साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे (इनपुट-सचिन भंडारी)
महिदपुर रोड. महिदपुर रोड स्थित राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के लिए विराजित परम पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब ने गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में राग और द्वेष ही अनेक दुखों का कारण बनते हैं. राग को दूर करना है तो मृत्यु का चिंतन करें और द्वेष को समाप्त करना है तो प्रत्येक प्राणी के प्रति प्रेम, मैत्री, स्नेह, करुणा, ममता और वात्सल्य का भाव रखें.
उन्होंने कहा कि संसार में कोई भी संबंध शाश्वत नहीं है. जो वस्तु जहां से आई है, उसे अंततः वहीं जाना है. जिस प्रकार मिट्टी का खिलौना मिट्टी में मिल जाता है, उसी प्रकार मनुष्य का शरीर भी नश्वर है. शरीर में आत्मा के रहने तक ही संसार के लोग अपने लगते हैं. आत्मा के शरीर से निकलने के बाद कोई भी अपना नहीं रहता, केवल परमात्मा ही वास्तविक सहारा हैं. साध्वी जी ने कहा कि जहां संबंध और अपनत्व होगा, वहीं प्रतिक्रिया भी होगी. जिस व्यक्ति या वस्तु से जितना अधिक लगाव होगा, उसके सुख-दुख का प्रभाव भी उतना ही अधिक महसूस होगा. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अपना बच्चा रोता है तो दिल में दर्द होता है, जबकि दूसरे का बच्चा रोता है तो केवल सिर में दर्द होता है. यही संबंध और लगाव की गहराई को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि संसार के सभी संबंध स्वार्थ से जुड़े हैं. मनुष्य को इन संबंधों की वास्तविकता समझते हुए राग-द्वेष से ऊपर उठने का प्रयास करना चाहिए. जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ने के लिए राग और द्वेष का त्याग आवश्यक है.

‘आज का दिन जीवन का अंतिम दिन मानकर जिएं’
साध्वी जी ने ‘टुडे इज लास्ट’ की भावना को समझाते हुए कहा कि मनुष्य को यह सोचकर जीना चाहिए कि आज उसके जीवन का अंतिम दिन है. परमात्मा की कृपा से हमें आज का दिन देखने का अवसर मिला है, इसलिए इसे परमात्मा की शरण में जाकर सार्थक बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि द्वेष को दूर करने के लिए प्राणी मात्र के प्रति प्रेम, स्नेह, करुणा, ममता और वात्सल्य का भाव रखना जरूरी है. मैत्री भाव से मनुष्य के भीतर की कटुता कम होती है और आत्मिक शांति की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग खुलता है.
सिद्धि तप और आयंबिल तप की आराधना जारी
महिदपुर रोड जैन समाज के मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया कि गुरुवार को साधार्मिक भक्ति प्रभावना एवं संपूर्ण दिवस का लाभ रमेशचंद्र, अमित कुमार और अंकेश कुमार कोचर मावा वाला परिवार ने लिया. वहीं प्रवचन प्रभावना का लाभ अशोक कुमार और रौनक कुमार वोरा परिवार, भाटपचलाना द्वारा लिया गया.

नगर में सिद्धिदायक सिद्धि तप की आराधना भी जारी है, जिसमें अनेक आराधक तपस्या कर रहे हैं. चातुर्मास के प्रारंभ से आयंबिल तप की लड़ी भी चल रही है. प्रतिदिन श्रावक-श्राविकाओं द्वारा आयंबिल तप किया जा रहा है, जिसका बहुमान जैन श्री संघ एवं चातुर्मास समिति द्वारा किया जा रहा है.
प्रतिदिन हो रहे मंगलकारी प्रवचन
पूज्य साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज साहब के मंगलकारी प्रवचन प्रतिदिन सुबह 9:15 बजे से 10:30 बजे तक श्री राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में हो रहे हैं. प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु जिनवाणी का श्रवण कर धर्म लाभ प्राप्त कर रहे हैं.
