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भजन : हे माता कहो क्या त्रुटि हुई

रीतासिंह, प्रसिद्ध कवयित्री, बेंगलुरू

हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ?
ये पीड़ा लगे है शूल-सी,
क्यों आना पड़ा तुमको यहाँ?

क्यों दिया है मुझको दंड ये,
कुछ तो अपने मुख से कहिए।
मैं दास तुम्हारा हूँ माता,
ऐसे तो न यूँ चुप रहिए।

आदेश जो मुझको देती माँ,
मैं स्वयं ही आ जाता वहाँ।
हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ…

सेवा करता दिन-रात आपकी,
मैं कष्ट न कोई होने देता।
जो तुम कहतीं, वो करता मैं,
मैं स्वयं को न सोने देता।

भूल सकूँ मैं माँ को न,
मैं दास तुम्हारा, न भूलना।

माँ सोच रही है खड़ी-खड़ी,
ये कैसी मुसीबत आन पड़ी।
विपदा मैंने खुद ली है मोल,
प्रभु राम जी हैं शक्ति बड़ी।

संदेह किया मैंने शिवजी पर,
क्षमा-योग्य ये अपराध ना।
हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ…

अनजाने में बड़ा पाप हुआ,
पति पर न विश्वास किया।
अब कैसे जाऊँगी सामने मैं,
मैंने स्वयं कुठाराघात किया।

हे प्रभु, क्षमा करना मुझे,
हृदय से कहें, मुख खोले ना।
हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ…

चुपचाप चली दुखी मन से,
सकुचाती स्वयं को कोसती।
पहुँची शिवजी के सामने,
जिह्वा से कुछ न बोलती।

विचित्र विडंबना कैसी आई,
देख शिव को झुक गए नैना।
हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ…

झुके नैन देख पत्नी के,
भोलेनाथ मन ही मन अकुलाए।
“ये क्या कर दिया तुमने, प्रिये?”
सब जान महादेव घबराए।

कैसे मान लूँ अब अर्धांगिनी,
गई राम समीप बन सीता माँ।
हे माता, कहो क्या त्रुटि हुई,
मुझसे हुआ क्या पाप माँ…

2 thoughts on “भजन : हे माता कहो क्या त्रुटि हुई

    1. एक निवेदन
      रचनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए आपका धन्यवाद, यह अवश्य हमारे साथियों का उत्साहवर्धन करेगी और नवसृजन के लिए प्रेरित करेगी. बस एक छोटा सा निवेदन है आप सभी से कि आप अपने शहर का भी उल्लेख कर देंगे तो हमें और हमारे साथियों को लगेगा की उनकी रचनाएं कहां-कहां तक पढ़ी जा रही है.
      आपका साथी

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