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चूड़ियाँ

चूड़ियाँ सिर्फ़ काँच की बनी वस्तुएँ नहीं होतीं। वे माँ के हाथ उठते ही दुआओं का आशीर्वाद बन जाती हैं, बहन के राखी बाँधते ही रिश्तों की मजबूती का प्रतीक बन जाती हैं, और प्रियतम के सानिध्य में खुशियों की खनक। देखने में नाज़ुक और रंग-बिरंगी होने के बावजूद, वे जीवन की डोर को बाँधने और संबंधों को सहेजने का अद्भुत सामर्थ्य रखती हैं। चूड़ियाँ कमज़ोर नहीं होतीं—वे औरत की शक्ति, उसकी संवेदनाओं और उसके अटूट वसूलों का प्रतीक हैं।

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बलात्कार के केस की धमकी तीन युवकों से वसूली भारी रकम

,सोशल मीडिया पर पहचान बढ़ाकर एक युवती ने युवक को अपने घर बुलाया और उसे शारीरिक संबंध बनाने के लिए मजबूर किया. इसके बाद बलात्कार का झूठा केस दर्ज करने की धमकी देकर उससे पौने दो लाख रुपये वसूले. जब उसने ५ लाख रुपये की मांग पूरी नहीं की तो उसके खिलाफ बलात्कार और एट्रोसिटी का गंभीर मामला दर्ज कर दिया गया. हैरान करने वाली बात यह है कि इसी तरह इस युवती ने नांदेड़ और कंधार के दो अन्य युवकों के खिलाफ भी बलात्कार और अट्रोसिटी का मामला दर्ज करवाया है.

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बीड़-अमलनेर नई रेल लाइन का लोकार्पण

 महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री  देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री तथा बीड़ के पालकमंत्री  अजित पवार ने आज बीड़ जिले को बड़ी सौगात देते हुए अमलनेर (बी) – बीड़ नई रेल लाइन का लोकार्पण किया तथा बीड़ से अहिल्यानगर के लिए उद्घाटन विशेष ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर  पर्यावरण एवं जलवायु परवर्तन तथा पशुसंवर्धन मंत्री श्रीमती पंकजा मुंडे, राज्यसभा सांसद   राजनी पाटिल  लोकसभा सांसद  बजरंग सोनवणे, केंद्रीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित थे। यह समारोह बीड़ रेलवे स्टेशन पर भव्य रूप से संपन्न हुआ।

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प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर ड्रोन से जगमगाया आकाश

‘हैप्पी बर्थडे मोदी जी’ का संदेश देते हुए जब हज़ार ड्रोनरूपी तारे आकाश में जगमगाने लगे, तब पुणेकरों की आंखें मानो तृप्त हो गईं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमृत महोत्सव अर्थात ७५वें जन्मदिन पर उन्हें शुभकामनाएं देने के लिए केंद्रीय राज्यमंत्री और पुणे के सांसद मुरलीधर मोहोल की संकल्पना से इस भव्य ड्रोन शो का आयोजन एस.पी. महाविद्यालय के मैदान में किया गया था.

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संतोष कुमार झा का कविता संग्रह “स्याही का सिपाही”

हिंदी दिवस के अवसर पर गांधीनगर, गुजरात में आयोजित 5वें अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन के दौरान कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केआरसीएल) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक संतोष कुमार झा के चौथे काव्य संग्रह “स्याही का सिपाही” का विमोचन किया गया। पुस्तक का विमोचन भारत सरकार के केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, वैज्ञानिक डॉ. आनंद रंगनाथन और भारत सरकार की सचिव (राजभाषा) श्रीमती अंशुलि आर्या द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

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क्षणभंगुर जीवन मेरा…

नीलम राकेश, प्रसिद्ध लेखिका, सीतापुर रोड लखनऊ अपने बरामदे में आराम कुर्सी पर बैठे शेलेन्द्र कुमार सिन्हा अपलक एक छोटे बादल के टुकड़े को आकाश में अकेले अठखेली करते देख रहे थे। उनके अन्तस का एकाकीपन पूरी तीव्रता के साथ उनके ऊपर हावी था। अपना जीवन उन्हें इस निरीह क्लांत बादल के टुकड़े जैसा प्रतीत…

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पहली बार

सूरज ढलने ही वाला था, अँधेरा पूरी तरह उतरा नहीं था और बच्चे अभी खेलकर घर नहीं लौटे थे। तभी किसी ने धीरे से पुकारा — “दुन्नो।” इस पुकार ने उसके भीतर कुछ कोमल और अनजाना जगाया। कान के पीछे हल्की सिहरन दौड़ गई। चूल्हे पर दाल उबल रही थी, लकड़ियाँ सुलगानी थीं और रोटियाँ बनानी थीं। उसके विचारों की दुनिया अब तक रोटियों तक सीमित थी, जिन्हें उसे जीवन भर बेलना था।

दुन्नो ने अभिनय किया जैसे उसने कुछ सुना ही न हो। यही उसे सिखाया गया था — अच्छी लड़कियाँ आवाज़ की दिशा में नहीं देखतीं, कुँवारी लड़कियाँ मोम की बनी होती हैं, जिन्हें आँच से बचाकर रखना ही उनका कर्तव्य है। लेकिन वह पुकार फिर आई, इस बार स्वर में मिठास थी। हाथ में लोई थामे उसने पूछ लिया — “कौन हो तुम? जो पुकारता है मुझे, जबकि मैं खुद अपना नाम भूल चुकी हूँ। तुमने मुझे जीवित पुकारा, तो क्या मैं सच में ज़िंदा हूँ?”

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राष्ट्रनायक नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी केवल एक नेता नहीं, बल्कि भारत माँ के ऐसे सपूत हैं जिन्होंने संघर्षों की भट्टी में तपकर अपनी पहचान बनाई। जनसेवा उनके जीवन का धर्म है और राष्ट्रभक्ति उनकी पूजा।
मोदी ने अपने संकल्पों से भारत को नवयुग की ओर अग्रसर किया। हर कठिनाई के सामने साहस के साथ खड़े होकर उन्होंने जनता को विश्वास और आशा दी। उनका जीवन कर्म, सरदार पटेल के साहस और शिवाजी की वीरता की याद दिलाता है।

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कल, और आज़

कल और आज़—दोनों समय की धुरी पर खड़े हैं। जो पल बीत गया, वह केवल स्मृति है, खट्टे-मीठे अनुभवों और तीखे शब्दों से भरा हुआ। वह कल मेरा प्रारब्ध नहीं बन सका, इसलिए उसे थामे रहना व्यर्थ है। आज़, जो अभी मेरी साँसों में धड़क रहा है, वही सच्चा गीत है, वही वास्तविक उत्सव है। आज़ ही वह क्षण है जो मुझे आनंदित कर रहा है, जो मुझे जीने का कारण दे रहा है। इसलिए कल की ओर लौटकर पछताने से बेहतर है कि आज़ को पकड़कर जिया जाए।

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माँ का रसोईघर

माँ चूल्हे की आँच में तपकर जीवन को महकाती है। आटे की लोई में वह अपने सपनों को गूँथती और बेलती है। दिनभर की थकान उसके चेहरे से तब गायब हो जाती है जब थाली में पकवानों की खुशबू फैलती है और परिवार का हर सदस्य संतोष से भोजन करता है। बच्चों की चमकती आँखों में उसे अपनी सबसे बड़ी तृप्ति मिलती है।

उसके लिए खाना सिर्फ शरीर का ईंधन नहीं है, बल्कि घर का प्रेम है, जिससे परिवार जीवित और आनंदित रहता है। उसकी रसोई एक तपोवन है, जहाँ वह हर दिन निस्वार्थ भाव से यज्ञ करती है

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