अब टैक्स गलती पर जेल नहीं !

नए इनकम टैक्स कानून से खत्म होगा जेल का डर

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे

नई दिल्ली- अब इनकम टैक्स से जुड़ी गलतियों पर जेल जाने का डर बीते दिनों की बात हो जाएगी. केंद्र सरकार ने बजट के जरिए इनकम टैक्स कानून को अपराध की श्रेणी से बाहर निकालने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए इनकम टैक्स एक्ट के तहत अब अधिकांश मामलों में जेल की जगह केवल जुर्माने से ही मामला निपटाया जा सकेगा.सरकार का उद्देश्य टैक्स प्रणाली को सरल, मानवीय और मुकदमेबाजी से मुक्त बनाना है.
गलती और अपराध में फर्क करेगी सरकार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में स्पष्ट किया कि कई बार टैक्सपेयर्स से नियमों की जटिलता, तकनीकी चूक या जानकारी की कमी के कारण गलती हो जाती है. ऐसे मामलों में अब आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी.
छोटे मामलों में सिर्फ जुर्माना
गंभीर मामलों में अधिकतम सजा 2 साल और अदालत चाहे तो सजा को जुर्माने में बदल सकेगी.पहले गंभीर मामलों में यह सजा 7 साल तक हो सकती थी.
एनआरआई को बड़ी राहत, विदेशी संपत्ति पर क्लीन चिट का मौका
बजट में एनआरआई टैक्सपेयर्स के लिए भी बड़ी राहत दी गई है. विदेश में 20 लाख रुपये तक की गैर-अचल संपत्ति का खुलासा न करने पर अब कोई दंड या अभियोजन नहीं होगा.जिन ने विदेशी आय बताई लेकिन संपत्ति घोषित नहीं कर पाए.
सिर्फ 1 लाख रुपये शुल्क देकर पूरा मामला खत्म.जिन्होंने विदेशी आय या संपत्ति पूरी तरह नहीं बताई. 30% टैक्स + 30% अतिरिक्त टैक्स देकर जेल और कानूनी कार्रवाई से पूरी राहत.यह प्रावधान 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी माना जाएगा.
प्रॉपर्टी बेचने वाले एनआरआई को बड़ी सहूलियत
बजट में एनआरआई के लिए प्रॉपर्टी बिक्री प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है. अब प्रॉपर्टी बेचते समय टेन लेने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है. टीडीएस काटने और जमा करने की जिम्मेदारी भारतीय खरीदार की होगी. टीडीएस सीधे पेन आधारित चालान से जमा किया जाएगा.इससे एनआरआई को बड़ी प्रशासनिक राहत मिलेगी.
तकनीकी गलतियों पर अब अपराध नहीं
सरकार ने कई तकनीकी चूकों को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है. ऑडिट न करानाश् ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट न देना, लेखा बही या दस्तावेज न देना,अब इन मामलों में जेल या भारी जुर्माने की जगह मामूली शुल्क लिया जाएगा.
मुकदमेबाजी घटाने के लिए बड़े बदलाव

अपील के लिए जमा राशि 20% से घटाकर 10%,अपील अवधि में पेनल्टी पर ब्याज नहीं, टैक्स और दंड का निपटारा एक ही आदेश से पुनर्मूल्यांकन के बाद भी रिटर्न अपडेट करने का मौका,गलत जानकारी के मामलों में टैक्स और ब्याज के साथ 100% अतिरिक्त टैक्स जमा करने पर अभियोजन से राहत मिलेगी.

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