कृष्ण तुम ही हो…

कवि कृष्ण को सबमें और सब कुछ कृष्ण में देखता है। वे ज्ञान भी हैं और विज्ञान भी, वेद भी हैं और उपदेश भी। प्रकृति में बहती सरिता से लेकर सागर की गहराइयों तक, पेड़-पौधों की हरियाली से लेकर धरती की मुस्कान तक हर रूप में कृष्ण विराजते हैं। वे काल भी हैं और भाव भी, प्रेम की ज्वाला भी और विरह की पीड़ा भी। कभी मरहम बनकर सहलाते हैं तो कभी प्रेरणा बनकर दिशा दिखाते हैं। भजन-किर्तन में गूंजते स्वर हों या संसार की माया सब कृष्ण ही हैं, तारणहार भी वही।

Read More

भजन : हे माता कहो क्या त्रुटि हुई

इस भजन में एक भक्त अपनी माता से प्रकट पश्चाताप और सवाल उठाता है — “हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई, मुझसे हुआ क्या पाप?” वह दिन-रात माता की सेवा में लगा रहता है, अपने स्वाभिमान और कर्तव्य के बीच उलझा हुआ। भजन में पत्नी की असहायता, आत्म-संदेह और ईश्वर के प्रति श्रद्धा का मिश्रण दिखाई देता है। हर पंक्ति में उसके हृदय की पीड़ा, पछतावा और भक्ति स्पष्ट है, जबकि माता और देवताओं के प्रति उसका समर्पण उसकी आस्था को उजागर करता है। यह भजन पश्चाताप और विश्वास के बीच की संवेदनशील यात्रा का प्रतीक है।

Read More
devotees walking in padyatra with drums and chants heading to Sanwariya Seth temple with flowers and devotion

सेठ नहीं साक्षात श्याम हैं सांवरिया

जय सांवरिया सेठ के जयकारों के बीच मंगलवार को संतोष विश्वकर्मा के नेतृत्व में 60 श्रद्धालुओं का जत्था श्री सांवरिया सेठ मंदिर, मंडपिया (राजस्थान) के लिए रवाना हुआ। नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर विदाई दी, और भक्तों ने कहा— यह यात्रा नहीं, आत्मा की पुकार है।

Read More