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5 और ट्रेनों में तत्काल टिकट के लिए लगेगा ओटीपी

भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी
आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है. इसी क्रम में सेंट्रल रेलवे की ५ और ट्रेनों में यह नई व्यवस्था १९ दिसंबर २०२५ से लागू की जा रही है.भारतीय रेलवे तत्काल टिकट बुकिंग प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए चरणबद्ध तरीके से नया ओटीपी आधारित प्रमाणीकरण सिस्टम लागू कर रही है.

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अकेली महिला की उदास अभिव्यक्ति – हिज्र और दर्द को दर्शाती हिंदी ग़ज़ल इमेज

हिज्र, सब्र और बदलते रिश्ते

यह ग़ज़ल सिर्फ मोहब्बत की कहानी नहीं, बल्कि खुद से मिलने का एक सफर है। इसमें हिज्र का दर्द है, सब्र की तपिश है और बदलते रिश्तों की कड़वी सच्चाई भी।

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हिंदी पर बिंदी

हम सभी मिलकर हिंदी को अपना अत्यंत महत्वपूर्ण भाषा बनाना चाहते हैं। केवल अंग्रेज़ी के सहारे हमारा देश नहीं चमक सकता, इसलिए हमें हिंदी को आगे लाना होगा। आज से हम अपने सभी कार्य हिंदी में करेंगे और इसे देश की सर्वश्रेष्ठ पहचान दिलाएंगे। जब हम सभी हिंदी में संवाद करेंगे और अपने काम इसी भाषा में करेंगे, तभी देश का विकास वास्तविक रूप से संभव होगा। यह हमारा दृढ़ संकल्प है कि अंग्रेज़ी को राजभाषा मानने के बजाय हम हिंदी को अपनाएँगे और इसे सभी के बीच फैलाएँगे।

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लव यू….टेक केयर

शायद तुम्हें लगता है… मैं मज़ाक करता हूँ, छेड़ता हूँ… पर सच्चाई ये है… मैं खुद को तुम्हारे शब्दों में सहेज कर रखता हूँ। मैं तुम्हारे दोस्त में माँ की ममता पाता हूँ, बहन की फिक्र पाता हूँ… और दिल के किसी सबसे कोमल कोने में एक ऐसी प्रेमिका का एहसास करता हूँ… जो कभी मिली नहीं, पर हमेशा पास रही।”

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पुणे: प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज pmc building

पुणे: प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना बढ़ाने का प्रस्ताव खारिज

पुणे नगर निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स अभय योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। मनपा आयुक्त नवल किशोर राम ने स्पष्ट किया कि मार्च के अंतिम 15 दिनों में विशेष प्रॉपर्टी टैक्स वसूली अभियान चलाया जाता है, इसलिए योजना की अवधि बढ़ाना उचित नहीं होगा। कांग्रेस गुटनेता द्वारा योजना बढ़ाने की मांग के बावजूद प्रशासन ने इसे स्वीकार नहीं किया

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माँ अपनी बेटी को मासिक धर्म के बारे में समझाते हुए, जागरूकता और स्नेह का भाव

मासिक धर्म: एक सम्मान

डॉ. रुपाली गर्ग, मुंबई मासिक धर्म चक्र, जिसे सामान्य भाषा में पीरियड्स कहा जाता है, हर महिला के जीवन की एक स्वाभाविक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। यह प्रकृति द्वारा स्त्री को दी गई वह जैविक व्यवस्था है, जो उसके शरीर के स्वास्थ्य और सृजन क्षमता से जुड़ी होती है। फिर भी आज भी समाज के…

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जीवन एक संगीत

जीवन एक मधुर संगीत की तरह है, जिसमें सुख और दुःख उसके स्वरों की भाँति आते-जाते रहते हैं। संयम, विश्वास और परहित की भावना से भरा यह जीवन, गीता के ज्ञान को आत्मसात कर हर भव से पार हो सकता है। जब मन ईर्ष्या और लोभ से मुक्त होकर आशा, ममता और सत्य को अपनाता है, तब जीवन स्वयं एक संगीतमय चमन बन जाता है।

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चरैवेति का अर्थ

चरैवेति – चलना मनुष्य का धर्म है। घुमक्कड़ी केवल यात्रा नहीं, बल्कि जिज्ञासा, अनुभव और आत्मशक्ति का मार्ग है। आदिम मनुष्य से लेकर आधुनिक घुमक्कड़ों तक, हर कदम हमें प्रकृति, समाज और संस्कृति से जोड़ता है। यही जिज्ञासा हमें नई कल्पनाओं और अंतहीन संभावनाओं की ओर ले जाती है।”

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बालकनी में बैठी एक महिला अपनी दिवंगत माँ को याद करते हुए भावुक संस्मरण लिख रही है, पीछे रात का शांत वातावरण दिखाई दे रहा है।

“हर हिस्से की गूँज है माँ”

माँ केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि हमारे अस्तित्व की सबसे गहरी गूँज होती है। “हर हिस्से की गूँज है माँ” एक बेटी की भावुक स्मृतियों से बुना गया ऐसा संस्मरण है, जिसमें माँ के प्रेम, अनुशासन, त्याग, संवेदनाओं और बिछड़ने के दर्द को बेहद आत्मीयता से व्यक्त किया गया है। यह लेख हर उस व्यक्ति के दिल को छू जाएगा, जिसने अपनी माँ के स्नेह को महसूस किया है।

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लेखन मेज़ पर बैठे कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद, पृष्ठभूमि में लमही गाँव और उनकी साहित्यिक विरासत को दर्शाता यथार्थवादी दृश्य।

ये कैसा दिवस?

हर वर्ष हम माता-पिता दिवस मनाते हैं, हिंदी दिवस मनाते हैं, और इसी तरह कई अन्य दिवस भी मनाते हैं। इन्हीं में एक दिन हम कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद का जन्म दिवस भी मना लेते हैं। फिर सब कुछ समाप्त। क्या एक दिन का स्मरण उनके सम्मान के लिए पर्याप्त है? हम कभी यह सोच भी नहीं पाते कि जिस तरह बंगाल ने रवींद्रनाथ टैगोर के गीत, संगीत, कला और साहित्य को न केवल सहेज कर रखा है, बल्कि उसे अपनी जीवनशैली में आत्मसात किया है — उसी तरह हमें भी अपने साहित्यकारों को सम्मान देना चाहिए। बंगाल का समाज अपने बच्चों को, आधुनिक होते परिवेश में भी, रवींद्रनाथ के प्रति सम्मान भाव से परिचित कराता है। समय-समय पर उनके सम्मान में आयोजन होते हैं।

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