भक्ति की राह पर सौ कदम, आत्मा की पुकार बनकर निकला सांवरिया सेठ का जत्था

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वॉयर न्यूज, पुणे
जय सांवरिया सेठ के गगनभेदी जयकारों के साथ मंगलवार की शुभ प्रभात पर भक्ति की एक अनुपम धारा नगर से प्रवाहित हुई. सांवरिया सेठ संघ के संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का पावन जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) की ओर पदयात्रा पर निकला.
यात्रा की शुरुआत नागदा रोड स्थित गणेश मंदिर में भगवान गणपति की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना से हुई. आरती, घंटियों की मधुर ध्वनि और श्रीकृष्ण भजनों से वातावरण पवित्र हो उठा. इसके पश्चात जब भक्तों का जत्था ढोल-नगाड़ों, भजनों और जयघोषों के साथ नगर सीमा से आगे बढ़ा, तो मार्ग में भक्ति और प्रेम से ओतप्रोत नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी.यात्रा मार्ग पर फिरोज़ खान, बालकृष्ण पोरवाल, प्रताप फ्रेंड्स क्लब, राज कोचर, विपुल कसेरा, श्याम गुलाटी मित्र मंडल, रोहित कारा परिवार, राजेश काठेड़, नीलेश भंडारी, जयंती उपाध्याय, नन्नू भरत अरोरा, मुकेश चौधरी, सुनील चौहान, सतीश मंडोवरा, दीपक शर्मा, हरिओम जैसे सेवाभावी नागरिकों ने श्रद्धालुओं को जल, फल, प्रसाद व सहयोग प्रदान कर उनका उत्साह बढ़ाया.
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सांवरिया सेठ: भक्तों की हर पुकार सुनने वाला श्याम सेठ
श्री सांवरिया सेठ मंदिर, जो चित्तौड़गढ़ जिले के मंडपिया गांव में स्थित है, केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र है. यहाँ भगवान श्रीकृष्ण अपने श्यामवर्ण रूप में सेठ के रूप में विराजमान हैं. श्रद्धालु इन्हें प्रेम से सांवरिया सेठ कहकर पुकारते हैं, जो हर भक्त की पुकार सुनते हैं और उनके जीवन में सुख-समृद्धि का वरदान देते हैं.
मान्यता है कि यह प्रतिमा 1840 ई. में एक खेत में नीम के पेड़ के नीचे प्रकट हुई थी. उस दिन से आज तक भक्तों का यह विश्वास और प्रेम निरंतर बढ़ता गया. कहा जाता है कि जो भी श्रद्धा से यहां आता है, उसकी झोली खाली नहीं जाती.
यहां की पूर्णिमा, अमावस्या व एकादशी पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. भक्तजन विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति हेतु पैदल यात्रा, भजन कीर्तन, छप्पन भोग, झांकी दर्शन और सेवा का संकल्प लेते हैं.
श्रद्धालु बोले यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है.
पदयात्रा में शामिल भक्तों के चेहरों पर थकान नहीं, बल्कि आस्था और आनंद का तेज ह इस पैदल यात्रा में शामिल यात्री अनिल सोलंकी ने भावुक होकर कहा यह यात्रा शरीर से नहीं, आत्मा से होती है. हर कदम पर लगता है जैसे सांवरिया सेठ स्वयं साथ चल रहे हैं.दूसरे श्रद्धालु ओमप्रकाश धमोनिया ने कहा कि सावंरिया सेठ के आशीर्वाद से हम सभी खुश हैं.
हम कोई मांगने नहीं जा रहे, हम तो बस उन्हें निहारने, उनका चरण स्पर्श करने, और उनकी झलक पाने जा रहे हैं. वही हमारा धन है, वही जीवन.

सेवा, समर्पण और संगठित श्रद्धा का सुंदर उदाहरण
यात्रा के संयोजक समाजसेवी संतोष विश्वकर्मा ने बताया कि यह यात्रा एक संदेश है. भक्ति में शक्ति है, और जब कोई भक्त नंगे पांव, खुले दिल से अपने आराध्य की ओर बढ़ता है, तो स्वयं भगवान उसकी रक्षा करते हैं, उसका मार्ग प्रशस्त करते हैं.
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापसिंह गुर ने कहा कि यह यात्रा न केवल धार्मिक उत्सव है, बल्कि समाज में एकता, सेवा और सहयोग की भावना को भी प्रेरित करती है. नगरवासियों द्वारा जत्थे का जिस प्रकार स्वागत और सत्कार किया गया, वह बताता है कि सांवरिया सेठ केवल मंदिर में नहीं, हर हृदय में बसते हैं.


सांवरा तू ही तू
सांवरिया सेठ जी की जय
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सभी शुभचिंतकों पर सांवरिया सेठ जी की कृपा बनी रहे 🙏
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