Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

तीज का त्यौहार

सावन की रिमझिम फुहारों और काली घटाओं के बीच जब मोर नाचने लगते हैं, तो प्रकृति का हर रंग और स्वर एक अलग ही उमंग लेकर आता है। ऐसे ही मौसम में तीज का पर्व गाँव-गिरांव से लेकर शहरों तक उल्लास फैलाता है। बिटिया की ससुराल कोथली लेकर जाते पिता, माँ-बाबा का स्नेह, पीहर आई बेटियाँ, बचपन की सखियों से मिलन — सब मिलकर सावन को खास बना देते हैं। झूले की पींगे, हँसी की चहक, कजरी की हूक और विरह की टीस — हर भाव इस मौसम में शामिल होता है। धानी चूनर ओढ़े धरती, आमों से लदी अमराई, घेवर की मिठास और मेलों की रौनक मिलकर सावन और तीज के इस त्योहार को यादगार बना देती है।

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•••साहित्य अकादमी की चारों पीठ पर निदेशक नियुक्त

साहित्य अकादमी मध्यप्रदेश के अंतर्गत चार सृजन पीठ कार्यरत रहती हैं। इन चारों पीठ पर निदेशकों की नियुक्ति करते हुए प्रेमचंद सृजन पीठ पर उज्जैन के ही लेखक-व्यंगयकार मुकेश जोशी को निदेशक मनोनीत किया है। इस पद पर पिछले चार साल से अनीता पंवार पदस्थ रहीं लेकिन इन चार सालों में लगा ही नहीं कि इस पीठ की साहित्यिक गतिविधियों से कोई ताल्लुक भी है।

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मन 

यह कविता रिश्तों में पसरी हुई खामोशी और मन की गहराइयों में उपजी पीड़ा का चित्रण करती है। कवि कहता है कि यह खामोशी, मन को एक निर्जल और सूने कुएँ में धकेल देती है, जहाँ आकुलता और विकलता का साया छा जाता है। वहाँ न कोई चाहत होती है, न उम्मीद—नव अंकुर फूटने की संभावना भी नहीं।मन के किसी कोने में आशाएँ और अभिलाषाएँ सुंदर यादों की पोटली बनकर धरी रह जाती हैं। हर अहसास धीरे-धीरे पिघलकर पतझड़ के मौसम में बदल जाता है, और अंततः यह मन एक बांझ धरा की तरह फट पड़ता है।

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फ्रेंडशिप डे पर स्वर्गीय फकीरचंद कसेरा को समर्पित भावुक संस्मरण. सच्ची मित्रता, अपनापन, यादें और जीवनभर साथ रहने वाले रिश्ते की मार्मिक कहानी.

दोस्त, तुम आज भी यादों में ज़िंदा हो…

फ्रेंडशिप डे के अवसर पर स्वर्गीय फकीरचंद कसेरा को समर्पित यह भावपूर्ण संस्मरण सच्ची मित्रता, विश्वास, अपनापन और जीवनभर साथ रहने वाली यादों का मार्मिक चित्रण है. सामाजिक जीवन में उनके योगदान, सरल व्यक्तित्व और मित्रता के अनमोल रिश्ते को शब्दों के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की गई है.

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मेहनत और सफलता

मेहनत ही सफलता की सच्ची कुंजी है। चाहे चींटी का निरंतर प्रयास हो या कुम्हार, किसान, मजदूर और माता-पिता का श्रम हर जगह यही सच सामने आता है कि लगन और परिश्रम से ही जीवन को आकार मिलता है। जो लक्ष्य पर टिके रहते हैं, वही अंततः सफल होते हैं।

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सांझ के समय चौराहे पर खड़ा एक व्यक्ति, जीवन के फैसलों और अस्तित्व पर विचार करता हुआ, भावनात्मक और यथार्थवादी दृश्य

एक जिंदगी, हजार सवाल

जिंदगी एक ऐसा अनुभव है जो कभी भ्रम बनकर सामने आती है, तो कभी ख्वाब की तरह आंखों में उतर जाती है. यह हँसी और आँसू के बीच झूलती हुई एक अनकही बेचैनी है, जिसे इंसान जीवन भर सुलझाने की कोशिश करता रहता है. कभी अधूरी रह जाती है, तो कभी मुकम्मल होकर भी सवाल छोड़ जाती है.

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अक्षय तृतीया पर सेवा का अनोखा उदाहरण

अक्षय तृतीया पर सेवा, संस्कार और उत्सव का संगम

कांठेड़ परिवार ने अक्षय तृतीया पर गौशाला में सेवा कर जन्मदिन और व्यवसाय की वर्षगांठ को खास अंदाज में मनाकर समाज को प्रेरणादायक संदेश दिया।

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सूरज की पहली किरण

रेणु परसरामपुरिया, लेखिका, मुंबई आधी रात को फोन की घंटी बजी। आवाज़ से विमल की आंख खुली। गहरी नींद सोए हुए तो एक जमाना बीत गया था। एक घंटी बजते ही आंख खुल गई। — “हेलो… हां… अच्छा…” बस इससे ज्यादा विमल कुछ कह ही नहीं पाए। फटाफट चश्मा लगाया और बगल के कमरे में…

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जिंदगी भर नहीं भूलेगी मेट्रो की वो रात…

एक भागती-दौड़ती मुंबई की रात में, मैं मेट्रो के सफर पर थी, अपने बैग और गिफ्ट बॉक्स के साथ, साड़ी में शाही अंदाज़ लिए। एक अजनबी सज्जन ने बिना किसी शब्द के मेरी मदद की, मेरा सामान लौटाया और बाद में टिकट लेने में भी सहायता की। हमारी अनौपचारिक बातचीत, मुस्कानें और छोटे-छोटे इशारे उस रात को यादगार बना गए। सफर के बीच हमारी बातचीत इतनी सहज और हल्की थी कि समय का पता ही नहीं चला। उनके व्यवहार में न तो अश्लीलता थी, न कोई लालसा सिर्फ मित्रवतता और आदर।

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