सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद, आरटी नगर, बेंगलुरु की महिला शाखा द्वारा सावन मिलन महोत्सव अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बिहार भवन, बेंगलुरु में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अमिता झा जी ने अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ऊषा झा और डॉ. अर्चना झा एवं बिंदु सिंह जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सचिव डेज़ी शर्मा और अपर्णा शर्मा की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। समिति की कोषाध्यक्ष निधि शर्मा तथा सदस्य हीरा झा और शीला सिंह ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लगभग पचास सदस्याओं ने इस मिलन समारोह में भाग लेकर कार्यक्रम को सार्थकता प्रदान की।

कार्यक्रम में सभी महिलाएं हरे और नीले रंग की पारंपरिक साड़ियों में सजी-धजी उपस्थित हुईं। सभी ने गीत, संगीत और नृत्य के माध्यम से उपस्थित जनों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
महोत्सव के अवसर पर हर सुहागन को चूड़ियाँ, बिंदी, लहठी, मेंहदी और खोईंचा भेंट स्वरूप दिया गया। कार्यक्रम के उपरांत सभी के लिए सुंदर एवं स्वादिष्ट भोजन की भी उत्तम व्यवस्था की गई थी।
आज के समय में हम देख रहे हैं कि महिलाएं निरंतर आगे बढ़ रही हैं। वे अब खुलकर जीवन जी रही हैं। जो महिलाएं कभी केवल चूल्हा-चौका तक सीमित थीं, वे अब अपनी पहचान बना रही हैं, अपनी खुशी को महत्व दे रही हैं। यह सभी महिलाएं चालीस पार की आयु में भी अपने जीवन से कुछ समय निकालकर इस तरह के सांस्कृतिक आयोजनों में भाग लेकर उत्साह और ऊर्जा से भरी हुई दिखाई दीं।

इनके चेहरे पर जो भाव झलक रहा था, वह अभूतपूर्व, अलौकिक और अनुपम था। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि इन्हें जीवन में सदैव इसी तरह की खुशियाँ मिलती रहें, इनके पंखों को इतनी उड़ान मिले कि सफलता हर दिन इनकी दहलीज़ पर दस्तक दे।
अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगा –
यह जननी है, यह भारत की नारी है,
यह सीता है, यह मीरा है, यह गीता है,
इनकी अपनी-अपनी अलग कहानी है,
अब यह सिर्फ़ महिला नहीं – झांसी की रानी है!

राही राज, प्रसिद्ध साहित्यकार, बेंगलौर
