कुछ अनकही …
सब ठीक है होने और सब ठीक है कहने में बहुत फर्क होता है। अक्सर हम हँसी के पीछे छिपी खामोशी नहीं पढ़ पाते। कोई पूछे“कैसे हो?” और हम सिर हिलाकर हाँ कह दें, तो समझिए, आधी पीड़ा वहीं मौन में कैद रह जाती है।

सब ठीक है होने और सब ठीक है कहने में बहुत फर्क होता है। अक्सर हम हँसी के पीछे छिपी खामोशी नहीं पढ़ पाते। कोई पूछे“कैसे हो?” और हम सिर हिलाकर हाँ कह दें, तो समझिए, आधी पीड़ा वहीं मौन में कैद रह जाती है।
जीवन क्षणभंगुर है, और प्यार भी कुछ लम्हों का होता है। कभी-कभी साथ रहते हुए भी पल दूर हो जाते हैं। यादें, थोड़ी खुशी और थोड़े ग़म के साथ, हमें हर पल जीना सीखना होता है। जो आज है, वह कल नहीं रहेगा, इसलिए हर अनुभव को पूरी गहराई से महसूस करना ही जीवन का सार है।
जीवन में अंधेरा, आंधियां और कठिनाइयाँ आती हैं, लेकिन विश्वास और साहस के साथ चलना ही जीवन का सार है। दुखों से आँखें मिलाकर आगे बढ़ते हुए, दीप जलाते और खुशियाँ मनाते हुए हम अपने जीवन के गीत गाते रहें। यही प्रयास हमें भीतर और बाहर दोनों जगह उजाला देने का सामर्थ्य देता है।
अरसे बाद जब मैंने अपनी यादों से भरी डायरी खोली, तो एक अजीब-सी गंध ने मुझे घेर लिया — जैसे बीते हुए दिनों की धूल ने अचानक साँसों में जगह बना ली हो। हर पन्ना, हर शब्द, किसी पुराने खंडहर की दीवार-सा झरता हुआ लगा। मैं उन पलों को छूना नहीं चाहती थी, फिर भी वे मुझे अपने भीतर समेटने लगे। अतीत का हर कोना एक कहानी था — अधूरी, चुभती हुई, फिर भी ज़िंदा।
आज हमें किसी बहाने से परखा नहीं जाना चाहिए। दिल चाहता है कि हम सिर्फ उसी के दिल में रहें और किसी और ठिकाने की तलाश न करें। अगर बरसना है तो पूरी ताकत से बरसें, क्योंकि बाद का मौसम सुहाना नहीं चाहिए। हमें काम करते रहना चाहिए, राह में चलते रहना चाहिए, और व्यर्थ में समय गंवाना ठीक नहीं। नई खोज और नए काम होने चाहिए; वही पुराने राग हमें नहीं चाहिए। मुश्किलों में जो काम आता है, उसे बाद में नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। वे भावनाएँ और ख़त, जो हमने लिखे हैं, उन्हें जलाना नहीं चाहिए। और जब दर्द मिले, उसे आँखों से महसूस करो; आँसुओं को दबाना ठीक नहीं।
प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।
यह कविता जीवन को केवल संघर्ष और काँटों से भरा हुआ मानने की मानसिकता को तोड़ती है। कवि कहता है कि जीवन सिर्फ कठिनाइयों और कटु अनुभवों का नाम नहीं है, बल्कि इसमें फूलों जैसी सुंदरता, मधुरता और उमंगें भी समाई हुई हैं।
जीवन की राह में यदि कोई विचलित होकर बीच में ही रुक जाए तो वह अपने लक्ष्य तक कभी नहीं पहुँच सकता। पराजय के डर से भागने वाला कभी विजयी नहीं कहलाता। अंधकार से भयभीत होकर रुकने वाला व्यक्ति प्रकाश की ओर कदम नहीं बढ़ा सकता। दूरी से हताश होने वाला कभी मंज़िल तक नहीं पहुँच पाता।
यह कविता जीवन में प्रतीक्षा की गहराई को उजागर करती है। इसमें मनुष्य के उस भाव को चित्रित किया गया है जहाँ वह प्रकृति या ईश्वर की अदृश्य उपस्थिति को महसूस करता है—एक ऐसा विश्वास जो जीवन को समेटता है, उसे संपूर्णता देता है। प्रतीक्षा केवल किसी घटना की नहीं, बल्कि उन सूक्ष्म संवेदनाओं, विरासत की प्रतिध्वनियों और जीने के अनगिनत रंगों की है। यह प्रतीक्षा जीवन की हर ध्वनि, रूप, पहचान और संबंध को आत्मसात करने की है, जिसमें प्रकृति और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का अंश समाहित हो। कविता कहती है कि सच्ची प्रतीक्षा वही है, जिसमें जीवन और ब्रह्मांड के साथ एकत्व का अहसास जुड़ा हो।