
सुनीता माथुर, पुणे
बैंगलोर जाने वाली फ्लाइट क्रैश हो गई थी। राघव ऑफिस के काम से इसी फ्लाइट से बैंगलोर जा रहा था। फ्लाइट के क्रैश होने की खबर जैसे ही मिली, राघव की पत्नी प्रीति और राघव के मम्मी-पापा जोर-जोर से रोने लगे। अब क्या होगा? कुछ पता ही नहीं चल रहा था। प्लेन में कितने लोग मर गए और कितने बचे हैं, कोई जानकारी नहीं थी।
प्रीति मम्मी-पापा के साथ एयरपोर्ट पर जाती है। वहां चारों ओर भीड़ लगी हुई थी। लोग अपने-अपने प्रियजनों को ढूंढ रहे थे। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था। पता चला कि प्लेन में जाने वाले सभी लोग मर चुके थे और 20 यात्रियों का पता नहीं चल रहा था। लेकिन राघव का भी पता नहीं चला। राघव का सामान जरूर मिला था, जो उसके परिवार को सौंप दिया गया।
यह देखकर प्रीति और उसके मम्मी-पापा बहुत जोर-जोर से रोने लगे कि राघव शायद अब उनके बीच नहीं रहा।
परिवार वाले राघव का सामान लेकर दुःखी मन से घर आ गए, लेकिन उनके मन में यही चल रहा था कि राघव कहीं न कहीं जरूर मिलेगा, वह मरा नहीं है। देखते-देखते दो साल गुजर गए।
प्रीति की आज छुट्टी थी। प्रीति इंजीनियर थी, लेकिन वह पार्क में घूमने जरूर जाती थी। उस पार्क से उसे विशेष लगाव था। पार्क में जाते ही उसे राघव की याद आ जाती थी। राघव, उसका पति, भी इंजीनियर था।
इसी गार्डन से उनका पहला प्यार शुरू हुआ था। राघव और प्रीति पहली बार इसी गार्डन में मिले थे। बाद में उन्हें पता चला कि वे दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं। दोनों ने साथ में इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और दोनों की एक साथ नौकरी भी लग गई। सबकी सहमति से दोनों की शादी भी हो गई। राघव के मम्मी-पापा प्रीति को बहुत चाहते थे। राघव उनका इकलौता बेटा था।
प्रीति यह सब सोचते-सोचते बेंच पर बैठ जाती है। राघव की प्यार भरी बातें याद कर उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। इतने में प्रीति देखती है कि थोड़ी दूर की बेंच पर बिल्कुल राघव जैसा कोई बैठा हुआ माउथ ऑर्गन बजा रहा है।
प्रीति एकदम उसकी ओर आकर्षित हो जाती है और उसके संगीत के कारण उसकी ओर खिंची चली जाती है, क्योंकि राघव भी माउथ ऑर्गन बहुत अच्छा बजाता था। प्रीति की मीठी यादें ताजा हो जाती हैं। उसे लगता है जैसे वह राघव ही हो।
प्रीति दौड़ती हुई जब उसके पास जाती है, तो देखती ही रह जाती है। वह नौजवान बिल्कुल राघव जैसा दिख रहा था। बस, उसके बाल बहुत बड़े-बड़े थे, दाढ़ी बढ़ी हुई थी और वह अपने माउथ ऑर्गन को बजाने में व्यस्त था। उसने प्रीति को नहीं देखा।
सामने से एक आदमी दौड़ता हुआ आता है और बोलता है, “चलो, घर चलो। यहां क्यों बैठे हो?”
उस आदमी को देखकर प्रीति पूछती है, “आप कौन हैं? और यह आपका कौन लगता है?”
वह बताता है, “मैं एक किसान हूं। मेरा नाम श्यामू है। एक बार मैं खेती कर रहा था, तभी पता चला कि कोई आदमी बेहोशी की हालत में पड़ा है। जब मैं वहां गया, तो देखा कि इस आदमी की सांसें चल रही थीं। मैंने इनका इलाज कराया, लेकिन इनकी याददाश्त खो चुकी थी। इस इंसान को कुछ भी याद नहीं था। पता नहीं कहां से आया और क्या हुआ।
मैं इन्हें अपने घर ले गया और यह भी मेरे साथ खेती में हाथ बंटाने लगे। लेकिन यह गाना बहुत अच्छा गाते थे। सभी इन्हें घर में चाहने लगे। हमने कई बार पूछा भी कि कहां से आए हो और कौन हो, लेकिन यह आकाश की तरफ इशारा करते और रोने लगते। समझ नहीं आता था कि ऊपर देखकर क्यों रोने लगते हैं। शायद किसी प्लेन क्रैश से कोई आदमी बच गया होगा, यही हमने सोचा, लेकिन इन्हें कुछ याद नहीं था।”
यह सुनकर प्रीति राघव को पहचान जाती है और अपने पति से लिपटकर रोने लगती है।
“यह मेरे पति राघव हैं,” वह किसान से बोलती है। “इनके दाहिने हाथ की बाजू पर देखो, वहां ‘प्रीति’ लिखा होगा।”
जब किसान भाई ने उस इंसान के दाहिने हाथ की बाजू देखी, तो वह आश्चर्यचकित हो गया।
“हां, इसके हाथ पर ‘प्रीति’ लिखा है!”
प्रीति उस किसान से पूछती है, “आपको यह कब मिले थे?”
किसान भाई बोले, “दो साल पहले की बात है।”
अब तो प्रीति को पूरा विश्वास हो गया। उसने किसान भाई को दो साल पहले हुए प्लेन क्रैश की सारी घटना बताई।
“हमने तो यही सोच लिया था कि यह अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन भगवान की कृपा से आज यह हमें मिल गए हैं। हम इनका इलाज करवाएंगे और इनकी याददाश्त वापस जरूर लाएंगे।”
यह सुनकर किसान भाई ने कहा, “अगर यह आपके पति हैं, तो आप इनका इलाज करवाइए। हम मिलने आते रहेंगे।”
वह किसान राघव का हाथ प्रीति के हाथ में देकर चला जाता है। प्रीति खुश होकर राघव का हाथ पकड़कर घर की ओर चल देती है।
लेखिका के बारे में-
सुनीता माथुर
एक बहुआयामी साहित्यकार, स्क्रिप्ट राइटर, चित्रकार एवं रेडियो आर्टिस्ट हैं। आपने एम.ए. (फाइन आर्ट्स), बॉम्बे ड्रॉइंग डिप्लोमा तथा पी.एस.सी. एवं मिनी पी.एस.सी. की शिक्षा प्राप्त की है। टैक्सटाइल डिजाइनर और सेवानिवृत्त शासकीय अधिकारी के रूप में भी आपने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
कहानी, कविता, लेखन, चित्रकला, नृत्य एवं फ्लावर डेकोरेशन जैसे विविध क्षेत्रों में आपकी रचनात्मक प्रतिभा को अनेक पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए हैं। आपकी कहानियाँ और लेख देश की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं एवं समाचार-पत्रों में प्रकाशित होते रहे हैं। आपका कहानी-संग्रह ‘नई सुबह’ शुभदा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित हो चुका है।
आपको जयपुर से ‘मुंशी प्रेमचंद साहित्य रत्न सम्मान’, नेपाल से ‘अंतर्राष्ट्रीय हिंदी मित्र सम्मान’ एवं ‘विश्व काव्य रत्न सम्मान’ सहित अनेक साहित्यिक सम्मानों से अलंकृत किया जा चुका है।
संवेदनशील लेखन, मानवीय मूल्यों और जीवन के विविध रंगों को शब्दों में उकेरने की आपकी अद्भुत क्षमता आपको समकालीन हिंदी साहित्य की एक सशक्त और सम्मानित हस्ताक्षर बनाती है।
