महिदपुर रोड की सड़कों पर उमड़ा जनसमूह, मुस्लिम और सिख समाज ने किया तपस्वियों का सम्मान, 62 तपस्वियों की तपस्या पूर्णाहुति पर निकला भव्य वरघोड़ा, करीब 3000 लोग बने साक्षी

सुरेश परिहार, संपादक, लाइव वायर न्यूज़, पुणे
महिदपुर रोड-जैन समाज की तप-आराधना की पूर्णाहुति के अवसर पर महिदपुर रोड में भव्य वरघोड़ा निकाला गया. नगर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होकर गुजरे इस वरघोड़े में करीब 3000 लोगों की सहभागिता रही. तप, त्याग और संयम के इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न समाजों की भागीदारी ने इसे सामाजिक सद्भाव और सर्वधर्म समभाव का भी अवसर बना दिया.
इस अवसर पर कुल 62 श्रावक-श्राविकाओं ने कठिन तपस्या की. इनमें 52 सिद्धि तप, 2 महामृत्युंजय तप यानी मासक्षमण तथा 8 तपस्वियों द्वारा आठ दिवसीय उपवास शामिल रहे. तपस्या की पूर्णाहुति के बाद इन सभी तपस्वियों के सम्मान में वरघोड़ा निकाला गया.

नगर के इतिहास में पहली बार 52 सिद्धतप तपस्वियों के अमृतमय पारणा महोत्सव का भव्य आयोजन गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ. आयोजन श्री सौधर्म बृहत्तपगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ, चातुर्मास समिति एवं परिषद परिवार के तत्वावधान में किया गया.
शुभारंभ सुबह 8:30 बजे महाराणा प्रताप बस स्टैंड से निकाले वरघोड़े से हुआ. विधायक दिनेश जैन बोस ने हरी झंडी दिखाकर वरघोड़े को रवाना किया. इसमें सजी हुई बग्गियां, बैंड-बाजे, ढोल तथा कलश लेकर चल रही महिला परिषद की सदस्यएं आकर्षण का केंद्र रहीं. वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गो से होता हुआ नागदा तिराहा स्थित गोविंदम वाटिका पहुंचा. मार्ग में जगह-जगह तपस्वियों का स्वागत एवं अनुमोदना की गई. गोविंदम वाटिका में आयोजित मुख्य समारोह में 52 सिद्धतप तपस्वियों का विधिवत पारणा कराया गया. दोपहर 12:39 बजे पारणा कार्यक्रम हुआ.

इस दौरान श्रद्धालुओं ने तपस्वियों के तप, त्याग और संयम की अनुमोदना करते हुए धर्मलाभ प्राप्त किया. कार्यक्रम साध्वीजी डॉ. अमृत रसा श्रीजी द्विशतावधानी, साध्वी श्री निराग रसा श्रीजी एवं साध्वीजी श्री जिनांशरसा श्रीजी की निश्रा में हुआ. जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने बताया समारोह में विधायक बोस सहित नगर के प्रतिष्ठित व्यापारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के सदस्य, मीडिया प्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे. श्री सौधर्म बृहत्तपगच्छीय त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ एवं अखिल भारतीय श्री राजेंद्र जैन नवयुवक परिषद परिवार के राष्ट्रीय एवं प्रांतीय पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में सदस्य भी शामिल हुए.

दिनभर चला स्वामी वात्सल्य: महोत्सव के दौरान पूरे दिन स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया. सिद्धतप पारणा के लाभार्थी सोनू बरड़िया के सिद्धतप अनुमोदनार्थ बरड़िया परिवार (बप्पैयावाला) रहा. सुबह की नवकारसी का लाभ लीलाबाई, दिनेश कुमार, अनिल कुमार एवं राजेश कुमार कांठेड़ परिवार ने लिया. वहीं संपूर्ण दिवस स्वामी वात्सल्य के लाभार्थी समरथमल-शकुंतला, शुभम-तानिया, संकेश, हितेश्वी एवं चौरड़िया परिवार रहे. आयोजन को सफल बनाने में श्री संघ अध्यक्ष अजयकुमार चौरड़िया, चातुर्मास समिति अध्यक्ष परेष कुमार चत्तर सहित श्री संघ, चातुर्मास समिति, परिषद परिवार एवं समाजजनों का विशेष सहयोग रहा. सकल जैन श्री संघ के साथ बाहर से आए 50 से अधिक श्री संघों के हजारों सदस्यों ने आयोजन में सहभागिता कर धर्मलाभ प्राप्त किया.
विभिन्न स्थानों पर लगाए स्वागत मंच
वरघोड़े का नगर में विभिन्न स्थानों पर स्वागत मंच लगाकर स्वागत किया गया. विधायक बोस, राजेश कांठेड़, पिंटू पोरवाल, ओम धमोनिया, प्रभुलाल मादलिया, अंजु मन, इस्लामिया कमेटी के डॉ. शहजाद मित्र मंडल, प्रतापसिंह गुर परिवार, ग्राम पंचायत महिदपुर रोड, गोपाल बैरगी मित्र मंडल, कमलकिशोर त्रिवेदी मित्र मंडल, घनश्याम शर्मा परिवार, सामाजिक कार्यकर्ता कान्हा श्रीकांत गुर्जर मित्र मंडल तथा जांगड़ा पंच पोरवाल की ओर से स्वागत किया.

प्रमुख मार्गों से गुजरा भव्य वरघोड़ा
तपस्वियों की तप-आराधना की पूर्णाहुति के बाद निकला वरघोड़ा जैसे-जैसे महिदपुर रोड के प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ा, वैसे-वैसे लोगों की सहभागिता भी बढ़ती गई. मार्ग के दोनों ओर नगरवासी खड़े होकर तपस्वियों के दर्शन करते और उनकी तपस्या की अनुमोदना करते दिखाई दिए. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में वरघोड़े को लेकर उत्सुकता रही. नगर की गलियों और मुख्य मार्गों से गुजरती धार्मिक यात्रा ने वातावरण को श्रद्धामय बना दिया. श्रावक-श्राविकाओं, युवाओं, महिलाओं और समाजजनों की बड़ी संख्या में मौजूदगी ने वरघोड़े को भव्य स्वरूप दिया. लगभग 3000 लोगों की सहभागिता के कारण प्रमुख मार्गों और चौराहों पर उत्सव जैसा वातावरण दिखाई दिया. वरघोड़े में शामिल झांकियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहीं. धार्मिक आस्था, संयम, तपस्या और त्याग की भावना को सामने रखती झांकियों को देखने के लिए मार्ग में जगह-जगह लोग ठहरते रहे. विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में इन्हें देखने को लेकर उत्सुकता दिखाई दी. तपस्वियों के साथ चल रहा यह धार्मिक कारवां जब नगर के प्रमुख चौराहों से गुजरता, तो वहाँ लोगों की भीड़ और बढ़ जाती.

चौराहों पर बढ़ती गई रौनक
वरघोड़े के मार्ग में आने वाले चौराहों पर श्रद्धा और उत्साह का अलग ही वातावरण देखने को मिला. जैसे ही तपस्वियों और झांकियों का कारवां किसी चौराहे पर पहुँचता, लोगों की निगाहें उनकी ओर टिक जातीं. कोई हाथ जोड़कर तपस्वियों के दर्शन करता तो कोई कुछ देर रुककर झांकियों को देखता रहा.
वरघोड़े के आगे बढ़ने के साथ नगर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की सहभागिता जुड़ती गई. धार्मिक यात्रा में शामिल समाजजन और मार्ग के किनारे मौजूद नगरवासी एक ही वातावरण का हिस्सा नजर आए. तपस्वियों के प्रति सम्मान और आयोजन के प्रति उत्साह ने पूरे मार्ग को जीवंत बनाए रखा.
बड़ी मस्जिद के सामने हुआ आत्मीय स्वागत
वरघोड़े का एक विशेष और भावपूर्ण दृश्य बड़ी मस्जिद के सामने देखने को मिला. यहाँ मुस्लिम समाज की ओर से सभी तपस्वियों का मोतियों की मालाओं से आत्मीय स्वागत किया गया.
धार्मिक यात्रा के बीच मुस्लिम समाज द्वारा तपस्वियों का सम्मान किए जाने का यह दृश्य आपसी सम्मान और भाईचारे की भावना को सामने लाने वाला रहा. यहाँ मौजूद लोगों के लिए भी यह आयोजन का एक उल्लेखनीय क्षण बना. तपस्वियों के स्वागत के बाद वरघोड़ा आगे बढ़ा, लेकिन यह दृश्य पूरे आयोजन की सामाजिक समरसता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया.
इस वरघोड़ का स्वागत विधायक दिनेशजैन बोस, सरपंच रीतु सत्यनारायण पाटीदार, प्रतापसिंह गुर, कमलकिशोर त्रिवेदी, कमलसिंह पवार, भरत शर्मा, राजेश कांठेड़, प्रकाश जैन खारुआवाला सहित कई गणमान्यों ने किया.

नागदा चौराहे पर शाल-श्रीफल से बहुमान
वरघोड़ा आगे बढ़ते हुए नागदा चौराहे पहुँचा, जहाँ सिख समाज की ओर से तपस्वियों का शाल-श्रीफल से बहुमान किया गया. इस अवसर पर भी श्रद्धा और आत्मीयता का वातावरण रहा.
विभिन्न समाजों द्वारा तपस्वियों का सम्मान किए जाने से आयोजन का स्वरूप केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा. बड़ी मस्जिद के सामने मुस्लिम समाज का स्वागत और नागदा चौराहे पर सिख समाज का बहुमान सामाजिक सद्भाव और आपसी सम्मान की भावना को सामने लाता रहा.
तपस्वियों के दर्शन के लिए उमड़ा जनसमूह
वरघोड़ा नगर के प्रमुख मार्गों से आगे बढ़ता रहा और पूरे मार्ग में तपस्वियों के प्रति श्रद्धा का वातावरण बना रहा. तपस्या पूर्ण करने वाले श्रावक-श्राविकाओं के प्रति नगरवासियों ने सम्मान व्यक्त किया. कठिन तप और संयम की साधना के बाद पूर्णाहुति के इस अवसर पर तपस्वियों के चेहरों पर संतोष और प्रसन्नता दिखाई दी.
महिदपुर रोड के लगभग 50 जैन परिवारों से जुड़ी तप-आराधना जब वरघोड़े के रूप में नगर की सड़कों पर पहुँची, तो उसमें हजारों नगरवासियों की सहभागिता जुड़ गई. इस तरह निजी धार्मिक साधना का यह अवसर पूरे नगर की सामूहिक सहभागिता का उत्सव बन गया.
साध्वी भगवंतों की प्रेरणा से बना तप का संकल्प
तप-आराधना और उसके भव्य समापन में पूज्य साध्वी भगवंतों की प्रेरणा और तपस्वियों के मनोबल की महत्वपूर्ण भूमिका रही. विशेष रूप से साध्वी श्री निरागरसाश्री जी महाराज साहब जी एवं साध्वी श्री जिनांगरसाश्री जी महाराज साहब जी के प्रेरणादायी सहयोग का उल्लेख किया गया.
तपस्वियों को निरंतर आध्यात्मिक ऊर्जा, उत्साह और साधना की प्रेरणा मिलती रही. इसी संकल्प के साथ 62 श्रावक-श्राविकाओं ने अपनी तपस्या को पूर्ण किया.

धर्म से सामाजिक समरसता तक पहुँचा आयोजन
इस आयोजन की विशेषता केवल 62 तपस्वियों की कठिन तपस्या और उसकी पूर्णाहुति ही नहीं रही, बल्कि विभिन्न समाजों की सहभागिता भी रही. मुस्लिम समाज द्वारा बड़ी मस्जिद के सामने किया गया स्वागत और सिख समाज द्वारा नागदा चौराहे पर किया गया बहुमान इस बात का उदाहरण बना कि धार्मिक अवसर आपसी सम्मान और सामाजिक सद्भाव का माध्यम भी बन सकते हैं. गणमान्य नागरिकों ने भी तपस्वियों की कठोर आराधना की अनुमोदना की. विभिन्न समाजों के लोगों की सहभागिता से आयोजन जैन समाज के कार्यक्रम से आगे बढ़कर पूरे महिदपुर रोड की सामूहिक भागीदारी का अवसर बन गया.

62 तपस्वी, 50 परिवार और करीब 3000 सहभागी
महिदपुर रोड के लगभग 50 जैन परिवारों में पल्लवित हुई तप-आराधना की भावना जब वरघोड़े के रूप में नगर की सड़कों पर निकली, तो लगभग 3000 लोगों की सहभागिता से उसका स्वरूप व्यापक हो गया.
52 सिद्धि तप, 2 मासक्षमण और 8 आठ-दिवसीय उपवास सहित कुल 62 तपस्वियों की तपस्या इस आयोजन का केंद्र रही. इनके साथ समाजजनों, युवाओं, महिलाओं और विभिन्न समुदायों की सहभागिता ने आयोजन को विशेष बना दिया.
17 सितंबर 2026 का यह दिन महिदपुर रोड के धार्मिक और सामाजिक जीवन में एक उल्लेखनीय अवसर के रूप में सामने आया. तप, त्याग और संयम की साधना के साथ विभिन्न समुदायों द्वारा व्यक्त सम्मान और सहभागिता ने इस आयोजन को सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया. तपस्या की पूर्णाहुति पर सभी 62 श्रावक-श्राविकाओं की अनुमोदना की गई. आयोजन से जुड़े कार्यकर्ताओं, युवा, महिला शक्ति, समाजजनों और विभिन्न समुदायों के सहयोग के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया. तप से आरंभ हुई यह यात्रा श्रद्धा से होते हुए सामाजिक समरसता तक पहुँची और महिदपुर रोड में एक ऐसा दृश्य छोड़ गई, जिसमें धार्मिक आस्था के साथ आपसी सम्मान और मानवता की भावना भी दिखाई दी.

