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अहसासों के कतरन…

हम अपने आप में बस एक पानी की बूँद जैसे हैं। कभी मिट्टी पर गिरकर उसमें समा जाते हैं, तो कभी किसी पत्ते पर टिककर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। और जब लहरों से मिलते हैं, तो खुद सागर का रूप ले लेते हैं। हमारी पहचान इस पर नहीं है कि हम कौन हैं, बल्कि इस पर है कि हम किससे जुड़ते हैं।

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किस विध लूँ तेरी थाह

यह कविता एक गहरी, रहस्यपूर्ण और रूमानी अभिव्यक्ति है — प्रेम में डूबे एक हृदय की उस छटपटाहट और जिज्ञासा की, जो अपने प्रिय की भावनाओं, मौन संकेतों और अस्तित्व को पूरी तरह समझना चाहता है। शीर्ष पंक्ति “किस विध लूँ तेरी थाह प्रिय” पूरे काव्य का केंद्रीय भाव है — यह प्रश्न नहीं, एक आकुल जिज्ञासा है, एक समर्पण है।

कविता में प्रिय को एक ऐसी नदी के रूप में देखा गया है, जो सतह पर तो लहराती, मुस्कराती, बलखाती दिखती है, लेकिन भीतर कहीं गहराई में कई सदियों से प्यासेपन की पीड़ा को संजोए हुए है। वह प्रिय किसी दरिया से मिलन नहीं चाहता, फिर भी एक अनकहा प्रवाह है, जो उसे बहाए लिए जाता है — यही वह विरोधाभास है जिसे कवि समझना चाहता है।

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हौसले की लौ…

यह कविता आत्मबल, साहस और जीवन संघर्षों के बावजूद आगे बढ़ते रहने की एक सशक्त अभिव्यक्ति है। इसमें कवि अपने जीवन की यात्रा को एक पर्वतारोहण की तरह प्रस्तुत करता है, जहां रास्ता कठिन है, पर मंज़िल की चाह अडिग है।

प्रारंभिक पंक्तियाँ प्रेरणादायक हैं — आँधियों और तूफानों को भी मात देने वाले उस ‘हौसले के दिए’ की बात होती है, जो अंधेरे में भी मार्ग दिखाता है। इसके बाद कविता सपनों की उड़ान की बात करती है, और बताती है कि थकना, रुकना या पीछे हटना विकल्प नहीं है।

यह एक ऐसा जोश भरा गीत है, जो संघर्षों को गीतों में पिरोकर उन्हें प्रेरणा में बदल देता है। वक्त ने चाहे कितनी भी सख्ती दिखाई हो, लेकिन वक्त ही नई रोशनी भी लाएगा — इस उम्मीद को कवि ने ‘नूर’ और ‘दीप’ जैसे प्रतीकों से दर्शाया है।

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माँ जैसी नहीं हूं मैं…

यह कविता एक आत्मस्वीकृति है — एक बेटी की अपनी माँ के प्रति संवेदनाओं, निरीक्षणों और अनुभवों की गहराई से उपजी भावनाओं की अभिव्यक्ति। वह कहती है कि वह अपनी माँ की खामोशी पढ़ लिया करती थी, माँ के संघर्षों और त्याग की साक्षी रही है। माँ की आँखों में छिपे दर्द, जीवन की कठोर सच्चाइयों से संघर्ष, और अपनी इच्छाओं को निस्वार्थ भाव से दबा देने का दृश्य उसने बार-बार देखा।

वह माँ की हर वह चुप्पी पहचानती थी, जिसे दुनिया अनदेखा कर देती है। माँ के आँचल से आँसू पोछने से लेकर, चाँदनी रातों में अपने दुखों से बात करने तक की हर एक लम्हा, बेटी के मन में गहरे बैठ गया।

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अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों के स्तर की है शिवसृष्टि की भव्यता

प्रसिद्ध अभिनेता प्रवीण तरडे ने पुणे की शिवसृष्टि का दौरा करते हुए कहा कि इसकी भव्यता और जीवंतता अंतरराष्ट्रीय संग्रहालयों के स्तर की है। उन्होंने शिवसृष्टि को छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वराज्य, स्वधर्म और स्वभाषा का सजीव अनुभव बताते हुए सभी मराठी नागरिकों से इसे देखने की अपील की।

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नागचंद्रेश्वर मंदिर में आस्था की ऐतिहासिक भीड़

नागपंचमी के पावन अवसर पर श्री महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट सोमवार रात 12 बजे खोले गए। यह मंदिर वर्ष में केवल एक बार, नागपंचमी के दिन दर्शनार्थियों के लिए खोला जाता है। मंगलवार की दोपहर तक ही 3 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे, और प्रशासन को अनुमान है कि रात 12 बजे तक यह संख्या 10 लाख को पार कर जाएगी।

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साँझ..

उम्र की इस साँझ में, जब तुम स्वयं से मिले — यह कविता जीवन की उस अवस्था की बात करती है जहाँ इंसान अपने अनुभवों और अधूरी इच्छाओं की परछाइयों से रूबरू होता है। मन की चुप्पी में जब आत्मा खुद से सवाल करती है — ‘क्यों इतने भ्रम में ढले?’ — तो यह जीवन की उन अधूरी आकांक्षाओं और खोई हुई संभावनाओं की ओर इशारा करता है जो समय के साथ रह गईं।

कविता का केन्द्रीय भाव यह है कि जो हम जीवन भर बाहर खोजते हैं — जैसे संतोष, प्रेम, आत्मिक शांति — वो हमारे ही भीतर है, ठीक उसी तरह जैसे मृग के भीतर ही कस्तूरी होती है। लेकिन मन फिर भी किसी सहारे, किसी उम्मीद की डोर से बंधा रहता है।

‘हर किसी की राह में एक अधूरा काश है’ — यह पंक्ति जीवन की सार्वभौमिक सच्चाई को व्यक्त करती है कि हर इंसान के मन में कुछ अधूरी इच्छाएँ रह जाती हैं। और शायद वही अधूरापन हमें इंसान बनाता है, हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

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‘बेरंग’ ने खोले किशोरों के मन के दरवाज़े

सिर्फ बस्तियों या निम्न वर्गों में नहीं, बल्कि समृद्ध समाजों में भी किशोर अपराध देखने को मिलते हैं। हम तब ही इस पर चर्चा करते हैं जब कोई बड़ा हादसा हो, जैसे हाल ही में पुणे की पोर्श दुर्घटना। लेकिन हमें ऐसे मामलों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। सभी सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चों को समझने की जरूरत है।” यह विचार प्रसिद्ध लघु फिल्म निर्देशक राहुल पनशिकर ने नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (NFAI) में अपनी लघु फिल्म ‘बेरंग’ की विशेष स्क्रीनिंग के अवसर पर व्यक्त किए।यह फिल्म किशोरों की मानसिक और भावनात्मक जद्दोजहद को संवेदनशील तरीके से दर्शाती है।‘बेरंग’ का निर्माण राहुल्स ग्राफिक्स ने किया है और इसका समर्थन फ्लीटगार्ड फिल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है।

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वेस्टर्न रेलवे ने हर्षोल्लास से मनाया बांद्रा स्टेशन महोत्सव

पश्चिम रेलवे द्वारा 26 जुलाई 2025 को “बांद्रा स्टेशन महोत्सव” उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर बांद्रा स्टेशन की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान का जश्न मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विशेष स्मारक कवर के विमोचन से हुई, जिसे पश्चिम रेलवे के अपर महाप्रबंधक प्रदीप कुमार, मुंबई सेंट्रल मंडल के मंडल रेल प्रबंधक पंकज सिंह और डाक सेवा निदेशक काया अरोरा ने जारी किया।

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दादा वासवानी की जयंती पर ‘मूवमेंट ऑफ कैल्म’ वॉकाथॉन

सद्गुरु दादा जे. पी. वासवानी की जयंती (2 अगस्त – ग्लोबल फॉरगिवनेस डे) के उपलक्ष्य में सद्गुरु वासवानी मिशन की युवा शाखा ‘ब्रिज बिल्डर्स’ द्वारा पुणे, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और न्यूयॉर्क में ‘मूवमेंट ऑफ कैल्म’ वॉकाथॉन का आयोजन किया गया।

पुणे के कोरेगांव पार्क में बारिश के बावजूद 800 से अधिक प्रतिभागी सुबह 6:30 बजे 3 किमी की इस अद्वितीय यात्रा में शामिल हुए। शुरुआत सद्गुरु वासवानी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (SVIMS) से हुई। वॉक से होने वाली आय नि:शुल्क बच्चों की हृदय शल्य चिकित्सा के लिए दान की जाएगी।

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