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आओ चाय बनाए …

“आओ चाय बनाए” एक भावनात्मक आमंत्रण है, जिसमें चाय बनाने की प्रक्रिया को एक प्रेमपूर्ण और सांस्कृतिक अनुष्ठान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह कविता सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि आत्मीयता, मिलन और घरेलू सौंदर्य की प्रतीक है। मसालों की सुगंध, शक्कर की मिठास और चाय की पत्ती की उबाल के साथ मित्रता और अपनापन भी घुलता है। यह कविता हर उस व्यक्ति को बुलाती है जो रिश्तों की गर्माहट को महसूस करना चाहता है — एक प्याले चाय के साथ।

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सावन में जरूरी है सात्विक भोजन

सावन केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी विशेष होता है। इस महीने सात्विक भोजन अपनाना न केवल शिव आराधना में सहायक है बल्कि शरीर को हल्का, मन को शांत और आत्मा को निर्मल रखने का एक माध्यम भी है। इस बार सावन में सिर्फ आस्था नहीं, स्वास्थ्य की भी रक्षा करें — सात्विक जीवन अपनाएं।

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घनघोर घटा सावन की…

“सावन जब अपने पूरे श्रृंगार में होता है, तब हर डाल झूमती है, हर कोना भीगता है — लेकिन एक बेटी के मन का कोना तब भी सूना रह जाता है जब वह बाबुल के आंगन से दूर होती है। अमराइयों की डालियाँ झूलों से भर जाती हैं, लेकिन उसकी आँखों में झूले पीहर की यादों के बनते हैं। मेघा की हर गर्जना में वह अपनी माँ की पुकार सुनती है, और हर रिमझिम बूँद में अपने बचपन की हँसी। सावन, जो बाकी दुनिया के लिए उल्लास है, एक बेटी के लिए कभी-कभी वेदना की धूप-छाँव भी बन जाता है।”

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आज ही सुना जाए

“हर दिन एक नई शुरुआत लेकर आता है, और आज का दिन भी कुछ सवालों, कुछ संभावनाओं के साथ हमारे सामने खड़ा है। बीते कल की उलझनों और आने वाले कल की चिंता में उलझे रहना स्वाभाविक है, लेकिन यदि हम ठान लें कि ‘आज’ को ही जिएंगे, तो वही सबसे बड़ा समाधान होगा। यह कविता हमें प्रेरित करती है कि हम बीते कल की चिंताओं और भविष्य की अनिश्चितताओं को छोड़कर, आज की चुनौतियों को आज ही हल करें और जीवन में नवीनता लाएं। ‘आज ही कल के कर्म को क्रम से लिया जाए’—यह संदेश हर उस व्यक्ति के लिए है जो आत्मनिर्भरता और वर्तमान में जीने की भावना को अपनाना चाहता है।”

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सेंट्रल रेलवे के जीएम ने किया होस्टल जयगढ़ का उद्घाटन

मध्य रेल्वे के महाव्यवस्थापक श्री धर्मवीर मीना ने मंगलवार को भायखळा स्थित सिग्नल और लिकॉम प्रशिक्षण संस्था का निरीक्षण किया और प्रशिक्षणार्थियों के लिए नवनिर्मित जयगढ़ वसतिगृह (छात्रावास) का उद्घाटन किया।

जयगढ़ छात्रावास में 36 सुसज्ज कक्ष हैं, जिनमें 144 प्रशिक्षणार्थियों के निवास की सुविधा है। इस भवन में व्यायामशाला, मनोरंजन कक्ष, भोजन कक्ष और वाई-फाई जैसी आधुनिक सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई गई हैं।

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उज्जैन से संत हिरदाराम नगर के बीच श्रावण मास में विशेष ट्रेन 26 से

श्रावण मास में उज्जैन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए पश्चिम रेलवे ने उज्जैन और संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) के बीच 26 जुलाई से 31 अगस्त तक रोज चलने वाली विशेष अनारक्षित ट्रेन की सुविधा शुरू की है। यह ट्रेन विशेष किराए पर चलेगी और महाकाल दर्शन को आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए लाभकारी साबित होगी।

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बूँदों की पदचाप…

मैं ध्यानमग्न होकर आज वर्षा की बूँदों की पदचाप सुन रही हूँ। ये बूँदें जैसे कोई देववधू बनकर घूँघट काढ़े आई हों और धरती से मधुर आलिंगन कर उसका संताप हर रही हों। मिट्टी में मिलकर अंकुरित होने लगीं, मानो जीवन की नई कोंपलें फूटने लगी हों। पूरी प्रकृति जैसे किसी रचनात्मक क्रीड़ा में सम्मिलित हो गई हो। इन बूँदों ने तन-मन को धोकर शुद्ध कर दिया, और भीतर की Maya को खोज निकाला। प्रत्येक बूँद अब एक मोती बन गई है, जिसे मन सहेज रहा है, मानो किसी गूढ़ तत्व से मिलने का जाप हो रहा हो।

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ना रोक खुद को अब…

हर कठिनाई से लड़ने की ताकत रखती है तू, तो फिर सुन स्त्री, अब अपने स्त्री होने पर शर्म नहीं, गर्व किया कर। जहाँ मन लगे, वहाँ दिल लगाना तेरा अधिकार है, और आईने में मुस्कुराकर खुद को पहचानना भी। तू सिर्फ जिम्मेदारियों में नहीं, हक़ में भी जी सकती है – खुद से प्यार कर, खुद को सजा, और दुनिया को दिखा कि तू क्या है।”

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महाकाल की महिमा अब सिनेमा में

साउथ सुपरस्टार पवन कल्याण अभिनीत मेगा बजट फिल्म ‘हरिहर वीरमल्लू (धर्मयुद्ध)’ 24 जुलाई को देशभर में पांच भाषाओं में रिलीज हुई। इस ऐतिहासिक फिल्म में उज्जैन के भस्म रमैया भक्त मंडल को धर्म की धुरी के रूप में विशेष भूमिका मिली है। यह फिल्म विदेशी आक्रांताओं द्वारा भारत में किए गए मंदिरों के विध्वंस और सनातन धर्म की रक्षा में समर्पित वीरमल्लू के जीवन पर आधारित है। फिल्म में पवन कल्याण ने धर्मरक्षक वीरमल्लू की भूमिका निभाई है, जबकि बॉबी देओल औरंगज़ेब के रूप में नजर आएंगे।

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महाकाल की भक्ति और सेवा: कावड़ यात्रियों के लिए अन्नक्षेत्र

श्रावण मास में उज्जैन आने वाले कावड़ यात्रियों के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर समिति ने इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी शनि मंदिर के पास अस्थायी अन्नक्षेत्र की शुरुआत की है, जहाँ प्रतिदिन नि:शुल्क भोजन वितरित किया जा रहा है। यह भोजन महाकाल मंदिर के अन्नक्षेत्र में तैयार होकर भगवान को भोग लगाने के बाद यात्रियों तक पहुँचाया जाता है। समिति द्वारा सोमवार को व्रती भक्तों के लिए फलाहारी खिचड़ी और चिप्स की भी विशेष व्यवस्था की गई है। वर्ष 2004 से यह अन्नक्षेत्र परंपरा रूप से संचालित हो रहा है, जो भक्तों के दान से चलती है। विशेष अवसरों पर श्रद्धालु भोजन प्रसादी के लिए मंदिर को दान भी करते हैं। पहले सोमवार को 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने अन्नक्षेत्र का लाभ उठाया।

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