाय की ख़ुशबू और यादों की परतें

चाय की ख़ुशबू और
यादों की परतें,
जो वक़्त के साथ-साथ
खुलती चली जाती हैं।

जैसे-जैसे इंसान
अपनी ज़िम्मेदारियों से आज़ाद
होता है,
वैसे-वैसे यादों की
कड़ियाँ भी उसे मसरूफ़
करती चली जाती हैं।

ज़िंदगी में क्या खोया?
क्या पाया?
क्या मिला?
क्या गँवाया?
सब याद आता है…

दिल बेचैन हो उठता है कि,
जो चाहता था दिल पाना,
काश! वो मिल जाता,
या एक बार और ज़िंदगी
मौका देती तो सबसे पहले
वही चीज़ हम हासिल करते,
जो आज बहुत याद आती है।

शाइना परवीन, प्रसिद्ध लेखिका मुजफ्फरपुर

One thought on “चाय की ख़ुशबू और यादों की परतें

  1. चाय की चुस्की और यादों का सफर … एक खुबसूरत अहसास.. अति सुन्दर

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