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सरस्वती वन्दना

यह कविता एक साधिका की अंतरतम पुकार है, जिसमें वह माँ से प्रार्थना करती है कि उसका अंतर्मन शुद्ध, निर्मल और विकारों से रहित हो जाए। वह चाहती है कि उसका प्रत्येक श्वास एक श्रद्धा से भरा पूजन बन जाए, और उसका मन ऐसा हो जैसे मुस्काता हुआ वृंदावन। कविता में भक्ति का भाव सहज रूप से बहता है — कभी वह मन की वीणा पर माँ की महिमा का गीत गाना चाहती है, तो कभी बनमाली को खोजती हुई नंदनवन की ओर बढ़ती है।
कवयित्री अपने जीवन में अवरोधों को दूर कर विश्वास की गली में ‘निवी’ नामक दीप जलाकर गतिमान बनने की आकांक्षा रखती है। यह रचना केवल भक्ति नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और चेतना के उजास की ओर यात्रा है।

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आदर, मंच और धोखा

“एक दिन अचानक सरला के खाते में साढ़े तीन लाख रुपये आ जाते हैं। कोई जानकारी नहीं, कोई सूचना नहीं। थोड़ी ही देर में एक फोन आता है—‘मैं रामभरोस बोल रहा हूं, मेरी बहू से गलती से आपके खाते में पैसे आ गए हैं, लौटा दीजिए।’ सरला चौंक जाती है। क्या यह कोई साजिश है या ईमानदारी? चेक लौटाया जाता है। लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकती। वह आदमी बार-बार घर आने लगता है—कभी चाय पर, कभी मोहल्ले में गाड़ी खड़ी करने के बहाने। उसके शब्दों में ‘मिशन’, ‘समाजसेवा’ और ‘फायदा’ की मीठी-मीठी बातें होती हैं।

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नागदा में समय पर उपचार ने बचाई 30 वर्षीय युवक की जान

नागदा में चौधरी हॉस्पिटल के डॉ. सुनील चौधरी ने समय पर उपचार कर 30 वर्षीय सनी गोयल की जान बचाई। अचानक आए हार्ट अटैक के बाद डॉक्टर की तत्परता और अनुभवी निर्णय से युवक को नया जीवन मिला। परिजनों ने डॉक्टर की टीम का आभार जताया और लोगों ने सेवाभाव की सराहना की।

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devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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भारत में नीली आंखें: एक रहस्यमयी विरासत

भारत की गलियों में जब कोई बच्चा नीली आंखों के साथ मुस्कराता है या जब पर्दे पर ऋतिक रोशन, करिश्मा कोटक या निकोल फारिया जैसे सितारों की नीली आंखें चमकती हैं, तो एक सवाल हर किसी के मन में जरूर उठता है – “भारत जैसे सांवले-त्वचा प्रधान देश में ये नीली आंखें आखिर आई कहां से?”

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पंखुड़ियों में छुपा है सेहत का राज़

गुलाब केवल सौंदर्य का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह सेहत का संरक्षक भी है। इसकी पंखुड़ियों में छिपे गुण न केवल वजन घटाने, तनाव कम करने और त्वचा को निखारने में सहायक हैं, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूती प्रदान करते हैं। आज के समय में गुलाब एक प्राकृतिक इलाज के रूप में फिर से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

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राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान

श्री सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद का वार्षिक उत्सव बिहार भवन, बैंगलोर में हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया। राही राज़ को साहित्य सम्मान और प्रीति राही को संगीत सम्मान प्राप्त हुआ।

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गधे पैदा नहीं होते, बनाए जाते हैं…

अगर आप सोचते हैं कि बिना मेहनत के मोटी कमाई संभव नहीं तो जनाब आप गलत हैं। पेश है “बाबा मेकिंग कंपनी प्रा. लि.” का बेमिसाल मॉडल, जहाँ थोड़ी वाकपटुता, थोड़ी झूठ बोलने की कला और चमत्कार बेचने का हुनर आपको रातों-रात ‘दी ग्रेट बाबा’ बना सकता है। लाखों गधे आपका इंतजार कर रहे हैं जो आंख मूंदकर आपके ‘चमत्कार’ पर भरोसा करेंगे। बस दस हज़ार रुपये निवेश कीजिए और करोड़ों में खेलिए। धर्म, चमत्कार और गधों की दुनिया में आपका स्वागत है!

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शिव

यह कविता शिव महिमा का अनुपम वर्णन है, जिसमें सदाशिव की अनंत महिमा, करुणा, दया और प्रेम का भावपूर्ण चित्रण किया गया है। शिव केवल तीनों लोकों के स्वामी ही नहीं बल्कि भक्तों के उद्धारक भी हैं। डमरू की ध्वनि से गुंजित, दूध और जल की धार से पूजित, सदाशिव का प्रत्येक रूप श्रद्धा से भरा हुआ है। शिव शंभू न केवल काशी के वासी हैं बल्कि हर कण में विद्यमान हैं। उनका भस्म रमाया रूप, सर्पों का हार, नंदी पर विराजमान स्वरूप—सभी जीवन के हर क्षण में शांति और शक्ति का संचार करते हैं।

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इंदौरियत जिंदा है…..

इंदौर ने स्वच्छता में लगातार आठवीं बार पहला स्थान पाकर यह सिद्ध कर दिया है कि जब नागरिक जागरूक हो जाएं तो कोई लक्ष्य असंभव नहीं। जहां देश के कई शहरों में सफाईकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आ रही हैं, वहीं इंदौर में उन्हें हार पहनाकर सम्मानित किया जा रहा है। यह सिर्फ स्वच्छता की जीत नहीं, बल्कि मानवता और संवेदनशीलता की जीत है। इंदौर ने साबित किया है कि शहर की खूबसूरती केवल सड़कें नहीं, बल्कि वहां के लोगों का दिल भी होता है।

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