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खिड़की के पास कॉफी के साथ चुप्पे प्रेम को महसूस करती महिला

चुप्पा प्रेम

कुछ प्रेम साथ रहने की ज़िद नहीं करते, अधिकार नहीं जताते और बार-बार अपने होने का एहसास भी नहीं कराते. वे बस आपकी छोटी-छोटी बातें याद रखते हैं. विक्रांत का प्रेम भी कुछ ऐसा ही था—खामोश, बिना दिखावे का और बेहद अपना.

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पापा, मुझे विदा कर दो…

कविता में एक अनजानी और अबोध आत्मा की पुकार है, जो जन्म लेने से पहले ही अपने जीवन की चुनौतियों और समाज में बढ़ती खतरे की भविष्यवाणी करती है। यह भावनात्मक रचना बताती है कि कैसे एक बच्चा, अपनी मासूमियत में, पहले से ही सुरक्षा और संरक्षण की लालसा रखता है, और कैसे वह अपनी सुरक्षा के लिए माता-पिता से प्रार्थना करता है कि उसे जन्म से पहले ही सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। यह कविता सामाजिक चेतना और संवेदनशीलता को उजागर करती है।

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भारतीय शहर की सड़क पर एक डिलीवरी राइडर हेलमेट पहने मोटरसाइकिल रोककर खड़ा है, चेहरे पर थकान और राहत का भाव, पीछे ट्रैफिक और सिग्नल दिखाई दे रहे हैं, यह दृश्य सुरक्षित डिलीवरी और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स का प्रतीक है।

10 मिनट की दौड़ खत्म: क्विक कॉमर्स में सुरक्षा की जीत

‘10 मिनट डिलीवरी’ की दौड़ पर विराम लगना सिर्फ विज्ञापन बदलाव नहीं, बल्कि राइडर्स की सुरक्षा और जिम्मेदार क्विक कॉमर्स की दिशा में एक अहम और संवेदनशील कदम है।

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प्रेम की पराकाष्ठा

जाने कब मेरे अंदरपनप उठीं नई कोंपलों की भांतिअद्भुत, असीम, निष्कलुष, निर्विकार, निरुद्देश्य—- उस सूखे वृक्ष साजो निष्प्राण खड़ा थामेरे समक्ष,मैंने उसे सींचने की नाकाम कोशिश कीपरंतु, असफल रही…वह यूं ही बुत सा खड़ा रहा,अपनी टहनियों में उसनेएक पत्ता भी न आने दिया।मैं परिणाम की अपेक्षा किए बगैर उसेसींचती रही औरवह ग्रास लेता रहा।मुझसे विमुख…

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Softly lit close-up of two Indian hands gently reaching toward each other without touching, expressing emotional connection, trust, and respectful intimacy in a calm, warm-toned setting.

स्पर्श : संवेदना का संगीत

कुछ स्पर्श शरीर को नहीं, मन को छूते हैं। वे न वासना जगाते हैं, न भय बस भीतर कहीं भरोसे की लौ जला देते हैं। मर्यादा में बंधे ऐसे स्पर्श रिश्तों को शब्दों से पहले समझा देते हैं और इंसान को इंसान होने का एहसास कराते हैं।

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अमन की जोत फिर जलाना है

यह जीवन बस एक बहाना है — सांसों का आना-जाना, रिश्तों का मतलब और फर्ज़ निभाने की रस्में। अमीरों की थालियाँ भरी हैं, मगर गरीब का निवाला उनसे छिन गया है। मुफ़लिसी की बातें अब किससे कही जाएं, जब ज़माना इतना बेरहम हो गया है।

आईने अब चेहरों को नहीं, दिलों को पढ़ने लगे हैं — नया चेहरा, मगर दिल वही पुराना। विज्ञान के इस दौर में इंसान चाँद पर घर बसाने की सोच रहा है, जबकि ज़मीन पर जंगल सूने और परिंदे बेघर हो गए हैं।

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जीवन जंग नहीं

यह कविता जीवन को केवल संघर्ष और काँटों से भरा हुआ मानने की मानसिकता को तोड़ती है। कवि कहता है कि जीवन सिर्फ कठिनाइयों और कटु अनुभवों का नाम नहीं है, बल्कि इसमें फूलों जैसी सुंदरता, मधुरता और उमंगें भी समाई हुई हैं।
जीवन की राह में यदि कोई विचलित होकर बीच में ही रुक जाए तो वह अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच सकता। पराजय के डर से भागने वाला कभी विजयी नहीं कहलाता। अंधकार से भयभीत होकर रुकने वाला व्यक्ति प्रकाश की ओर कदम नहीं बढ़ा सकता। दूरी से हताश होने वाला कभी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाता।

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गहना

यदि तुम्हें गहना पहनना है तो बेशक पहनो, लेकिन उस नगीने को मत खोना, जिसकी पहचान समय ने तुम्हें बड़ी मुश्किल से कराई है। अब कुदालों की बाट देखना बंद करो और अपनी सुइयाँ उठाओ—वे सुइयाँ जिन्हें जन्म लेते ही तुम्हारे हाथों में थमाया गया था। जब प्यास बढ़े, तो इधर-उधर ताकना मत, बल्कि अपनी तुरपाई वाली सुइयाँ पैनी करो। उसी से निर्मल जल का स्रोत मिलेगा, कुआँ खुदो और अपनी प्यास बुझाओ। इतना करने के बाद भी जीत का जश्न मनाना मना है। जीत की सांसों में हार को भी पहचानो, जो तुम्हें सबसे भावुक पलों में पटखनी देती आई है। इस बीच, ओढ़ लो अपना आत्मविश्वास और अपने सबसे थके हुए दिन को अमर बना दो। जीवन का अभियान सालों में नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन में छिपा है। यही सोचकर जीवन की धूप मांग लो और उसे अपने लिए माँगटीका बना दो। सबसे जरूरी है कि तुम अपने लिए हमेशा सुहागिन बने रहो।

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नीला आसमां

यह कविता एक शांत और भावपूर्ण नीले आसमां के माध्यम से मन की भावनाओं को व्यक्त करती है। मन पर लगे गहरे दाग और संताप, जैसे आसमां का नीला स्वरूप, आँखों के कोरों पर ढलते आँसुओं के साथ मिलकर भावनाओं को उजागर करता है। बिन मौसम की बारिश की तरह मन और आसमां दोनों के धुल जाने से अंततः शांति और स्वच्छता की अनुभूति होती है। यह कविता आंतरिक संताप और उसके समाधान की संवेदनशील यात्रा को दर्शाती है।

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क्या-क्या है हिंदी

कविता हिंदी भाषा की विविधता, सांस्कृतिक महत्व और इसकी भावनात्मक गहराई को उजागर करती है। यह बताती है कि हिंदी केवल एक भाषा नहीं है, बल्कि यह संबंधों, संस्कारों, व्यक्तित्व, वीरता, साधना और भक्ति का प्रतीक है। मां की गोद से लेकर ऋषि-मुनियों की सभ्यता, संत-कवियों की शिक्षा और समाज के विविध अनुभव—हिंदी इन सबका माध्यम रही है। कविता में यह भी कहा गया है कि हिंदी ने विश्व मंच पर भी अपनी पहचान बनाई है और विभिन्न परिस्थितियों में लोगों के मनोभावों, संस्कारों और इतिहास को व्यक्त किया है।

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