इश्क नहीं… मगर कम भी नहीं
रिद्धिमा और राघव की यह कहानी प्रेम, अपनापन और भावनात्मक सीमाओं के बीच खड़े एक ऐसे रिश्ते की दास्तान है, जहाँ स्नेह है, पर अधिकार नहीं।

रिद्धिमा और राघव की यह कहानी प्रेम, अपनापन और भावनात्मक सीमाओं के बीच खड़े एक ऐसे रिश्ते की दास्तान है, जहाँ स्नेह है, पर अधिकार नहीं।
यह कविता गाँव की मिट्टी, रिश्तों की गर्माहट और अपनों के स्नेह की ओर लौटने की भावनात्मक पुकार है। शहर की भागदौड़ में छूट गए गाँव, बूढ़े माता-पिता और सूने खलिहानों की याद मन को बार-बार अपनी जड़ों की ओर खींचती है। कविता बताती है कि गाँव में रिश्ते दिखावे से नहीं, बल्कि विश्वास और प्रेम से निभाए जाते हैं, जहाँ सुख-दुख बाँटकर जीवन जिया जाता है। पीपल, बरगद और आम की छाँव, शुद्ध हवा और मिट्टी का सहज स्पर्श उस आत्मीय सुख का एहसास कराते हैं, जो कहीं और दुर्लभ है।
उज्जैन। हिंदी पखवाड़े के अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय की हिंदी अध्ययनशाला एवं ललित कला अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी हिंदी भाषा और साहित्य में करियर की नई दिशाएँ विषय पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि वक्ता नागपुर विश्वविद्यालय, नागपुर के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मनोज कुमार…
मैं सूखी लकड़ी हूं, जीवन में हितकारी और हर रूप में कल्याण फैलाने वाली। मैं शिव के मस्तक पर सजती हूं, कृष्ण की बांसुरी की तान में झूलती हूं, घरों में झूले और पलनों का आधार बनती हूं, और रोगियों का उपचार भी करती हूं। हर कदम पर मेरी उपस्थिति है—सृष्टि, श्रद्धा और जीवन के हर पहलू में। यही मेरी शक्ति और पहचान है।
प्रेम मेरे लिए कभी प्रश्न नहीं रहा।
मैंने देखा है तृणों को ओस की बूँदों को थामते हुए,
नन्हें जीवों को अपनी माँ की खोज में भटकते हुए,
धरती को तपिश में बादलों के लिए तड़पते हुए,
और पतझड़ को बसंत की याद में बिलखते हुए।
मेरे लिए तो यही है प्रेम की सबसे संजीदा कहानी जहाँ पीड़ा भी करुणा में ढल जाती है,
और आँसू भी कविता बनकर बह निकलते हैं।
यह कविता जीवन में प्रतीक्षा की गहराई को उजागर करती है। इसमें मनुष्य के उस भाव को चित्रित किया गया है जहाँ वह प्रकृति या ईश्वर की अदृश्य उपस्थिति को महसूस करता है—एक ऐसा विश्वास जो जीवन को समेटता है, उसे संपूर्णता देता है। प्रतीक्षा केवल किसी घटना की नहीं, बल्कि उन सूक्ष्म संवेदनाओं, विरासत की प्रतिध्वनियों और जीने के अनगिनत रंगों की है। यह प्रतीक्षा जीवन की हर ध्वनि, रूप, पहचान और संबंध को आत्मसात करने की है, जिसमें प्रकृति और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का अंश समाहित हो। कविता कहती है कि सच्ची प्रतीक्षा वही है, जिसमें जीवन और ब्रह्मांड के साथ एकत्व का अहसास जुड़ा हो।
कभी शब्द कविता का रूप लेकर बहती है, तो कभी कहानी का रूप धरकर जीवन की झलकियाँ दिखाती है। कविता भावनाओं की नदी है — कभी आँसू की बूँदों सी, तो कभी मुस्कान की किरणों सी। हर पंक्ति में कोई सपना छुपा होता है, हर बिंब में कोई अनकहा एहसास।वहीं कहानी जीवन की लहर है — उतार-चढ़ाव से भरी हुई। पात्रों के माध्यम से समय और परिस्थितियाँ आकार लेती हैं। कभी यह तूफान की तरह सबकुछ झकझोर देती है, तो कभी सुबह की पहली रोशनी की तरह उम्मीद जगाती है।
कविता मन की भाषा है, आत्मा की धड़कन है। कहानी अनुभव की अभिव्यक्ति है, जीवन का दर्पण है। कविता विचारों का सूरज है, और कहानी अनुभूति की चाँदनी। कविता दिल को सुकून देती है, जबकि कहानी दिशा और सीख देती है।