Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers

नीली जुबान….!

नीली जुबान और जामुन

कीर्ति राणा

ऐसा हो ही नहीं सकता कि सड़क किनारे जामुन बेचने वालों के पास से गुजरें और बचपन याद न आए। बचपन में तो जामुन के गुण पता नहीं थे। तब इसके स्वाद का तुरापन पसंद नहीं आता था, लेकिन खाने के बाद जुबान काफी देर तक नीली रहती है, इस लालच में खा लेते थे।

खाने के बाद दौड़कर घर में लगे कांच के पास ऊंची एड़ियां करके उसमें जुबान देखते। नीली जुबान वाली वह खुशी गोल्ड मेडल मिलने जैसी होती थी। फिर आपस में एक-दूसरे के सामने जुबान निकालकर बताते थे, “मेरी जुबान तेरी जुबान से ज्यादा नीली है।” थोड़ी-थोड़ी देर बाद फिर कांच में जाकर देखते कि अभी भी नीली है या नहीं। रोटी खाने के बाद जुबान से वह नीला रंग भी चला जाता था।

कुछ ऐसा ही बर्फ वाली लाल और नारंगी रंग की कुल्फी खाते हुए होता था। उसे बार-बार होठों पर फेरते रहते थे और कहते, “देख, मैंने लिपिस्टिक लगाई है।” तब भी होड़ लगी रहती थी कि किसके होंठ ज्यादा लाल हैं।

अभी बाजार में जामुन की बहार आई हुई है। क्या गजब संयोग है! शुगर पेशेंट गुलाब जामुन खा ले तो शुगर बढ़ने का खतरा, और इलाज कराने जाओ तो डॉक्टर भी गोली लिखने के साथ ही जामुन खाने की सलाह देना नहीं भूलते।

हम चिंता करें या न करें, प्रकृति तो हमारी चिंता करती ही रहती है। बारिश के इस मौसम में दो महीने तक जामुन खाने में कोई हर्ज नहीं है। सलाह तो यह भी दी जाती है कि इसकी गुठली भी फायदेमंद है। मतलब, जामुन खाने के बाद गुठली धोकर एकत्र कर ली जाए, सुखा ली जाए और मिक्सी में पीसकर उसका पाउडर बना लिया जाए। फिर रोज सुबह खाली पेट एक गिलास पानी में एक चम्मच पाउडर घोलकर पी लें, तो शुगर कंट्रोल में फायदा मिलता है।

कौन गुठलियां एकत्र करे, पीसे और छाने! इस झंझट से बचने का आसान रास्ता यह भी है कि मारोठिया बाजार में जड़ी-बूटी की दुकानों पर जामुन की गुठली का पाउडर मिल जाता है।

अपन तो लगभग रोज ही दिन की शुरुआत, योग क्लास से आने के बाद, जामुन सेवन से ही कर रहे हैं। 30 से 50 रुपये का पाव भर जामुन आराम से दो दिन चल जाता है।

यह भी पढ़ा है कि शुगर वालों के लिए जामुन रामबाण है। साथ ही, जामुन की लकड़ी कुएं या पानी की टंकी में डाल दी जाए तो पानी की शुद्धता बेहतर हो जाती है।

एक तरफ जामुन से नीली हुई जुबान है, तो दूसरी तरफ ज्योतिष और समुद्र शास्त्र में काली जुबान का जिक्र है। सही भी तो है, घर के किसी सदस्य की कही बात यदि सही हो जाए तो हम फटाक से कह देते हैं, “तेरी काली जुबान है क्या?”

काली जुबान यानी नकारात्मक वाक्-सिद्धि या कठोर वाणी वाला व्यक्ति। समुद्र शास्त्र के जानकार बताते हैं कि यदि किसी व्यक्ति की जीभ सामान्य से अधिक काली या गहरी होती है, तो उसकी वाणी काफी कठोर मानी जाती है।

इन रचनाओं को अवश्य पढ़ें-

पुनर्मिलन
उसने कहा…
मैं लिखूँ
स्त्री : एक मुलाकात
नीली जुबान….!
गुलमोहर और रजनीगंधा
अधूरी बातें…
पराया मायका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *