मैं लिखने बैठी हूँ – भावनाओं और रचनात्मकता पर आधारित हिंदी कविता

मैं लिखने बैठी हूँ

“मैं लिखने बैठी हूँ” एक भावनात्मक हिंदी कविता है जिसमें कवयित्री अपने मन में उमड़ते विचारों, जीवन के अनुभवों, प्रेम, प्रकृति और स्मृतियों को शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता आत्मा की आवाज़ और संवेदनाओं की गहराई को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करती है।

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महिदपुर रोड के एक मंदिर परिसर में संतोष विश्वकर्मा श्रद्धालुओं के साथ खड़े, पारंपरिक परिधान में, सेवा और समर्पण का प्रतीक दृश्य

सेवा ही सबसे बड़ी साधना

महिदपुर रोड के समाजसेवी संतोष विश्वकर्मा (भूरा सेठ), जिन्हें लोग “टेम्पल मैन” के नाम से जानते हैं, अपनी गहरी धार्मिक आस्था और निस्वार्थ सेवाभाव के लिए पहचाने जाते हैं। मंदिरों के जीर्णोद्धार, नवदुर्गा महोत्सव के आयोजन और कांवड़ यात्राओं में उनका समर्पण समाज के लिए एक प्रेरणा है। उनका जीवन संदेश देता है कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें सेवा और विनम्रता का भाव हो।

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खंडहर महल

कभी ये महल रोशनी और रौनक से भरे रहते थे। उनकी दीवारों पर तस्वीरें मुस्कुराती थीं और झरोखों से सपनों की हवाएँ बहती थीं। लेकिन आज वही महल खामोश और वीरान खड़े हैं। उनकी दरारों में घास उग आई है और सन्नाटा इतना गहरा है कि बस हवा की गूंज सुनाई देती है, जैसे वक्त सब कुछ चुपचाप चुरा ले गया हो। जहाँ कभी कदमों की आहट और राग–रंग की महफ़िलें सजती थीं, वहाँ अब धूल और पत्थरों की चादर बिछी है। ये खंडहर सिर्फ टूटे पत्थर नहीं, बल्कि समय के साक्षी हैं, जो बताते हैं कि वैभव मिट जाता है, पर इतिहास हमेशा जीवित रहता है।

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भगवान गणेश की पीड़ा

भगवान गणेश की पीड़ा

ग्यारह दिनों तक मेरे भक्त मेरे दर्शन को तरसते रहे और मैं उनके प्रेम से अभिभूत था। परंतु विसर्जन के दिन जब बारह घंटों तक जल में खड़ा रहा, तब मैंने सच्चाई देखी।
मंडपों में लोग धक्का-मुक्की कर रहे थे, बहसबाजी कर रहे थे, आगे बढ़ने के लिए एक-दूसरे को गिरा रहे थे। सेवक भी अपना रोब दिखा रहे थे।
मैंने सोचा—पंडाल में नहीं तो क्यों न खुले आसमान और समुद्र की लहरों के बीच सबको समान रूप से दर्शन दूँ। वहाँ न कोई कतार, न कोई वीआईपी, न कोई भेदभाव। लेकिन… मेरे भक्तों ने वहीं भी मुझे याद दिला दिया कि इंसान ने भगवान को भी अपने बनाए हुए अमीर-गरीब और ऊँच-नीच के नियमों में बाँध दिया है।

मैं तो वही एकदंत गजानन हूँ—चाहे लालबाग में विराजमान रहूँ या किसी छोटे पंडाल में, या फिर गिरगांव चौपाटी की लहरों में।मेरे लिए सिर्फ एक ही चीज़ महत्वपूर्ण है—मन से की गई भक्ति। बाकी सब इंसानी दिखावा है।”**

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डिंडौरी के ग्रामीण क्षेत्र में एक घर के बाहर तैनात पुलिसकर्मी और लगी पुलिस टेप, जांच के दौरान खड़ी पुलिस गाड़ी और आसपास जुटे स्थानीय लोग.

मां का कत्ल, फिर लाश के बगल में नाबालिग बेटी से दरिंदगी

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले में सनसनीखेज और दर्दनाक हत्याकांड का एक मामला सामने आया है। एक महिला की उसके लिव-इन पार्टनर के छोटे भाई ने कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी। इसके बाद नशे में घर पहुंचे लिव-इन पार्टनर ने महिला की 14 वर्षीय नाबालिग बेटी से कथित तौर पर दुष्कर्म भी किया। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए।

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Elite international cyclists competing in Bajaj Pune Grand Tour 2026 on scenic Western Ghats route near Pune during UCI 2.2 road cycling race.

बजाज पुणे ग्रैंड टूर-2026 वैश्विक स्तर पर

बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 के जरिए भारत की पहली UCI 2.2 बहु-चरणीय रोड साइक्लिंग प्रतियोगिता का वैश्विक मंच पर भव्य आगाज हुआ है. 80 से अधिक देशों में सीधा प्रसारण और ओलंपिक क्वालिफिकेशन अंकों के साथ यह दौड़ भारतीय साइक्लिंग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है.

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 दर्द

वक्त ने हमसे कई अपने छीन लिए, वरना हमारा कारवां भी कभी बड़ा हुआ करता था। हमने भी कभी रेत पर सपनों के रंगों से शब्द लिखे थे, पर लहरों का जोर इतना था कि सब मिट गया। भयानक आंधियों में भी आसमान तो ठहरा रहा, मगर पंछियों की चोंच खाली थी। जिसे अपने हुनर पर पूरा भरोसा था, वही शहर की बिगड़ी हवा में गुम हो गया। जिस पेड़ ने जिंदगी भर छाँव दी, उसी पेड़ से उसने रिश्ता तोड़ लिया। जो हमेशा दूसरों की थालियाँ भरता रहा, आज उसकी अपनी थाली खाली है। अब उसने आसमान की फिक्र छोड़ दी है . बस ज़मीन को सिर पर उठाकर आगे बढ़ना सीख लिया है।

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चांदनी रात में फूलों से भरे बगीचे में नज़ाकत से चलती एक सुंदर स्त्री, चारों ओर महक और रोमांटिक वातावरण

इश्क़ का सुकून

यह ग़ज़ल मुहब्बत के नाज़ुक और खूबसूरत एहसासों को बेहद सलीके से प्रस्तुत करती है। इसमें प्रिय के रूप, उसकी अदाओं और उसके प्रभाव को प्रकृति के बिंबों के माध्यम से उकेरा गया है—जहाँ नज़ारे शरमा जाते हैं, फूल मदहोश हो जाते हैं और हवाएँ भी बेखुद हो उठती हैं। शायर के लिए प्रेम केवल भावना नहीं, बल्कि एक ऐसा आध्यात्मिक अनुभव है जो जीवन के सफर को उजालों और सुकून से भर देता है।

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पुरानी पुस्तकों, पांडुलिपियों और शब्दों के प्रतीकों के बीच विचारमग्न साहित्यकार का कलात्मक दृश्य, जो भाषा, समय और संस्कृति के गहरे संबंध को दर्शाता है।

लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त

प्रो. डॉ. मनु की कविता “लफ़्ज़ों की नसों में बहता हुआ वक़्त” शब्दों, अर्थों और उनकी ऐतिहासिक जड़ों की एक गहन साहित्यिक यात्रा है। यह रचना बताती है कि हर लफ़्ज़ अपने भीतर समय, संस्कृति और मानवीय अनुभवों का एक पूरा संसार समेटे रहता है।

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अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल पुणे उद्घाटन समारोह"

पेन, स्याही और शब्दों का महाकुंभ

बचपन से ही पेन और स्याही हर इंसान की जिंदगी का अहम हिस्सा रहे हैं। भावनाएं हों या विचार, जानकारी हो या कल्पना शब्दों के जरिए खुद को अभिव्यक्त करने का माध्यम यही लेखन उपकरण रहे हैं। इसी लेखन संस्कृति का उत्सव मनाने जा रहा है पुणे, जहां 10 और 11 जनवरी को अंतर्राष्ट्रीय पेन फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है।

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