मैं हूं सूखी लकड़ी..
मैं सूखी लकड़ी हूं, जीवन में हितकारी और हर रूप में कल्याण फैलाने वाली। मैं शिव के मस्तक पर सजती हूं, कृष्ण की बांसुरी की तान में झूलती हूं, घरों में झूले और पलनों का आधार बनती हूं, और रोगियों का उपचार भी करती हूं। हर कदम पर मेरी उपस्थिति है—सृष्टि, श्रद्धा और जीवन के हर पहलू में। यही मेरी शक्ति और पहचान है।
