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‘सावन की सहेलियां’ में खूब बिखरीं तीज की छटा

पारीक समाज महिला मंडल, पुणे द्वारा सावन और तीज के पावन पर्व को बड़ी धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। “सावन की सहेलियाँ” नामक इस सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन खासतौर पर समाज की महिलाओं के लिए किया गया, जिसमें पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीतों और नृत्य ने सभी को सावन के उल्लास में डुबो दिया।

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तीज का त्यौहार

सावन की रिमझिम फुहारों और काली घटाओं के बीच जब मोर नाचने लगते हैं, तो प्रकृति का हर रंग और स्वर एक अलग ही उमंग लेकर आता है। ऐसे ही मौसम में तीज का पर्व गाँव-गिरांव से लेकर शहरों तक उल्लास फैलाता है। बिटिया की ससुराल कोथली लेकर जाते पिता, माँ-बाबा का स्नेह, पीहर आई बेटियाँ, बचपन की सखियों से मिलन — सब मिलकर सावन को खास बना देते हैं। झूले की पींगे, हँसी की चहक, कजरी की हूक और विरह की टीस — हर भाव इस मौसम में शामिल होता है। धानी चूनर ओढ़े धरती, आमों से लदी अमराई, घेवर की मिठास और मेलों की रौनक मिलकर सावन और तीज के इस त्योहार को यादगार बना देती है।

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बेंगलुरु में सावन मिलन महोत्सव धूमधाम से सम्पन्न

सिद्धार्थ सांस्कृतिक परिषद, आरटी नगर, बेंगलुरु की महिला शाखा द्वारा सावन मिलन महोत्सव अत्यंत धूमधाम एवं हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह कार्यक्रम बिहार भवन, बेंगलुरु में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता अमिता झा जी ने अत्यंत सौंदर्यपूर्ण ढंग से की। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष ऊषा झा और डॉ. अर्चना झा एवं बिंदु सिंह जी ने सक्रिय भागीदारी निभाई। सचिव डेज़ी शर्मा और अपर्णा शर्मा की भी उत्साहपूर्ण सहभागिता रही। समिति की कोषाध्यक्ष निधि शर्मा तथा सदस्य हीरा झा और शीला सिंह ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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हरियाली तीज : हरियाली, सौंदर्य और आस्था का पर्व

श्रावण मास की हरियाली और वर्षा ऋतु की ताजगी के बीच मनाया जाने वाला हरियाली तीज पर्व केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि नारी शक्ति, सौंदर्य और सांस्कृतिक समृद्धि का उत्सव भी है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन की स्मृति में मनाए जाने वाले इस पर्व में महिलाएँ निर्जला व्रत रखती हैं, पारंपरिक श्रृंगार करती हैं, लोकगीतों की स्वर लहरियाँ बिखेरती हैं और झूले की लय में प्रकृति से जुड़ती हैं। इस दिन महिलाएँ हरे रंग के वस्त्र पहनती हैं, हाथों में मेंहदी रचाती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और पारंपरिक आभूषणों से सजती हैं। हरे रंग को इस पर्व का विशेष रंग माना जाता है, जो हरियाली, समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है। महिलाएँ एक-दूसरे के घर जाकर लोकगीत गाती हैं, पारंपरिक नृत्य करती हैं और झूले झूलती हैं, जो सावन के इस त्योहार की एक विशिष्ट पहचान है।

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