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स्टेशन पर विदा होते राघव और रिद्धिमा, आँखों में प्रेम और बिछड़ने की नमी

वो तीन दिन

तीन दिन, एक शहर और उम्र भर की यादें” राघव और रिद्धिमा की ऐसी भावनात्मक प्रेम कहानी है, जिसमें एक छोटी-सी मुलाकात जीवनभर की स्मृतियों में बदल जाती है। अदरक वाली चाय, मेहंदी में छिपा नाम, छत पर बिताई तारों भरी रात और स्टेशन पर बिछड़ने का दर्द ये छोटे-छोटे पल उनके रिश्ते की सबसे बड़ी पूंजी बन जाते हैं। यह कहानी बताती है कि सच्चे रिश्तों में दूरी मायने नहीं रखती, क्योंकि कुछ मुलाकातें समय से नहीं, दिल से जुड़ी होती हैं।

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बारिश में एक लाल छाते के नीचे हाथ थामे चलते भारतीय प्रेमी युगल का यथार्थवादी और भावनात्मक दृश्य, रोमांटिक हिंदी प्रेम कहानी का प्रतीक।

एक छाते तले

एक लाल छाता, बरसती बारिश और दो दिलों का अनकहा साथ। यह रोमांटिक हिंदी कहानी प्रेम, विश्वास और उन एहसासों को शब्द देती है, जहाँ बिना कुछ कहे भी दिल एक-दूसरे को समझ लेते हैं और भीड़भरी दुनिया में अपना घर एक-दूसरे के दिलों में खोज लेते हैं।

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पुनर्मिलन: दो साल बाद पार्क में मिला प्लेन क्रैश में खोया पति

पुनर्मिलन

कभी-कभी प्रेम उम्मीद का दूसरा नाम होता है। प्लेन क्रैश में मृत मान लिया गया राघव, दो साल बाद अपनी पत्नी प्रीति को उसी पार्क में मिलता है, जहां उनके प्यार की शुरुआत हुई थी। यह कहानी बिछड़ने, इंतजार और चमत्कारिक पुनर्मिलन की एक भावनात्मक यात्रा है।

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क़तर के समुद्र किनारे सूर्यास्त के बीच खड़ी एक भारतीय महिला, जो तन्हाई, यादों और प्रेम की नई उम्मीदों में खोई हुई है।

चलते रहने का नाम ज़िंदगी

क़तर में अकेली ज़िंदगी जी रही मान्या परिवार की जिम्मेदारियों के बीच खुद को भूल चुकी थी। तन्हाई, पुराने प्रेम की स्मृतियाँ और नए रिश्ते के डर के बीच जब जीवन ने उसे प्रेम का दूसरा अवसर दिया, तब उसे समझ आया कि चलते रहने का नाम ही ज़िंदगी है।

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एक महिला रात में टीवी देखते हुए अतीत की यादों में खोई हुई है, उसके चेहरे पर हैरानी और भावनात्मक तनाव साफ दिखाई दे रहा है।

अब क्या होगा -3

एक सस्पेंस और इमोशनल हिंदी कहानी रीता मिश्रा तिवारी भागलपुर लाइट ऑन करने पर देखा तो दरवाजे पर गिरी पड़ी थी शेफाली..!आवाज़ लगाई पर कोई हरकत नहीं। पानी का छींटा मारा..!” क्या कर रही पागल हो गई है..जगा दिया कितना प्यारा सपना देख रही थी”हड़बड़ा कर उठ बैठी शेफाली। “थैंक गॉड मेरी तो जान ही…

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चन्दन की चांदनी

चांदनी का यह पहला करवा चौथ था, लेकिन उसका पति चन्दन उसके साथ नहीं था। शादी को अभी साल भी पूरा नहीं हुआ था और चंदन को हेड ऑफिस के बुलावे पर अपनी ड्यूटी पर जाना पड़ा। उदास चांदनी को सासुमा ने प्यार से समझा-बुझाकर नई लाल सिल्क साड़ी और गहने दिलवाए।
जब चांद निकला, चांदनी ने छलनी से उसे देखा और अपने पति की याद में मनुहार की। तभी सही वक्त पर वीडियो कॉल आया — चंदन मुस्कुराते हुए सामने था। खुशी और प्यार से भरी यह पल सभी सुहागिनों के लिए भी आनंदमय था। सासू मां ने आशीर्वाद देते हुए कहा, “इन्हें किसी की नज़र न लगे, इनके बीच अटूट प्यार बना रहे।”

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