बंधन रक्षा का
रक्षा की डोर केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और वचन का बंधन है। ‘बंधन रक्षा का’ कविता कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते के माध्यम से इसी अटूट विश्वास और रक्षा के वचन को अभिव्यक्त करती है।

रक्षा की डोर केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और वचन का बंधन है। ‘बंधन रक्षा का’ कविता कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते के माध्यम से इसी अटूट विश्वास और रक्षा के वचन को अभिव्यक्त करती है।
कान्हा के प्रति प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति करती यह भक्ति कविता मोरपंख से लेकर बाँसुरी, पायल और चरणों की धूल बनने की भावपूर्ण कल्पना के माध्यम से कृष्ण-भक्ति को व्यक्त करती है.
मित्रता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, त्याग और समर्पण का सबसे सुंदर रूप है। सच्चा मित्र वही होता है, जो हर सुख-दुःख में बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा रहे। यह लेख मित्रता के वास्तविक महत्व और उसके जीवन में अमूल्य स्थान को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।
द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।
द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।
जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।