‘जहां रिलेशन होगा, वहीं रिएक्शन होगा’
महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.

महिदपुर रोड के राजेंद्र सुरि ज्ञान मंदिर में चातुर्मास के दौरान साध्वी डॉ. अमृतरसा श्री जी महाराज ने राग-द्वेष से मुक्त होने, मैत्री भाव अपनाने और जीवन को सार्थक बनाने का संदेश दिया.
नागदा में आयोजित धर्मसभा में मुनिराज श्री डॉ. संयमरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि मनुष्य जन्म चिंतामणि रत्न के समान दुर्लभ है। उन्होंने जिनेंद्र भक्ति, वैरभाव त्याग और आत्मा को निर्मल बनाने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए धर्म को जीवन का वास्तविक मार्ग बताया।
पुण्योदय के योग से हमें परमात्मा का जिन शासन और जैन कुल प्राप्त हुआ है. मनुष्य भव को सफल बनाने के लिए केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि श्रद्धा और विधिपूर्वक अष्टप्रकारी पूजा के साथ धर्म आराधना आवश्यक है. देव, गुरु और धर्म के प्रति जागृत भाव ही जीवन को सही दिशा देते हैं.
पुण्यसम्राट श्रीमद् विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. के दीक्षा दिवस पर ज्ञान मंदिर में दिनभर गुरु भक्ति, प्रवचन, तप, जाप और महाआरती के आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.
महिदपुर रोड स्थित श्री राजेंद्र सूरी ज्ञान मंदिर में आयोजित धर्मसभा में पूज्य साध्वी चारित्र कलाश्री जी म.सा. ने जिन शासन को जीवन की सच्ची राह बताते हुए भगवान महावीर की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला।