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सर्टिफिकेट

“अनीता, सुरभि नहीं आई अभी तक?”
“हाँ मम्मी, सुरभि आज अपनी सहेली के यहाँ रहेगी…”
“अरे?”
अनीता की माँ को चिंता हुई।
(आजकल माँ अनीता के पास रहने के लिए आई हुई थीं।)

“तू जवान लड़की को किसी के घर रातभर रहने के लिए कैसे भेज सकती है? अभी शादी भी नहीं हुई…”
“अरे मम्मी, तो क्या हुआ! जहाँ गई है, वो अच्छी लड़की है। 29 साल की हो गई है सुरभि। अब वो मुझे साथ-साथ लिए तो नहीं डोलेगी। कहीं तो अकेली भी जाएगी।”
“अरे, उसकी शादी नहीं हुई है… ऐसा अच्छा नहीं लगता।”



अब माँ की बातों से अनीता का दिल तिलमिला गया…

“क्या मम्मी? आपने मेरी शादी 20 साल की उम्र में कर दी थी…
ससुराल वालों ने खूब काम करवाया…
घर कमा कर लाती रही…
सड़कों पर दौड़ती रही 22 साल की उम्र से…

तब आपको चिंता नहीं हुई कि आपकी बेटी कहाँ-कहाँ जा रही है…
कैसे बिज़नेस कर रही है…
कैसे-कैसे लोग उसके सामने आते होंगे…
कैसे सड़कों पर दौड़ रही है…

मुझमें तो तब ज़्यादा अक़्ल भी नहीं थी…
लोगों की पहचान भी नहीं थी…

सुरभि तो 29 साल की हो गई है…

सिर्फ़ शादी होना सर्टिफिकेट नहीं होता, माँ!”

सौम्या दुआ, प्रसिद्ध लेखिका, हल्दानी नैनीताल (उत्तराखंड)

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