Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
द्रौपदी कृष्ण की कलाई पर कपड़ा बाँधते हुए

बंधन रक्षा का

रक्षा की डोर केवल एक धागा नहीं, बल्कि विश्वास और वचन का बंधन है। ‘बंधन रक्षा का’ कविता कृष्ण और द्रौपदी के रिश्ते के माध्यम से इसी अटूट विश्वास और रक्षा के वचन को अभिव्यक्त करती है।

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मोरपंख मुकुट धारण किए बाँसुरी बजाते श्रीकृष्ण का भक्ति भाव से भरा दृश्य

कान्हा तेरी पगड़ी की मोर पांखड़ी बन जाऊँ

कान्हा के प्रति प्रेम और पूर्ण समर्पण की अभिव्यक्ति करती यह भक्ति कविता मोरपंख से लेकर बाँसुरी, पायल और चरणों की धूल बनने की भावपूर्ण कल्पना के माध्यम से कृष्ण-भक्ति को व्यक्त करती है.

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दो सच्चे मित्र कठिन समय में एक-दूसरे का हाथ थामे हुए

अमर मित्रता

मित्रता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि विश्वास, प्रेम, त्याग और समर्पण का सबसे सुंदर रूप है। सच्चा मित्र वही होता है, जो हर सुख-दुःख में बिना किसी स्वार्थ के साथ खड़ा रहे। यह लेख मित्रता के वास्तविक महत्व और उसके जीवन में अमूल्य स्थान को सरल शब्दों में प्रस्तुत करता है।

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भगवान श्रीकृष्ण ज्ञान का दीप जलाकर अंधकार मिटाते हुए – अरदास हिंदी कविता

अरदास

जब अराजकता, अपराध और स्वार्थ से घिरी दुनिया में मानवता कराहने लगती है, तब मन भगवान श्रीकृष्ण से प्रार्थना करता है कि वे पुनः अवतरित होकर ज्ञान का दीप जलाएँ, प्रेम का संदेश दें और इस धरा को शांति, करुणा तथा सद्भाव से आलोकित करें।

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कदंब तले: राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति रस से सजी भावपूर्ण कविता

कदंब तले

कदंब वृक्ष की छांव में खड़े श्याम, राधा का पिघलता मन, बांसुरी की मधुर तान और प्रेम रस की वर्षा—‘कदंब तले’ कविता राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भक्ति की अनुपम अनुभूति कराती है।

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महाभारत सभा में द्रौपदी श्रीकृष्ण को पुकारती हुई, दुशासन चीरहरण का प्रयास करता है, दिव्य प्रकाश से अनंत वस्त्र प्रकट होते हैं और सभा मौन खड़ी है।

हे गोविंद! मेरी लाज बचाओ

द्रौपदी के चीरहरण प्रसंग पर आधारित यह मार्मिक कविता नारी सम्मान, अन्याय के विरुद्ध पुकार और श्रीकृष्ण की दिव्य रक्षा का भावपूर्ण चित्रण करती है।

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द्रौपदी–कृष्ण संवाद: “विश्वास का वस्त्र

द्रौपदी–कृष्ण संवाद

द्रौपदी और श्रीकृष्ण के बीच यह संवाद “विश्वास का वस्त्र” महाभारत की उस पीड़ा को उजागर करता है, जहाँ नारी अस्मिता पर प्रश्न उठे। यह रचना विश्वास, धर्म, और नारी सम्मान के गहरे अर्थ को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है।

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devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

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