‘बेरंग’ ने खोले किशोरों के मन के दरवाज़े

एनएफएआई में हुआ ‘बेरंग’ लघु फिल्म का विशेष प्रदर्शन

“सिर्फ बस्तियों या निम्न वर्गों में नहीं, बल्कि समृद्ध समाजों में भी किशोर अपराध देखने को मिलते हैं। हम तब ही इस पर चर्चा करते हैं जब कोई बड़ा हादसा हो, जैसे हाल ही में पुणे की पोर्श दुर्घटना। लेकिन हमें ऐसे मामलों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए। सभी सामाजिक पृष्ठभूमि के बच्चों को समझने की जरूरत है।” यह विचार प्रसिद्ध लघु फिल्म निर्देशक राहुल पनशिकर ने नेशनल फिल्म आर्काइव ऑफ इंडिया (NFAI) में अपनी लघु फिल्म ‘बेरंग’ की विशेष स्क्रीनिंग के अवसर पर व्यक्त किए।यह फिल्म किशोरों की मानसिक और भावनात्मक जद्दोजहद को संवेदनशील तरीके से दर्शाती है।
‘बेरंग’ का निर्माण राहुल्स ग्राफिक्स ने किया है और इसका समर्थन फ्लीटगार्ड फिल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है।

  • पूनम किर्लोस्कर – प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और शिक्षाविद्
  • पियुष श्रीवास्तव – मार्केटिंग और कॉर्पोरेट कम्युनिकेशंस प्रमुख, फ्लीटगार्ड
  • निरंजन किर्लोस्कर – फिल्म में मुख्य भूमिका
  • संजय कुलकर्णी – फ्लीटगार्ड अध्यक्ष और फिल्म में सह-अभिनेता

इस अवसर पर पूनम किर्लोस्कर ने कहा, “मैंने हर सामाजिक स्तर पर किशोरों के मानसिक दबाव और अवसाद को महसूस किया है। माता-पिता बच्चों पर अपने अधूरे सपने थोपने की बजाय उनके स्वभाव, प्रतिभा और रुचियों को समझें। उन्हें विकल्प चुनने की आज़ादी दें, विफल होने दें और उनके साथ खड़े रहें।”

राहुल पनशिकर ने कहा, “जब बच्चे माता-पिता से अपनी भावनाएं साझा नहीं कर पाते, वहीं से दूरी शुरू होती है। यह फिल्म उसी ‘खामोश चीख’ की आवाज़ है।”फ्लीटगार्ड के वरिष्ठ अधिकारी पियुष श्रीवास्तव ने कहा, “’बेरंग’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक आंदोलन है। यह संवाद को सामान्य बनाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम है। किशोर मानसिक स्वास्थ्य हमारे समय की सबसे महत्वपूर्ण और अनदेखी जा रही समस्या है।”

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