Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
सूखी नदी, कूड़े के पहाड़ और प्लास्टिक से ढके शहर को देखते हुए एक लेखिका डायरी में लिखती हुई, पर्यावरणीय चिंता और संवेदनशीलता को दर्शाता दृश्य।

मैं लिखूँ

जब प्रकृति घायल हो, नदियाँ सूख जाएँ, शहर प्लास्टिक से ढक जाएँ और चारों ओर पर्यावरणीय संकट दिखाई दे, तब संवेदनशील मन चुप नहीं रह पाता। ‘मैं लिखूँ’ कविता उसी बेचैनी, जिम्मेदारी और परिवर्तन की उम्मीद का सशक्त स्वर है।

Read More
आईने के सामने खड़ी एक भारतीय महिला, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच स्वयं की पहचान और आत्ममंथन में खोई हुई दिखाई दे रही है।

स्त्री : एक मुलाकात

‘स्त्री – एक मुलाकात’ एक मार्मिक कविता है, जो उस स्त्री की कहानी कहती है जो परिवार, बच्चों और जिम्मेदारियों को निभाते-निभाते स्वयं से दूर हो जाती है। यह कविता स्त्री के त्याग, उसकी अनदेखी इच्छाओं और अपनी पहचान से पुनः मिलने की आकांक्षा को संवेदनशीलता से व्यक्त करती है।

Read More
नीली जुबान और जामुन

नीली जुबान….!

जामुन की नीली जुबान, बचपन की मासूम खुशियां, आईने के सामने की शरारतें और सेहत से जुड़ी अनमोल बातें यह लेख जामुन के स्वाद, यादों और उसके औषधीय गुणों को बेहद रोचक अंदाज में प्रस्तुत करता है।

Read More
सांझ के समय गुलमोहर के पेड़ के नीचे रखे रजनीगंधा के फूल, प्रेम और रूहानी जुड़ाव का प्रतीक।

गुलमोहर और रजनीगंधा

क्या प्रेम केवल साथ रहने का नाम है, या किसी की खुशबू की तरह मन में हमेशा बने रहने का एहसास? ‘गुलमोहर और रजनीगंधा के नाम’ एक रूहानी और रोमांटिक पत्र है, जो प्रेम को रंगों, खुशबू और आत्मिक जुड़ाव के माध्यम से व्यक्त करता है।

Read More
रात के समय मोबाइल में पुराने संदेश पढ़ता एक युवक, खिड़की के बाहर देखते हुए बीते रिश्ते को याद करता हुआ।

अधूरी बातें…

कुछ रिश्ते टूटते नहीं, बस धीरे-धीरे उनकी आवाज़ें बंद हो जाती हैं। ‘अधूरी बातें’ एक ऐसी भावुक कहानी है, जिसमें दो लोग एक-दूसरे को समझते हैं, सपनों को उड़ान देते हैं, लेकिन जीवन की राहों में कहीं बिछड़ जाते हैं। यह कहानी प्रेम, प्रतीक्षा और खामोशियों की अनकही दास्तान है।

Read More
डूबते सूरज के बीच एक सुनसान रास्ते पर खड़ा व्यक्ति, बीते समय और छूटे लोगों को याद करते हुए।

वक्त का पहिया…

वक्त लौटकर आता हुआ दिखाई देता है, लेकिन उसके साथ बिछड़े लोग और बीते पल कभी वापस नहीं आते। ‘वक्त का पहिया’ समय, स्मृतियों और जीवन में आए बदलावों पर आधारित एक गहरी और भावुक हिंदी कविता है, जो पाठक को अपने अतीत से रूबरू कराती है।

Read More
मायके के दरवाज़े पर खड़ी एक भावुक बेटी, माँ की तस्वीर को देखते हुए बीते दिनों को याद करती हुई।

पराया मायका

माँ के रहते मायका सिर्फ एक घर नहीं, बल्कि प्यार, अपनापन और प्रतीक्षा का दूसरा नाम होता है। लेकिन माँ के जाने के बाद वही घर क्यों पराया-सा लगने लगता है? ‘पराया मायका’ एक ऐसी भावुक लघुकथा है, जो हर बेटी के दिल में छिपे उस खालीपन को शब्द देती है, जिसे केवल माँ की अनुपस्थिति ही पैदा कर सकती है।

Read More
वृद्ध माता-पिता की सूनी आँखें अपने बच्चों की राह निहारते हुए – माता-पिता की उपेक्षा और अकेलेपन पर भावपूर्ण हिंदी कविता।

सूनी आँखें

सूनी आँखें” एक मार्मिक हिंदी कविता है, जो वृद्ध माता-पिता के अकेलेपन, उपेक्षा और उनके मन में अपने बच्चों के प्रति अटूट प्रेम को भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है। यह कविता हमें याद दिलाती है कि माता-पिता की सेवा और सम्मान ही सच्चा धर्म और सबसे बड़ा मानवीय कर्तव्य है

Read More
भीड़भाड़ वाली सड़क पर शाम के समय अकेला चलता एक भारतीय व्यक्ति, जिसके चेहरे पर गहरी सोच और तन्हाई झलक रही है। उसके आसपास लोग अपनी-अपनी दुनिया में व्यस्त हैं, जबकि वह सच और इंसानियत के रास्ते पर अकेला खड़ा दिखाई देता है।

दुनिया की दुनियादारी

यह कविता उस इंसान की आवाज़ है जो झूठ और स्वार्थ से भरी दुनिया में भी सच, संवेदना और इंसानियत को बचाए रखने की कोशिश करता है। तन्हाई, संघर्ष और उम्मीद के बीच जीवन का सच्चा चेहरा दिखाती एक मार्मिक रचना।

Read More
1994 के एक भारतीय मोहल्ले की छत पर खड़ी एक किशोर लड़की हाथ में छोटी-सी चिट्ठी लिए शर्माते हुए सामने की छत पर खड़े एक लड़के की ओर देख रही है। दोनों छतों पर सूखते कपड़े, पानी की टंकी और दूरदर्शन के पुराने एंटीना दिखाई दे रहे हैं। ढलते सूरज की सुनहरी रोशनी पूरे दृश्य को मासूम पहली मोहब्बत और पुरानी यादों के भाव से भर रही है।

छत वाला प्रेम

सन् 1994 का वह दौर, जब प्रेम के पास न मोबाइल था, न सोशल मीडिया। बस शाम की छतें, तिरछी निगाहें, पत्थर में बंधी चिट्ठियाँ और एक अधूरी मोहब्बत, जो बरसों बाद भी यादों की छत पर जाड़े की धूप बनकर ठहरी रहती है।

Read More