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दयानंद महाविद्यालय में हिंदी उत्सव

उत्साह, गरिमा और रचनात्मक मंच की शुरुआत

लातूर से डॉ.मीना घूमे की रिपोर्ट

दयानंद कला महाविद्यालय, लातूर में “हिंदी दिवस” बड़े उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम हिंदी भाषा के महत्त्व, इसके विकास और वर्तमान समाज में इसकी प्रासंगिकता पर आधारित था। कार्यक्रम का आयोजन हिंदी विभाग द्वारा किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और महर्षि दयानंद सरस्वती की प्रतिमा वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथियों का स्वागत प्रधानाचार्य डॉ. शिवाजी गायकवाड़ द्वारा पुष्पगुच्छ और शॉल से किया गया। हिंदी विभाग के प्रमुख डॉ. प्रदीप सूर्यवंशी ने स्वागत भाषण में हिंदी भाषा की गरिमा, गौरव और उसके वैज्ञानिक स्वरूप पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर हिंदी विभाग की ओर से “नवचेतना” हिंदी साहित्य मंडल की स्थापना की घोषणा की गई, जो विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति के लिए एक सशक्त मंच प्रदान करेगा। इसमें अध्यक्ष एम.ए. हिंदी द्वितीय वर्ष की छात्रा मयुरी पाटील, उपाध्यक्ष एम.ए. हिंदी प्रथम वर्ष की छात्रा शेख सानिया तथा बारहवीं वर्ग की छात्रा श्रुती सूर्यवंशी, सचिव बी.ए. तृतीय वर्ष के छात्र वसंत कुलकर्णी और सहसचिव बी.ए. द्वितीय वर्ष की छात्रा तेजस पाटोळे, कोषप्रमुख एम.ए. द्वितीय वर्ष की शबनम शेख और ग्यारहवीं की दिक्षा साळुंके, संपर्क प्रमुख बारहवीं की संस्कृती समुद्रे, बी.ए. प्रथम वर्ष के छात्र निलेश वाघमारे, मिडिया प्रतिनिधी बी.ए. प्रथम वर्ष की मिसबा शेख और ग्यारहवीं की स्नेहा कांबळे तथा सदस्य के रूप में ज्ञानेश्वरी भिसे, बी.ए. द्वितीय वर्ष, प्रिया धवसे बी.ए. तृतीय वर्ष, जिशान शेख बी.ए. द्वितीय वर्ष, प्रिया राठोड बी.ए. द्वितीय वर्ष, प्रदीप खांडेकर बी.ए. द्वितीय वर्ष, स्वाती जाधव बी.ए. प्रथम वर्ष, श्रद्धा नागराळे ग्यारहवीं, प्रणव टेंकाळे, ओमकार कलवरे ग्यारहवीं, पायल काळे ग्यारहवीं आदि छात्रों का चयन किया गया।

प्रमुख अतिथि के परिचय की जिम्मेदारी डॉ. मीना घुमे ने पूरी की। मुख्य अतिथि श्री बजरंग पारिख (सुप्रसिद्ध हास्य-व्यंग कवि, नांदेड़) ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर एक विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा, “हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। आज के युग में हमें तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में भी हिंदी को सक्षम बनाना होगा।” उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार नई पीढ़ी में हिंदी लेखन और साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाई जा सकती है।

प्रधानाचार्य डॉ. शिवाजी गायकवाड़ ने अपने प्रेरणादायी भाषण में कहा, “हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी आत्मा की अभिव्यक्ति है। यह वह माध्यम है, जिससे हम अपनी संस्कृति, परंपरा और विचारों को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं। आज के वैश्विक युग में हमें हिंदी को आधुनिक संदर्भों में प्रस्तुत करते हुए इसकी गरिमा बनाए रखना है। दयानंद कला महाविद्यालय हमेशा से भारतीय भाषाओं और संस्कारों के संरक्षण के लिए कटिबद्ध रहा है। हिंदी दिवस हमें यही स्मरण कराता है कि हिंदी एक भाव है, भाषा से बढ़कर एक संस्कार है।”

कार्यक्रम में छात्रों ने भावनात्मक और प्रेरणात्मक कविताएँ प्रस्तुत कीं। नवनिर्वाचित अध्यक्ष मयुरी पाटील ने अपना मंतव्य रखा। इस कार्यक्रम में महाविद्यालय की उपप्राचार्य डॉ. अंजली जोशी, उपप्राचार्य डॉ. दिलीप नगरगोजे की प्रमुख उपस्थिति रही। हिंदी विभाग के सभी प्राध्यापकगण तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित थे। कार्यक्रम की सफलता के लिए प्रा. डॉ. वर्षा कांबळे, प्रा. डॉ. महारुद्र सिरसर, प्रा. सिद्धार्थ भालेराव, कर्मचारी प्रमोद मुगळे, गोदाम और सभी छात्रों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। कार्यक्रम के उद्घोषक डॉ. गोपाल बाहेती ने अपनी मीठी वाणी में कार्यक्रम का संचालन किया और छात्रों को हिंदी भाषा के प्रति अपने कर्तव्यों के वहन की प्रतिज्ञा दिलाई। समापन धन्यवाद ज्ञापन डॉ. शिवकांता सुरकुटे ने किया।

हिंदी दिवस का यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए न केवल ज्ञानवर्धक रहा, बल्कि उनमें हिंदी के प्रति आत्मीयता और सम्मान की भावना भी जागृत हुई। महाविद्यालय ने यह संदेश दिया कि “हिंदी एक भाव है, भाषा से बढ़कर एक संस्कार है।”

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