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सिक्किम और अरुणाचल की हिमालयी झीलों का मूल्यांकन

नागालैंड विश्वविद्यालय की अगुवाई में सिक्किम और अरुणाचल की ऊँचाई वाली झीलों पर आधारित एक बहुवैज्ञानिक शोध परियोजना के तहत बर्फीली झीलों के फटने (GLOF) की संभावनाओं का गहराई से मूल्यांकन किया जा रहा है। बाथीमेट्रिक सर्वे, ड्रोन मैपिंग और 2D/3D फ्लड मॉडलिंग के ज़रिए इन झीलों की स्थिरता, पारिस्थितिकीय खतरे और जलवायु परिवर्तन से जुड़े प्रभावों का अध्ययन किया जाएगा।

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आईआईएम लखनऊ ने मनाया 41वां स्थापना दिवस

आईआईएम लखनऊ ने अपना 41वां स्थापना दिवस मनाते हुए शिक्षा, सेवा और सांस्कृतिक समावेशन का संदेश दिया। इस अवसर पर आईएएस नेहा प्रकाश ने बतौर मुख्य अतिथि नेतृत्व और सहानुभूति की भूमिका पर प्रकाश डाला। वृक्षारोपण, खेल स्पर्धाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पुरस्कार वितरण जैसी गतिविधियों से आयोजन को यादगार बनाया गया।

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वो घर मेरा

वो मेरा पुराना घर… जहां न बेफिक्री की कोई सीमा थी, न रिश्तों में कोई दीवार। सालों बाद लौटने पर जैसे समय थम गया। हर कोना, हर दीवार, और बंद पड़ी घड़ी मानो कुछ कहने को बेताब थी। वहां अब भी माँ की पुकार गूंजती है, पर उस चूल्हे की आग बुझ चुकी है। सब कुछ वहीं था, लेकिन जीवन का शोर-गुल, हँसी और मिल बैठने की वो आत्मीयता कहीं खो गई थी। आज सबके अपने कमरे हैं, लेकिन दिलों की दूरी बढ़ गई है। कविता एक भावुक पुकार है – लौट चलें उस पुराने आँगन की ओर, जहाँ त्योहार सिर्फ रस्म नहीं, रिश्तों का उत्सव होते थे।”

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70 की उम्र में सांप को गले लगाकर दिया का संदेश

एक 70 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने सांप को लेकर समाज में फैले डर और भ्रांतियों को तोड़ते हुए ऐसा साहसिक कदम उठाया कि पूरा इंटरनेट देखता रह गया। पुणे जिले के एक गांव की शकुंतला सुतार ने अपने घर में घुसे एक अजहरी (धामन) सांप को न सिर्फ बेधड़क उठाया, बल्कि उसे गले में डालकर लोगों को जागरूक करने का संदेश भी दिया।

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सर्टिफिकेट

सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!” — अनीता की ये बात एक सशक्त सामाजिक सवाल खड़ा करती है: क्या एक स्त्री की स्वतंत्रता और निर्णय का मापदंड सिर्फ विवाह होना चाहिए?

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खंडाला घाट में ब्रेक फेल ट्रेलर ने मचाई तबाही

मुंबई-पुणे एक्सप्रेस वे पर शनिवार दोपहर खंडाला घाट में एक भीषण हादसा हो गया। खोपोली एग्जिट से खालापुर टोल नाके तक के तीव्र ढलान पर एक ट्रेलर के ब्रेक फेल हो गए, जिससे वह लगभग चार किलोमीटर तक बेकाबू होकर 24 वाहनों से एक के बाद एक टकरा गया। इस दर्दनाक हादसे में एक महिला की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 21 लोग घायल हुए हैं, जिनमें दो की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। हादसे के कारण मुंबई की ओर जाने वाला यातायात दो घंटे तक पूरी तरह ठप रहा, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।

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सिस्टम, सिस्टमैटिकली बच निकला..

तो ख़बर ये है, मित्र… कि सिस्टम हमेशा की तरह सिस्टमैटिकली अपने बाल भी बाँका किए बिना फिर से बच निकला है, जैसे उसे संविधान की किसी फुटनोट में कोई स्पेशल छूट मिली हो.
एक बार फिर, एक स्कूल की छत ढह गई और हमेशा की तरह, मासूम बच्चे ढहती दीवारों के नीचे दब गए. कुछ घायल हुए, कुछ अनंत यात्रा पर निकल लिए…
आप कहेंगे, ऐसी तो और भी इमारतें ध्वस्त हुई हैं भूस्खलन हुआ, बाढ़ आई, करंट लगने से भी अच्छे-खासे जान और माल की हानि हुई फिर आप इस एक सरकारी इमारत के पीछे क्यों पड़े हैं?
बस इसीलिए कि ये सरकारी थी.
सरकार इधर खुद की जोड़-तोड़ में लगी है. एक बार फिर आपने उसे व्यस्त कर दिया ङ्गहमें दुःख हैफ की बजरी, ङ्गदोषियों को बख्शा नहीं जाएगाफ के सीमेंट और सरकारी ब्रांड के मगरमच्छी आँसुओं का पानी मिलाकर एक गाढ़ा लेपन तैयार हुआ है जिससे की जाएगी लीपापोती.

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तीज का त्यौहार

सावन की रिमझिम फुहारों और काली घटाओं के बीच जब मोर नाचने लगते हैं, तो प्रकृति का हर रंग और स्वर एक अलग ही उमंग लेकर आता है। ऐसे ही मौसम में तीज का पर्व गाँव-गिरांव से लेकर शहरों तक उल्लास फैलाता है। बिटिया की ससुराल कोथली लेकर जाते पिता, माँ-बाबा का स्नेह, पीहर आई बेटियाँ, बचपन की सखियों से मिलन — सब मिलकर सावन को खास बना देते हैं। झूले की पींगे, हँसी की चहक, कजरी की हूक और विरह की टीस — हर भाव इस मौसम में शामिल होता है। धानी चूनर ओढ़े धरती, आमों से लदी अमराई, घेवर की मिठास और मेलों की रौनक मिलकर सावन और तीज के इस त्योहार को यादगार बना देती है।

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बेंगलुरु में सावन मिलन महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद, आरटी नगर, बेंगलुरु की महिला शाखा द्वारा सावन मिलन महोत्सव अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बिहार भवन, बेंगलुरु में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अमिता झा जी ने अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ऊषा झा और डॉ. अर्चना झा एवं बिंदु सिंह जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सचिव डेज़ी शर्मा और अपर्णा शर्मा की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। समिति की कोषाध्यक्ष निधि शर्मा तथा सदस्य हीरा झा और शीला सिंह ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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हरियाली तीज : हरियाली, सौंदर्य और आस्था का पर्व

श्रावण मास की हरियाली और वर्षा ऋतु की ताजगी के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव भी है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, पारंपरिक श्रृंगार करती हैं, लोकगीतों की स्वर लहरियाँ बिखेरती हैं और झूले की लय में प्रकृति से जुड़ती हैं। इस दिन महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक आभूषणों से सजती हैं। हरे रंग को इस पर्व का विशेष रंग माना जाता है, जो हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जाकर लोकगीत गाती हैं, पारंपरिक नृत्य करती हैं और झूले झूलती हैं, जो सावन के इस त्योहार की एक विशिष्ट पहचान है।

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