एक प्रतीक्षा…

एक प्रतीक्षा
सुना है , जीवन में कुछ छूटता है
कुछ मिलता है
कोई आता है , एक लकीर खींचता है
करता एक मद्धम उद्घोष
मैं तुम्हारे साथ हूं !
यह , प्रकृति कहें या ईश्वर
उसका कोई रहस्य है
जीवन को बांधने का या
संपूर्णता से समेट लेने का
कोई विश्वास

मैं प्रतीक्षा में हूँ
हाँ ! मैं प्रतीक्षा में हूँ
इन मिली समृद्धियों के
विरासत की सूक्ष्म संवेदना के
प्रतिध्वनि की ख़ुशियों को जीने की

जीने को , हर रंग
हर ध्वनि
हर रूप
हर पहचान
जो कहे – मैं तुम्हारा हूँ
मेरा सब कुछ तुम्हारा है
मेरी ख़ुशबू , मेरा रंग
मेरी साँस , मेरा संग
जिसमें प्रकृति समाहित है
ब्रह्माण्ड का हर अंश समाहित है

रेणुका अस्थाना, प्रसिद्ध लेखिका, भिवाड़ी राजस्थान

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