कैमरा चलता रहा, जिंदगी थम गई
बेंगलुरु के एक निजी स्टूडियो में मैटरनिटी फोटोशूट के दौरान तीन साल के मासूम की तालाब में डूबने से मौत हो गई. सात माह की गर्भवती मां शूट में व्यस्त थी, तभी खेलते-खेलते बच्चा परिसर के तालाब में गिर गया. यह दर्दनाक हादसा सार्वजनिक स्थानों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
माँ को भी सुनो कभी
माँ के प्रेम, त्याग और अनकही भावनाओं को व्यक्त करती यह भावपूर्ण कविता हमें याद दिलाती है कि माँ सिर्फ हमारी देखभाल करने वाली नहीं, बल्कि अपने सपनों और भावनाओं वाली एक संवेदनशील इंसान भी है।
स्क्रीन के उस पार भी बनते हैं मजबूत रिश्ते
आज के डिजिटल दौर में दोस्ती का मतलब सिर्फ आमने-सामने मिलना नहीं रह गया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे Instagram, Discord और WhatsApp ने रिश्तों की परिभाषा ही बदल दी है। खासकर COVID-19 lockdown के दौरान, लाखों लोगों ने ऑनलाइन दोस्त बनाए. ऐसे दोस्त जो कभी मिले नहीं, लेकिन दिल के बहुत करीब आ गए।
ब्लैकवुड वैली
ब्लैकवुड वैली भाग 2 में दोस्तों का सामना एक रहस्यमयी घर, अजीब आवाज़ों और खौफनाक परछाईं से होता है, जहां हर पल खतरा बढ़ता जाता है।
आधे गीत , अधूरा जीवन
यह कविता कृष्ण और राधा के अधूरे मिलन और आधे गीत की पीड़ा को व्यक्त करती है। कवि अपने मन में बंसी की तान सुनते हुए राधा जैसा जीवन जीने की चाहत व्यक्त करता है। अधूरी आकांक्षाएँ, जंजीरों को तोड़कर आज़ादी पाने की तड़प, और पुनर्जन्म में फिर से कृष्ण को देखने की प्रार्थना कविता के भावों को गहरा और मार्मिक बनाती है। यह कविता प्रेम, विरह और आधे जीवन की अधूरी तृप्ति को दर्शाती है।
सपनों पर चलती लाठियाँ
यह कविता उन विद्यार्थियों की पीड़ा और संघर्ष को स्वर देती है, जो सपनों और उम्मीदों का बोझ लेकर शिक्षा के मंदिरों तक पहुँचते हैं, लेकिन कई बार सम्मान के बजाय संदेह और कठोरता का सामना करते हैं। कविता शिक्षा व्यवस्था, अनुशासन और संवेदनशील संवाद के बीच संतुलन की आवश्यकता पर गहरा प्रश्न उठाती है।
नवरात्रि: भक्ति से शक्ति की यात्रा
“नवरात्रि केवल पर्व नहीं, बल्कि आत्मा की यात्रा है। यह हमें हमारे भीतर की सुप्त शक्ति को पहचानने, हर कठिनाई में छिपे वरदान को देखने और आत्मविश्वास से अंधकार को मिटाने की प्रेरणा देता है।”
मुक्ति की राह : ज्ञान, कर्म और परमधाम
आत्मा परमधाम की वासी है—पवित्र, दोषरहित। स्थूल लोक में कर्मों के प्रभाव से वह अपवित्र होती है, इसलिए स्वयं परमात्मा आकर ज्ञान के माध्यम से आत्मा को फिर से पावन बनाते हैं और उसे मुक्ति की ओर ले जाते हैं।
