एक प्रतीक्षा…

यह कविता जीवन में प्रतीक्षा की गहराई को उजागर करती है। इसमें मनुष्य के उस भाव को चित्रित किया गया है जहाँ वह प्रकृति या ईश्वर की अदृश्य उपस्थिति को महसूस करता है—एक ऐसा विश्वास जो जीवन को समेटता है, उसे संपूर्णता देता है। प्रतीक्षा केवल किसी घटना की नहीं, बल्कि उन सूक्ष्म संवेदनाओं, विरासत की प्रतिध्वनियों और जीने के अनगिनत रंगों की है। यह प्रतीक्षा जीवन की हर ध्वनि, रूप, पहचान और संबंध को आत्मसात करने की है, जिसमें प्रकृति और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का अंश समाहित हो। कविता कहती है कि सच्ची प्रतीक्षा वही है, जिसमें जीवन और ब्रह्मांड के साथ एकत्व का अहसास जुड़ा हो।

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कविता और कहानी

कभी शब्द कविता का रूप लेकर बहती है, तो कभी कहानी का रूप धरकर जीवन की झलकियाँ दिखाती है। कविता भावनाओं की नदी है — कभी आँसू की बूँदों सी, तो कभी मुस्कान की किरणों सी। हर पंक्ति में कोई सपना छुपा होता है, हर बिंब में कोई अनकहा एहसास।वहीं कहानी जीवन की लहर है — उतार-चढ़ाव से भरी हुई। पात्रों के माध्यम से समय और परिस्थितियाँ आकार लेती हैं। कभी यह तूफान की तरह सबकुछ झकझोर देती है, तो कभी सुबह की पहली रोशनी की तरह उम्मीद जगाती है।
कविता मन की भाषा है, आत्मा की धड़कन है। कहानी अनुभव की अभिव्यक्ति है, जीवन का दर्पण है। कविता विचारों का सूरज है, और कहानी अनुभूति की चाँदनी। कविता दिल को सुकून देती है, जबकि कहानी दिशा और सीख देती है।

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अहसासों के कतरन…

हम अपने आप में बस एक पानी की बूँद जैसे हैं। कभी मिट्टी पर गिरकर उसमें समा जाते हैं, तो कभी किसी पत्ते पर टिककर उसकी शोभा बढ़ाते हैं। और जब लहरों से मिलते हैं, तो खुद सागर का रूप ले लेते हैं। हमारी पहचान इस पर नहीं है कि हम कौन हैं, बल्कि इस पर है कि हम किससे जुड़ते हैं।

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