लुमामी, (नागालैंड), 28 जुलाई – नागालैंड विश्वविद्यालय की अगुवाई में एक महत्त्वपूर्ण शोध परियोजना के तहत सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश की ऊँचाई पर स्थित झीलों का विस्तृत और सटीक स्थिरता मूल्यांकन किया जा रहा है। इस परियोजना में जेएनयू, सिक्किम विश्वविद्यालय और अन्य संस्थानों की भागीदारी है।
इस रिसर्च का उद्देश्य संभावित खतरनाक हिमनदीय झीलों की पहचान करना, अचानक झील फटने (GLOF) के खतरे को मापना, और इससे प्रभावित क्षेत्रों का 2D/3D मॉडलिंग के माध्यम से मूल्यांकन करना है। यह अध्ययन टेन्बावा झील, लाचुंग बेसिन (सिक्किम) और तवांग क्षेत्र (अरुणाचल) में किया जा रहा है।
मुख्य अनुसंधानकर्ता डॉ. मानसी देबनाथ ने बताया कि ड्रोन और बाथीमेट्रिक सर्वे के ज़रिए झीलों के आकार, गहराई और जोखिम का मूल्यांकन किया जाएगा। परियोजना से जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, पारिस्थितिकीय खतरे और पूर्व के जलवायु इतिहास की भी जानकारी मिलेगी।
इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से वित्तपोषण प्राप्त है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं की पूर्व चेतावनी और पूर्व नियोजन में सहायता देना है, जिससे हिमालयी क्षेत्र में सतत और सुरक्षित विकास सुनिश्चित किया जा सके।
